IAS Tukaram Mundhe: जब कोई युवा आईएएस अफसर बनने का सपना देखता है, तो उसके मन में उस पद का रुतबा, सम्मान और देश की सेवा करने की इच्छा होती है. लेकिन इस नौकरी के साथ कई ऐसी चुनौतियां भी आती हैं, जिनका असर सिर्फ अफसर पर नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार पर पड़ता है. महाराष्ट्र के आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे की कहानी भी इसी पहलू को सामने लाती है. बताया जाता है कि करीब 21 साल की सर्विस में उनका 25 बार ट्रांसफर हुआ. हर बार नई जगह जाना, परिवार को नए माहौल में ढालना और बच्चों की पढ़ाई को दोबारा शुरू करना आसान नहीं था. यही वजह है कि उन्होंने अपने बच्चों के भविष्य को लेकर एक ऐसी बात कही, जो सुनने में हैरान कर सकती है. उनका कहना है कि अगर भविष्य में उनके बच्चे आईएएस (IAS) बनने की सलाह मांगेंगे, तो वह उन्हें यह रास्ता चुनने से मना करेंगे.
अपने बच्चों को IAS बनने से क्यों रोकना चाहते हैं तुकाराम मुंढे?
तुकाराम मुंढे की इस सलाह के पीछे उनके परिवार का अनुभव बताया जाता है. सरकारी नौकरी में ट्रांसफर सर्विस का हिस्सा होता है, लेकिन जब यह बार-बार हो, तो परिवार को भी कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है. तुकाराम मुंढे के मामले में भी हर नए ट्रांसफर के साथ रहने की जगह बदलने और परिवार को नए माहौल में ढालने की चुनौती सामने आई.
इसका असर उनके बेटे की पढ़ाई पर भी पड़ा. बताया जाता है कि 5वीं कक्षा तक पहुंचने से पहले ही उनके बेटे को 6 बार स्कूल बदलना पड़ा. हर बार नए स्कूल में जाना, नए टीचर्स से परिचित होना और नए दोस्त बनाना उसके लिए एक नई शुरुआत जैसा रहा होगा. वहीं, उनकी पत्नी को भी हर ट्रांसफर के बाद अपनी दिनचर्या और जीवन को नए सिरे से व्यवस्थित करना पड़ा.
तुकाराम मुंढे ने अपनी नौकरी में इन बदलावों को सर्विस का हिस्सा मानकर स्वीकार किया, लेकिन वह नहीं चाहते कि उनके बच्चों को भी अपने जीवन में इतनी बार बदलावों का सामना करना पड़े. उनके लिए यह केवल नौकरी बदलने या शहर बदलने की बात नहीं, बल्कि परिवार की स्थिरता और बच्चों के बचपन से जुड़ा सवाल है.
IAS के अलावा दूसरे करियर को भी दे रहे हैं महत्व
तुकाराम मुंढे का मानना है कि युवाओं को करियर चुनते समय केवल IAS जैसी सरकारी नौकरी को ही अपनी मंजिल नहीं मानना चाहिए. उनके अनुसार, आज के युवाओं के पास कई तरह के अवसर हैं. वे अपना कारोबार शुरू कर सकते हैं या समाज में बदलाव लाने के लिए लीडरशिप की भूमिका निभा सकते हैं.
वह चाहते हैं कि नई पीढ़ी अपनी रुचि, क्षमता और सपनों के हिसाब से करियर चुने. जरूरी नहीं कि समाज की सेवा करने के लिए हर किसी को सरकारी अधिकारी ही बनना पड़े. कारोबार, नए विचारों और दूसरी फील्ड के जरिए भी लोगों की जिंदगी में बदलाव लाया जा सकता है. उनका यह नजरिया युवाओं को करियर के अलग-अलग विकल्पों के बारे में सोचने का मौका देता है.
UPSC परीक्षा में हासिल की थी 20वीं रैंक
दरअसल, तुकाराम मुंढे 2005 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. उन्होंने साल 2004 में आयोजित यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की थी. प्रशासनिक सेवा में रहते हुए वह अपने सख्त कामकाज और नियमों को लागू करने के तरीके के लिए चर्चा में रहे हैं.
मई 2026 में उन्होंने महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त का पद संभाला. इस जिम्मेदारी के तहत खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन कराना और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना उनके काम का हिस्सा है. उनका कहना है कि नियम-कानून तभी प्रभावी होते हैं, जब उन्हें जमीन पर लागू किया जाए और संबंधित लोगों तक उनकी जानकारी पहुंचाई जाए.