सऊदी के लिए हूतियों से भिड़ेगा पाकिस्तान? मुनीर की सेना सीधी जंग के लिए तैयार, ईरान पर भी नजर


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यमन के हूतियों के बढ़ते हमलों के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए हर जरूरी मदद देने की बात कही है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि सऊदी अरब की संप्रभुता और धार्मिक स्थलों की रक्षा पाकिस्तान के लिए सबसे ऊपर है. पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच अगस्त में रक्षा समझौता हुआ था. पाकिस्तान ने इसे रक्षात्मक गठबंधन बताते हुए क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए बातचीत पर जोर दिया.

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सऊदी के लिए हूतियों से भिड़ेगा पाकिस्तान? मुनीर की सेना सीधी जंग के लिए तैयारZoom

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी.

इस्लामाबाद: यमन के हूतियों के बढ़ते हमलों के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है. पाकिस्तानी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि सऊदी अरब की संप्रभुता, उसकी क्षेत्रीय अखंडता और वहां के धार्मिक स्थलों की रक्षा के लिए पाकिस्तान हर जरूरी मदद दे रहा है और आगे भी देता रहेगा. हालांकि, पाकिस्तान ने यह साफ नहीं किया कि यह मदद किस तरह की होगी और इसका दायरा कितना बड़ा होगा. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने रविवार को डिजिटल समाचार पत्र ‘इंडिपेंडेंट अरबिया’ को दिए एक इंटरव्यू में यह बात कही. उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की सुरक्षा और इस्लाम के दो पवित्र मस्जिदों की रक्षा पाकिस्तान के लिए सबसे ज्यादा अहम है. इस मामले में कोई समझौता नहीं किया जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान, यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की ओर से प्रत्यक्ष सैन्य सहायता के किसी भी अनुरोध पर ‘विचार’ कर सकता है. यानी पाकिस्तान यह ऑप्शन खोल रहा है कि उसकी सेना अब सीधे हूतियों से लड़ेगी.

सऊदी पर हमलों से नाराज है पाकिस्तान

लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी ने कहा कि सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए जिस तरह के सहयोग की जरूरत है, वह दिया जा रहा है और आगे भी दिया जाएगा. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि पाकिस्तान सैन्य मदद देगा, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में सहयोग करेगा या किसी अन्य तरीके से सऊदी अरब का साथ देगा. उन्होंने हूतियों के हमलों पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया को ‘गुस्से’ वाली बताया. उनके मुताबिक, सऊदी अरब और वहां के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के मामले में कोई सवाल या समझौते की गुंजाइश नहीं है.

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच रक्षा समझौता

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने अगस्त में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर हमला होने को बाकी सदस्यों पर भी हमला माना जाएगा. हालांकि, पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने साफ किया कि इस गठबंधन का मकसद किसी देश पर हमला करना नहीं है. उन्होंने कहा कि तीनों सदस्य देश इसे पूरी तरह रक्षात्मक गठबंधन मानते हैं और उनका कोई आक्रामक इरादा नहीं है. जब उनसे पूछा गया कि अगर सऊदी अरब पर हमले जारी रहते हैं, तो क्या पाकिस्तान का समर्थन सिर्फ रक्षा तक सीमित रहेगा, तो उन्होंने इसी रुख को दोहराया. उन्होंने कहा कि तीनों देश इस बात को लेकर स्पष्ट हैं कि उनका उद्देश्य किसी दूसरे देश के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई करना नहीं है.

ईरान से भी बातचीत कर रहा पाकिस्तान

हूतियों को ईरान का समर्थन मिलने के संदर्भ में जब पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता से पूछा गया कि क्या इस्लामाबाद ने तेहरान को कोई चेतावनी दी है, तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सभी पक्षों से बातचीत कर रहा है. इसमें ईरान भी शामिल है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सभी पक्षों से संयम बरतने और क्षेत्र में तनाव कम करने की अपील कर रहा है. उनका कहना था कि क्षेत्रीय संघर्ष को और बढ़ाने से किसी को फायदा नहीं होगा. विवादों का समाधान बातचीत के जरिये निकालने की जरूरत है. इस गठबंधन को ईरान या इजराइल के खिलाफ बनाया गया होने की खबरों पर भी चौधरी ने सफाई दी. उन्होंने कहा कि यह समझौता किसी खास देश को निशाना बनाकर नहीं किया गया है और इसका कोई आक्रामक उद्देश्य नहीं है.

क्या गठबंधन में शामिल होंगे मिस्र और सीरिया?

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता से जब पूछा गया कि क्या मिस्र और सीरिया भी इस गठबंधन में शामिल हो सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई भी फैसला तीनों मौजूदा सदस्य देशों के राजनीतिक, रणनीतिक और सैन्य नेतृत्व पर निर्भर करेगा. उन्होंने इस्लामी देशों के बीच एकजुटता की जरूरत पर जोर दिया. साथ ही कहा कि क्षेत्रीय संघर्षों को बढ़ाने के बजाय बातचीत के जरिये समाधान निकालना ज्यादा जरूरी है.

फिलहाल पाकिस्तान ने सऊदी अरब को हर जरूरी मदद देने की बात कही है, लेकिन इस मदद के स्वरूप और सीमा को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है. पाकिस्तान का कहना है कि उसका गठबंधन रक्षात्मक है और वह क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाने के पक्ष में है.



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