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हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में आज से सात दिवसीय ऐतिहासिक दशहरा उत्सव शुरू होगा. भगवान रघुनाथ की रथयात्रा के साथ शुभारंभ होगा. सुरक्षा के लिए 1265 जवान तैनात किए गए हैं और 300 से अधिक देवी-देवता शामिल हों
एसपी ने बताया कि दशहरा उत्सव के लिए ढालपुर मैदान को 6 सेक्टर में बांटा गया है. (File Photo)
कुल्लू. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में दशहरा उत्सव का आगाज होने जा रहा है. 21 अक्तूबर शाम करीब चार बजे ढालपुर स्थित रथ मैदान में भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा के साथ सात दिवसीय उत्सव का शुभारंभ होगा. ऐसे में पुलिस प्रशासन ने पुख्ता प्रबंध किए गए हैं. ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में उत्सव के दौरान 1265 पुलिस और होमगार्ड के जवान सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहेंगे. एसपी कुल्लू अभिषेक सेकर ने यह जानकारी दी है.
एसपी ने बताया कि दशहरा उत्सव के लिए ढालपुर मैदान को 6 सेक्टर में बांटा गया है और हर सेक्टर में गैजेटिड ऑफिसर की तैनाती की गई है. 155 सीसीटीवी और 5 ड्रोन कैमरे से हर गतिविधि पर नज़र रखी जाएगी. सुरक्षा की दृष्टि से चप्पे चप्पे पर पुलिस और होम गार्ड के जवान तैनात किए गए हैं. एसपी ने बता. कि दशहरा उत्सव के दौरान एंटी गुड्डा सेल और चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस बल तैनात रहेगा .
30 इलेक्ट्रिक और 15 बसों लगाई गईं
दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष और विधायक कुल्लू सुंदर सिंह ठाकुर ने दशहरा स्पेशल बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. 30 इलेक्ट्रिक मेला स्पेशल बसें लगाई गई हैं. जा रही है.इसके इलावा 15 ऑर्डिनेरी बसों को भी लगाया गया है.हर 15 मिनट के बाद बस की आवाजाही होगी और रायसन से बजौरा और बंजार और आनी के लिए बंसें चलेंगी.
विधायक ने बताया कि रात्रि 1 बजे तक लोगों बस की सुविधा मिलेगी. सांस्कृतिक संध्याओं में पंजाबी गायक सतिंदर सरताज और सलमान अली सहित कई कलाकार अपनी गायकी का जलवा दिखाएंगे. इस धार्मिक महाकुंभ में करीब 300 से अधिक देवी देवता भी शामिल होंगे. दशहरा उत्सव समिति ने जिले के 347 देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया है.
दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष और विधायक कुल्लू सुंदर सिंह ठाकुर ने दशहरा स्पेशल बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.
मनाली से चल पड़ी है माता हिडिम्बा
मनाली से माता हिडिम्बा कुल्लू दशहरा के लिए चल पड़ी हैं और उनके आने के बाद ही दशहरा उत्सव का आगाज होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता के बिना दशहरा उत्सव की शुरुआत नहीं होती. ऐसा माना जाता है कि माता हिडिंबा कुल्लू घाटी की अधिष्ठात्री हैं और वे दशहरा उत्सव की रक्षक भी हैं. जब तक डूंगरी मंदिर से माता हिडिंबा की पालकी ढालपुर नहीं पहुंचती, तब तक भगवान रघुनाथ जी की रथयात्रा शुरू नहीं होती है. माता हिडिंबा के आगमन के बाद ही रथयात्रा की शुरुआत होती है और हजारों की संख्या में श्रद्धालु रथ के साथ चलते हैं.