Public opinion: चारों ओर गंगा पर रेल पुल, फिर भी बेगूसराय की रेल कनेक्टिविटी 20 साल पीछे क्यों?

Public opinion: चारों ओर गंगा पर रेल पुल, फिर भी बेगूसराय की रेल कनेक्टिविटी 20 साल पीछे क्यों?


बेगूसराय. बिहार की उद्योग नगरी बेगूसराय जिले के चारों ओर गंगा पर रेल पुल बन चुके हैं. रेल नेटवर्क का विस्तार भी हुआ है, लेकिन यात्रियों की कई पुरानी समस्याएं आज भी बरकरार हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 20 साल पहले बेगूसराय से दिल्ली जाने में जितना समय लगता था, आज भी लगभग उतना ही समय लग रहा है. देश के कई बड़े शहरों के लिए सीधी और नियमित ट्रेनों की कमी आज भी है. जिले में बरौनी जंक्शन , न्यू बरौनी जंक्शन , बछवाड़ा जंक्शन, सबदलपुर जंक्शन सहित कई रेलवे स्टेशन हैं पर यात्रियों को आज भी बड़े शहर हावड़ा जैसे महानगरों के लिए मोकामा या हाथीदह जंक्शन का सहारा लेना पड़ता है. इस मुद्दे पर लोकल 18 पर बेगूसराय रेलवे स्टेशन से मुद्दा क्या है? देखिए

पहचान बड़ी पर व्यवस्था छोटी ?

रेल यात्री और स्थानीय रेल पत्रकार घनश्याम कुमार ने कहा कि बेगूसराय बिहार की औद्योगिक राजधानी के तौर पर पहचान रखता है. यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग रहते और काम करते हैं. ऐसे में देश के प्रमुख शहरों से इसकी बेहतर रेल कनेक्टिविटी जरूरी है. उनके मुताबिक, 20 वर्षों में देश के कई हिस्सों में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हुआ, लेकिन बेगूसराय को अपेक्षित कनेक्टिविटी नहीं मिल सकी.
यहां आज भी यात्रियों की प्रमुख मांग बेगूसराय से हावड़ा की सीधी ट्रेन को लेकर है. हावड़ा और कोलकाता जाने वाले यात्रियों को कई बार दूसरे जिले के स्टेशनों और जंक्शन के जरिए यात्रा करनी पड़ती है. लोगों का कहना है कि औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए बेगूसराय से हावड़ा के लिए सीधी रेल सेवा महत्वपूर्ण है. जिले से देश के प्रमुख राज्यों और महानगरों (जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, तेलंगाना, राजस्थान, महाराष्ट्र के लिए एक दो ट्रेन तो है. यानी देश के 29 राज्यों में सिर्फ 7 राज्यों के लिए सेवा है.पर इसके अलावा शेष पूरे देश जैसे
दक्षिण भारत के कुछ दूर-दराज के राज्यों (जैसे केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, गोवा) और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों के लिए कोई सीधी दैनिक या नियमित ट्रेन सेवा उपलब्ध नहीं है.

दिल्ली आज भी 18-20 घंटे दूर

स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 20 साल पहले दिल्ली जाने में 18 से 20 घंटे लगते थे और आज भी यात्रा का समय लगभग इसी दायरे में है. एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि बदलाव के नाम पर 20 वर्षों में महज एक-दो घंटे का अंतर दिखाई देता है. उनका सवाल है कि जब गंगा पर एक के बाद एक रेल पुल बन गए और चारों दिशाओं से रेल संपर्क मजबूत हुआ, तो बेगूसराय से दिल्ली की यात्रा का समय क्यों नहीं घटा?
देश के कई बड़े शहरों के लिए ट्रेन पकड़ने के लिए यात्रियों को मोकामा, हाथीदह, खगड़िया या समस्तीपुर जैसे जंक्शन का रुख करना पड़ता है. दक्षिण भारत और पश्चिम भारत के कई प्रमुख शहरों के लिए भी नियमित सीधी ट्रेनों की उपलब्धता को लेकर यात्री सवाल उठाते रहे हैं.रेल यात्री सरफराज ने कहा कि उनकी नजर में बेगूसराय रेलवे स्टेशन आज भी विकास के मामले में पीछे है. उन्होंने कहा कि जिले की पहचान जितनी बड़ी है, उसके अनुरूप रेलवे स्टेशन और रेल सुविधाओं का विकास नहीं हुआ है.

वर्ल्ड क्लास स्टेशन का काम भी सवालों में

घनश्याम कुमार ने बेगूसराय स्टेशन को वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाने की योजना का भी मुद्दा उठाया. उनका कहना है कि कुछ वर्ष पहले बेगूसराय समेत राजेंद्र नगर, गया और मुजफ्फरपुर जैसे स्टेशनों को आधुनिक स्वरूप देने की योजना में शामिल किया गया था. दूसरे स्टेशनों पर काम दिखाई दे रहा है, लेकिन बेगूसराय में अब तक धरातल पर अपेक्षित काम शुरू नहीं हुआ है.
एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि पहले बेगूसराय के रेल विकास को लेकर गंगा पर पुल नहीं होने को बड़ी बाधा माना जाता था. अब राजेंद्र पुल के अलावा नए रेल पुल भी बन चुके हैं और चारों दिशाओं से रेल संपर्क मजबूत हुआ है. इसके बावजूद यात्रियों की पुरानी मांगें पूरी नहीं हुई हैं.



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