BCCI ने प्रज्ञान ओझा को दिया था गंभीर-कोहली के बीच झगड़ा सुलझाने का काम
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के प्रज्ञान ओझा को टीम इंडिया का नया मुख्य चयनकर्ता बनाने का ऐलान कर दिया है. इस बीच खबर है कि BCCI के शीर्ष अधिकारियों ने ओझा को गौतम गंभीर और विराट कोहली के बीच झगड़ा सुलझाने का जिम्मा सौंपा था.
बीसीसीआई ने गौतम गंभीर और विराट कोहली के बीच झगड़ा सुझलाने में प्रज्ञान ओझा की मदद ली थी.
भारतीय क्रिकेट में गौतम गंभीर और विराट कोहली के बीच तालमेल को लेकर अक्सर चर्चा होती रही है. अब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों के बीच बातचीत की कमी को दूर करने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने नए मुख्य चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा की मदद ली थी. बताया जा रहा है कि बोर्ड ने ओझा से दोनों के बीच बेहतर संवाद बनाने और स्थिति को संभालने के लिए कहा था.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रज्ञान ओझा ने विराट कोहली से इस मुद्दे पर बात भी की थी. ओझा और कोहली भारतीय टीम के लिए एक साथ 22 मैच खेल चुके हैं. ऐसे में दोनों के बीच पहले से जान-पहचान और अच्छे संपर्क को इस जिम्मेदारी के लिए अहम माना गया.
प्रज्ञान ओझा को ही क्यों चुना गया?
प्रज्ञान ओझा भारतीय टीम के लिए 24 टेस्ट मैच खेल चुके हैं. वह अब तक राष्ट्रीय चयनकर्ता के तौर पर ज्यादा चर्चा में नहीं रहे, लेकिन बोर्ड के भीतर और खिलाड़ियों के बीच उनके अच्छे संपर्क बताए जाते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इन्हीं संपर्कों को देखते हुए BCCI के अधिकारियों ने उन्हें गंभीर और कोहली के बीच संवाद बेहतर करने की जिम्मेदारी दी थी.
ओझा के बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ भी अच्छे संबंध बताए जाते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि टीम चयन से जुड़े मामलों में लक्ष्मण की भूमिका भी अहम होती जा रही है.
अगरकर के बाद ओझा के सामने बड़ी चुनौती
मुख्य चयनकर्ता की कुर्सी संभालना प्रज्ञान ओझा के लिए आसान नहीं होगा. उनसे पहले अजीत अगरकर इस जिम्मेदारी को संभाल रहे थे. उनके कार्यकाल में भारतीय टीम ने दो आईसीसी ट्रॉफियां जीतीं. ऐसे में ओझा पर टीम के अच्छे प्रदर्शन को जारी रखने का दबाव रहेगा.
अगरकर की एक खास बात यह थी कि वह प्रेस कॉन्फ्रेंस में टीम चयन से जुड़े फैसलों के बारे में खुलकर बताते थे. अब ओझा को भी यह दिखाना होगा कि वह टीम चुनने के साथ-साथ अपने फैसलों को सही तरीके से समझा सकते हैं या नहीं.
सिर्फ संपर्क नहीं, सही फैसले भी जरूरी
मुख्य चयनकर्ता का काम सिर्फ खिलाड़ियों को चुनना नहीं होता. उसे टीम की जरूरत, खिलाड़ियों के प्रदर्शन और भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखकर फैसले लेने होते हैं. साथ ही खिलाड़ियों और टीम प्रबंधन के साथ तालमेल बनाना भी जरूरी होता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रज्ञान ओझा संवाद और संपर्क के मामले में मजबूत माने जाते हैं. लेकिन उनकी असली परीक्षा तब होगी, जब उन्हें टीम चयन से जुड़े बड़े फैसले लेने होंगे. आने वाले समय में यह साफ होगा कि वह इस अहम जिम्मेदारी को कितनी अच्छी तरह निभा पाते हैं और भारतीय क्रिकेट को कितनी सफलता दिला पाते हैं.