रितु बराला केस: टीकाराम जूली के नेतृत्व में कमिश्नरेट पर डटे कांग्रेसी, प्रशासन की चुप्पी से गहराया आक्रोश

रितु बराला केस: टीकाराम जूली के नेतृत्व में कमिश्नरेट पर डटे कांग्रेसी, प्रशासन की चुप्पी से गहराया आक्रोश


जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में पुलिस कमिश्नरेट के बाहर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन उग्र रूप लेता जा रहा है. रितु बराला मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर शुरू हुआ धरना 12 घंटे बीत जाने के बावजूद लगातार जारी है. धरनास्थल पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद हैं. धरने के लंबा खींचने के बाद भी पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक कोई औपचारिक संवाद या सहमति की पहल नहीं की गई है, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है.

विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब आक्रोशित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस कमिश्नरेट के बाहर मुख्य सड़क को जाम करने का प्रयास किया. नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ता सड़क के बीच में आ गए, जिससे वहां यातायात बाधित होने लगा. पुलिस प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए समझाइश की और कार्यकर्ताओं को सड़क से पीछे हटाया. कमिश्नरेट के बाहर लगातार हो रही उग्र नारेबाजी और प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच टकराव के हालात बने हुए हैं.

जयपुर पुलिस कमिश्नरेट का आधिकारिक पक्ष और प्रेस नोट

एनएसयूआई पदाधिकारी रितु बराला की ओर से एफआईआर दर्ज कराने के मामले में जयपुर पुलिस कमिश्नरेट ने अपना आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी है. जयपुर शहर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि चूंकि इस घटना को लेकर पहले से ही दिल्ली के कनॉट प्लेस पुलिस थाने में मामला दर्ज किया जा चुका है और अनुसंधान जारी है, इसलिए एक ही घटना के उन्हीं तथ्यों पर किसी अन्य राज्य में दोबारा एफआईआर दर्ज करना विधिसम्मत नहीं है. इसी कानूनी तर्क के आधार पर जयपुर पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया है.

जयपुर पुलिस का तर्क और कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

जयपुर पुलिस के अनुसार, रितु बराला ने इलाज में व्यस्त रहने के कारण दिल्ली में तुरंत रिपोर्ट नहीं करा पाने की बात कही थी, जबकि वह पहले ही दिल्ली में परिवाद दे चुकी थीं. जब घटनाक्रम कानूनी रूप से पहले ही कनॉट प्लेस पुलिस थाने के संज्ञान में आ चुका है, तो दूसरे राज्य में आकर उसी घटना पर एफआईआर दर्ज करना नियमों के अनुकूल नहीं है. इसी मांग को लेकर गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने 19 अक्टूबर को मोती डूंगरी थाने में परिवाद दिया था और पुलिस आयुक्तालय पहुंचकर जीरो एफआईआर की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया था, जो लगातार जारी है.

कांग्रेस नेता प्रो. सीबी यादव के कानूनी सवाल और तर्क

दूसरी ओर, कांग्रेस पंचायती राज संगठन के प्रदेशाध्यक्ष प्रो. सीबी यादव ने जयपुर पुलिस के इस रुख पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका तर्क है कि किसी दूसरी जगह एफआईआर दर्ज होने मात्र से नागरिक का स्वतंत्र अपराध की शिकायत दर्ज कराने का कानूनी अधिकार खत्म नहीं हो जाता. उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) का हवाला देते हुए बताया कि यदि पुलिस एफआईआर दर्ज करने से इनकार करे, तो पीड़ित के पास पुलिस अधीक्षक (SP) को लिखित शिकायत देने का अधिकार होता है. एसपी स्तर पर कार्रवाई न होने पर बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन कर पुलिस जांच का आदेश देने का कानूनी विकल्प भी खुला रहता है.

जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पर हंगामा, यूथ कांग्रेस का टेंट पुलिस ने बलपूर्वक हटाया

जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के बाहर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा टेंट लगाने की कोशिश के बाद भारी हंगामा खड़ा हो गया. पुलिस ने ताकत का प्रयोग करते हुए टेंट को मौके से हटा दिया, जिससे कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी धक्का-मुक्की और टकराव की स्थिति बन गई. टेंट हटाए जाने से आक्रोशित यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार व पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. मौके पर तनाव बढ़ता देख अतिरिक्त पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है, जबकि कांग्रेसी एफआईआर की मांग पर अड़े हुए हैं.

भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी
धरनास्थल पर मौजूद सभी कांग्रेस नेता एकजुट होकर पुलिस प्रशासन और प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं. कमिश्नरेट के अंदर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पहले से ही डटे हुए हैं, जबकि बाहर सैकड़ों की तादाद में कार्यकर्ता नारेबाजी कर विरोध दर्ज करा रहे हैं. कांग्रेस नेताओं का स्पष्ट कहना है कि जब तक रितु बराला के मामले में निष्पक्ष रूप से एफआईआर दर्ज नहीं की जाती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन और धरना समाप्त नहीं होगा.

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और अतिरिक्त पुलिस जाब्ता तैनात
प्रदर्शन की गंभीरता और कार्यकर्ताओं के लगातार बढ़ते हुजूम को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर पुलिस कमिश्नरेट के बाहर अतिरिक्त पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर स्थिति पर बारीक नजर बनाए हुए हैं. कमिश्नरेट परिसर और आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है ताकि स्थिति को नियंत्रण से बाहर होने से रोका जा सके.

क्या है पूरा मामला और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई?

यह पूरा घटनाक्रम 13 अक्टूबर को दिल्ली में एक प्रदर्शन के दौरान हुआ था, जहां महिला पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की का मामला सामने आया था. एनएसयूआई नेत्री रितु बराला ने दिल्ली पुलिस की तीन महिला आरक्षियों पर मारपीट के गंभीर आरोप लगाए थे. इस संबंध में रितु बराला ने पहले ही दिल्ली पुलिस के कनॉट प्लेस थाने में परिवाद पेश कर दिया था, जिस पर पुलिस थाना कनॉट प्लेस में प्रकरण संख्या 291/2026 दर्ज किया जा चुका है. दिल्ली पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है और जांच के बाद नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी.



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