न मां को स्नान न पोशाक में बदलाव, कैलादेवी मंदिर की ये परंपरा क्यों है खास?
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Kaila Devi Temple: करौली के प्रसिद्ध कैलादेवी मंदिर में शारदीय नवरात्रि के दौरान अनोखी परंपरा निभाई जाती है, यहां नौ दिनों तक मां कैलादेवी को न स्नान कराया जाता है और न ही उनकी पोशाक बदली जाती है. मान्यता है कि इस परंपरा का संबंध मां दुर्गा और राक्षसों के बीच हुए युद्ध से है। जानिए इस खास परंपरा के पीछे की धार्मिक मान्यता.
देशभर में शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. नौ दिनों तक मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होते हैं और माता रानी का अलग-अलग शृंगार किया जाता है. लेकिन राजस्थान के करौली स्थित प्रसिद्ध कैलादेवी आस्थाधाम में शारदीय नवरात्रि से जुड़ी एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है, जो इसे दूसरे शक्तिपीठों से अलग पहचान देती है. यहां नवरात्रि के नौ दिनों तक मां कैलादेवी को न तो स्नान कराया जाता है और न ही उनकी पोशाक बदली जाती है.
मान्यता के अनुसार इन नौ दिनों में माता के मठ में पोछा भी नहीं लगाया जाता. त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां कैलादेवी के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है. मंदिर से जुड़ी इस परंपरा को लेकर मान्यता है कि इसके पीछे मां और राक्षसों के बीच हुए युद्ध की कथा जुड़ी हुई है. यही वजह है कि नवरात्रि के दौरान मंदिर में पूजा-पाठ और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला जारी रहता है.
कैलादेवी आस्थाधाम में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही माता का विशेष शृंगार किया जाता है. मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के प्रथम दिन मां को जो पोशाक और आभूषण धारण कराए जाते हैं, उन्हीं में माता पूरे नौ दिनों तक भक्तों को दर्शन देती हैं. इस दौरान उनकी पोशाक नहीं बदली जाती और न ही स्नान कराया जाता है.
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इस अनोखी परंपरा के पीछे की धार्मिक मान्यता के बारे में राज्याचार्य पंडित प्रकाश चंद जती बताते हैं कि शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा और राक्षसों के बीच हुए युद्ध की मान्यता जुड़ी हुई है. उनका कहना है कि इस प्रसंग का उल्लेख दुर्गासप्तशती में भी मिलता है.मान्यता के अनुसार, राक्षसों के साथ संग्राम के दौरान मां ने उनका मुकाबला किया और अंततः उन्हें पराजित किया. इसी युद्ध से जुड़े प्रसंग को ध्यान में रखते हुए नवरात्रि के नौ दिनों को विशेष धार्मिक अवधि माना जाता है.
इसी मान्यता के आधार पर कैलादेवी आस्थाधाम में माता के स्नान, पोशाक परिवर्तन और मठ की सफाई से जुड़ी परंपराओं का पालन किया जाता है. शारदीय नवरात्रि के दौरान कैलादेवी मंदिर में माता की आराधना का विशेष महत्व रहता है. मान्यता के अनुसार, इन नौ दिनों में माता के मठ में पोछा नहीं लगाया जाता और उनकी पोशाक भी नहीं बदली जाती. इस अवधि में विद्वान पंडितों द्वारा माता को प्रसन्न करने के लिए विशेष पाठ किए जाते हैं.
नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु कैलादेवी के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं. भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और सुख-समृद्धि की कामना के साथ माता के दरबार में धोक लगाते हैं.