सिर्फ विजयादशमी पर खुलता है 160 साल पुराना मंदिर, दर्शन के लिए उमड़ी भीड़
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Dussehra 2026: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के हटरी चौक स्थित करीब 160 साल पुराना सीताराम हनुमान मंदिर दशहरे पर ही खुलता है. आज 20 अक्टूबर सुबह 7 बजे मंदिर के पट खुलते ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. मान्यता है कि यहां दर्शन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस अनूठी परंपरा के चलते भक्त पूरे साल दशहरे का इंतजार करते हैं.
बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जिसके पट खुलने का श्रद्धालु पूरे साल इंतजार करते हैं. विजयादशमी यानी दशहरे के दिन ही जूना बिलासपुर के हटरी चौक स्थित सीताराम हनुमान मंदिर के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले जाते हैं. करीब 160 साल पुराने इस मंदिर की मान्यता और परंपरा ऐसी है कि साल में केवल एक दिन दर्शन का अवसर मिलने के कारण यहां सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है. आज 20 अक्टूबर सुबह 7 बजे जैसे ही मंदिर के पट खुले श्रद्धालु भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी के दर्शन के लिए कतार में लग गए. कोई अपनी मनोकामना लेकर पहुंचा, तो कोई वर्षों से चली आ रही परंपरा को निभाने और भगवान का आशीर्वाद लेने आया. इस बार मंदिर सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक दर्शन के लिए खोला गया है. खास बात यह है कि सोशल मीडिया पर भी इस मंदिर की चर्चा होती है, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शन करने पहुंच रहे हैं.
बिलासपुर के जूना बिलासपुर स्थित हटरी चौक का सीताराम हनुमान मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के लिए जाना जाता है. आम मंदिरों की तरह यहां रोजाना दर्शन नहीं होते बल्कि साल में केवल दशहरे के दिन ही श्रद्धालुओं के लिए पट खोले जाते हैं. इस खास अवसर पर सुबह से ही मंदिर के बाहर भक्तों की कतार लग गई. श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते हुए भगवान के दर्शन कर रहे हैं. मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना हुआ है. इस साल मंदिर के पट सुबह 7 बजे से दोपहर 4 बजे तक खुले रखे गए हैं ताकि श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकें.
नीम की जड़ों से प्रतिमाएं प्रकट होने की मान्यता
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास करीब 160 साल पुराना है. बताया जाता है कि जिस स्थान पर आज भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी विराजमान हैं, वहां पहले एक विशाल नीम का पेड़ हुआ करता था. समय के साथ पेड़ सूखकर गिर गया और उसकी जड़ों से भगवान की प्रतिमाएं प्रकट होने की मान्यता प्रचलित हुई. इसके बाद इन प्रतिमाओं को स्थापित कर मंदिर का निर्माण कराया गया और विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा की गई. तब से पांडेय परिवार मंदिर का संचालन करता आ रहा है. मंदिर से जुड़ी इसी परंपरा और आस्था के कारण दशहरे के दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
मनोकामना पूरी होने की मान्यता
इस मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है. मान्यता है कि दशहरे के दिन यहां भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी के दर्शन करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी वजह से इसे मनोकामना पूर्ति मंदिर भी कहा जाता है. कोई परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर पहुंचता है, तो कोई अपनी अधूरी इच्छा पूरी होने की प्रार्थना करता है. कई श्रद्धालु हर साल यहां दर्शन करने आते हैं जबकि कुछ लोग पहली बार मंदिर पहुंचे हैं. श्रद्धालु वंदना यादव ने लोकल 18 से कहा कि वह कई साल से इस मंदिर के बारे में सुन रही थीं लेकिन इस बार पहली बार दर्शन करने का अवसर मिला. दर्शन के बाद उन्हें काफी अच्छा लगा.
रील देखकर दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु
मंदिर की अनूठी परंपरा अब सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींच रही है. श्रद्धालु रूपेंद्र यादव ने कहा कि उन्होंने इस मंदिर के बारे में रील में देखी थी. दशहरे के दिन मंदिर खुलने और यहां दर्शन से मनोकामना पूरी होने की मान्यता के बारे में जानकर वह दर्शन करने पहुंचे. सोशल मीडिया पर मंदिर की चर्चा होने से भी लोगों में इसे देखने और यहां पूजा-अर्चना करने की दिलचस्पी बढ़ रही है.
श्रद्धालु बोले- भगवान पर पूरा विश्वास
मंदिर से दर्शन करके निकले विनोद कुमार देवांग ने कहा कि यह मंदिर हर साल दशहरे के दिन खुलता है. यहां दर्शन करने आने वाले लोगों की मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है और यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है. उनके मुताबिक, इस बार सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक दर्शन की व्यवस्था की गई है. उन्होंने भी अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखी है और उसके पूरा होने की आशा जताई. वहीं अन्य श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर में दर्शन करना उनके लिए आस्था और विश्वास का विषय है.
दशहरे पर आस्था का अनूठा संगम
विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है. इस दिन बिलासपुर के सीताराम हनुमान मंदिर में उमड़ने वाली भीड़ शहर की धार्मिक परंपराओं और लोगों की अटूट आस्था को दर्शाती है. साल में केवल एक दिन खुलने वाले इस मंदिर के दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचते हैं. सुबह से कतार में लगकर भक्त भगवान के दर्शन करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. करीब 160 साल पुरानी परंपरा आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है. दशहरे के अवसर पर यह मंदिर बिलासपुर में आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.