Ranji Trophy: पापा मुंबई के विस्फोटक बल्लेबाज, खुद रोहित-सूर्या के साथ खेला, 400 वाले चिन्मय सुतार की अनकही कहानी


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पापा थे मुंबई के हिटर, खुद रोहित-सूर्या के साथ खेला, 400 वाले सुतार की कहानी

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Chinmay Sutar Ranji Trophy Success Story: जब चिन्मय सुतार ने रणजी ट्रॉफी में नाबाद 400 रन की ऐतिहासिक पारी खेली तो अपनी सबसे बड़ी खुशी सबसे पहले पिता के साथ साझा की. नगालैंड के खिलाफ मिजोरम के लिए चौहरा शतक लगाने के बाद सुतार अपने पिता राजेश से बात करते हुए भावुक हो गए. चिन्मय के पिता राजेश मुंबई के लिए क्रिकेट खेला करते थे.

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400 रन बनाने वाले चिन्मय सुतार की कहानी

नई दिल्ली: 24 घंटे पहले जो चिन्मय सुतार दुनिया के लिए अनजान थे, अब वह किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. रणजी ट्रॉफी में 400 रन की मैराथन पारी खेलकर उन्होंने अपने नाम का डंका बजा दिया है. चिन्मय की पारी जितनी ड्रामेटिक थी, उनकी असल जिंदगी उससे ज्यादा नाटकीय है. आपको शायद ही पता हो कि नगालैंड के खिलाफ मिजोरम के लिए 517 गेंद में 46 चौके और सात छक्के लगाने वाले चिन्मय सुतार के पिता राजेश सुतार 90 के दशक में मुंबई के धुआंधार बल्लेबाज थे. वह लंबे-लंबे छक्के लगाने के लिए मशहूर थे.

मुंबई में कड़ा कॉम्पिटिशन तो मिजोरम का रुख
अब आप सोच रहे होंगे कि जब पिता मुंबई के लिए क्रिकेट खेलते थे तो उनका बेटा चिन्मय देश के उत्तरपूर्वी राज्य मिजोरम के लिए कैसे खेलने लगा. दरअसल, मिजोरम की टीम से जुड़ने से पहले चिन्मय भी मुंबई की ओर से खेलते थे. वह विजय हजारे ट्रॉफी में मुंबई का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. वह रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव और सरफराज खान सरीखे दिग्गजों के साथ भी खेल चुके हैं, लेकिन जब कड़े कॉम्पिटिशन के चलते मुंबई की सीनियर टीम में जगह नहीं बन पा रही थी तो उन्होंने बतौर गेस्ट प्लेयर मिजोरम का रुख किया. मौजूदा रणजी सीजन के पहले मैच में वह 99 रन पर आउट हो गए थे. चिन्मय सुतार ने 400 रन बनाने के बाद सबसे पहले पिता को फोन किया:

400 रन बनाना किसी सपने जैसा था. दिन का खेल खत्म होने के बाद मैंने सबसे पहले अपने पिता को फोन किया. मेरे पापा मुंबई के लिए सात प्रथम श्रेणी मैच खेल चुके हैं. मुझे जब भी खेलने का मौका नहीं मिलता था, पापा मुश्किल समय में साथ खड़े रहते और अपनी क्षमता पर भरोसा बनाए रखने की सलाह देते थे.

ब्रैडमैन-लारा सरीखे दिग्गजों के क्लब में पहुंचे चिन्मय
इस ऐतिहासिक पारी के साथ चिन्मय सुतार प्रथम श्रेणी क्रिकेट में चौहरा शतक लगाने वाले भारत के सिर्फ दूसरे बल्लेबाज बन गए. उनसे पहले महाराष्ट्र के बीबी निंबालकर ने नाबाद 443 रन बनाए थे. इसके अलावा वर्ल्ड क्रिकेट में महान डॉन ब्रैडमैन (नाबाद 452) और वेस्टइंडीज के दिग्गज ब्रायन लारा (नाबाद 501 रन) भी ये कारनामा कर चुके हैं.

छकछुआक नहीं होते तो 400 रन असंभव था
जब सुतार 231 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे, तभी मिजोरम ने अपने 9 विकेट गंवा दिए थे. टीम पर ऑलआउट होने का खतरा मंडरा रहा था, लेकिन आखिरी बल्लेबाज लालरेम्पुइया छकछुआक ने 76 गेंदों में नाबाद 14 रन बनाकर 10वें विकेट के लिए उनके साथ 189 रन की अटूट साझेदारी की और चिन्मय सुतार के 400 रन बनाने में अहम योगदान निभाया.



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