मिथिलांचल में 56 भोग से होता है दामाद का स्वागत, भगवान राम से जुड़ी है परंपरा

मिथिलांचल में 56 भोग से होता है दामाद का स्वागत, भगवान राम से जुड़ी है परंपरा


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देश के विभिन्न इलाकों में अलग-अलग मान्यताएं और परंपराएं हैं. बिहार के मिथिला में भी मेहमानों के स्वागत औऱ पूजा-पाठ के लिए 56 भोग के व्यंजन की परंपरा है. यह 56 भोग का चलन कब और कैसे आया इस बारे में लोगों की क्या मान्यता है यह हम आपको बताने जा रहे हैं.

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आर्या झा/मधुबनी: जब व्यंजनों और पकवानों की बात होती है तो 56 भोग या 56 प्रकार के व्यंजनों की बात आ ही जाती है. खाने की बात होती है तो मिथिलांचल के भोजन का जिक्र होता है और खासतौर से यहां के 56 भोग व्यंजन की बात होती है. कहते हैं कि मिथिला में 56 भोज व्यंजन की शुरुआत राम जी के समय से हुई है. यहां पूजा-पाठ से लेकर दामाद की थाली तक में 56 भोग या 56 प्रकार के व्यंजन परोसने की परंपरा रही है. आज भी कई लोग इसे मानते और निभाते हैं. यहां की 56 भोग थाली में पूड़ी-पकवान से लेकर मिठाई ,नमकीन, पूरी, चावल, तरुआ, तिलकोर और खमहाउर का तरुआ के साथ मखाना खीर, चावल वाला खीर, नारियल के लड्डू सहित अन्य क्षेत्रीय, स्पेशल और पारंपरिक व्यंजन होते हैं. यह भोजन दामाद के लिए, स्पेशल गेस्ट के लिए और भगवान की पूजा-पाठ के लिए, कन्या खिलाने आदि के लिए तैयार किया जाता है.

अब बात करते हैं 56 प्रकार के व्यंजन की भगवान राम से जुड़ी कहानी के बारे में. तो इस बारे में कहते हैं कि मिथिलांचल में जब राम जी सीता मैया से विवाह के लिए आए थे तो उस समय राजा दशरथ ने सभी बारातियों और प्रभु राम को खाना खिलाया था. उस भोजन में छप्पन प्रकार के व्यंजन थे और तभी से इसका चलन शुरू हो गया. प्रभु राम मिथिला के दामाद माने जाते हैं और यही वजह है कि यहां लोग अपने दामाद का राम की तरह स्वागत और सत्कार करते हैं. इसी स्वागत का हिस्सा 56 प्रकार का व्यंजन भी है.

एक दूसरी बात यह भी बताई जाती है कि भगवान कृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजन से भोग लगता है जो उनको काफी प्रिय है. तो कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यहां भी वही 56 भोग खिलाया जाता है. इसके अलावा भी मिथिला के लोग दिवाली, कृष्ण जन्माष्टमी, काली पूजा, दुर्गा पूजा, बच्चों के जन्मदिन जैसे शुभ मौके पर 56 भोग बनाकर खुद भी खाते हैं और दूसरों को भी खिलाते हैं.



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