मुंबई: नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात पर विस्तार से बात की. रूबियो ने ईरान के साथ किसी भी तरह की डील की संभावना को फिलहाल बेहद मुश्किल बताया. उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी शिया मौलवियों के नियंत्रण वाली ईरानी सत्ता बातचीत के तौर-तरीके नहीं समझती है. रूबियो ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद तेल और ऊर्जा का फ्लो 80 से 100 परसेंट तक सामान्य बना हुआ है. इसके बावजूद ईरान खुलेआम कमर्शियल जहाजों को निशाना बना रहा है. समंदर में निर्दोष नाविकों की हत्या करने की कोशिश की जा रही है. इन हमलों में कई भारतीय नाविक भी अपनी जान गंवा चुके हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री ने इसे दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इस्तेमाल की गई नाजी रणनीति जैसा करार दिया है.
क्या ईरान के साथ किसी तरह की शांति डील संभव है?
राहुल जोशी ने रूबियो से पूछा था कि क्या इलाके में सैन्य तनाव बढ़ेगा या कोई डील हो सकती है. इसके जवाब में मार्को रूबियो ने कहा, ‘ईरानी शासन के साथ कोई डील करना बहुत मुश्किल काम है.’ उन्होंने बताया कि ईरान का नेतृत्व कट्टरपंथी शिया मौलवियों के हाथ में है. यह नेतृत्व पूरी तरह से धार्मिक कट्टरता से संचालित होता है. रूबियो के मुताबिक यह शासन डील करने का तरीका ही नहीं जानता है.
कमर्शियल जहाजों पर हमले को नाजी रणनीति क्यों कहा?
मार्को रूबियो ने बातचीत के दौरान ईरान की हरकतों पर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने कहा कि ईरान खुलेआम कमर्शियल जहाजों को अपना निशाना बनाने की बात कह रहा है. यह एक ऐसा देश है जो युद्ध से दूर रहने वाले बेकसूर नाविकों को मारने की कोशिश कर रहा है. रूबियो ने कहा, ‘दूसरे विश्व युद्ध के बाद से दुनिया ने ऐसा मंजर कभी नहीं देखा था.’
उन्होंने ईरान की इन हरकतों की तुलना नाजी दौर की यू-बोट रणनीति से की. नाजी पनडुब्बियां भी इसी तरह व्यापारिक जहाजों को डुबोने का काम करती थीं. अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया को एकजुट होकर इस अमानवीय हरकत की निंदा करनी चाहिए. अमेरिका हर रात समंदर में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की रक्षा के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रहा है. ईरान की तरफ से दागे जाने वाले ज्यादातर ड्रोन और मिसाइलों को अमेरिकी सेना हवा में ही नष्ट कर देती है.
समंदर में भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर क्यों बढ़ी चिंता?
अमेरिकी विदेश मंत्री ने माना कि सुरक्षा के तमाम इंतजामों के बावजूद कभी-कभी कोई मिसाइल या ड्रोन बच निकलता है. ऐसा होने पर वह किसी न किसी व्यापारिक जहाज से टकरा जाता है. ज्यादातर मामलों में हमले के बाद भी जहाज अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहते हैं. हालांकि कुछ हमलों में जहाजों के इंजन रूम सीधे तौर पर तबाह हो जाते हैं.
रूबियो ने चिंता जताते हुए कहा कि इन हमलों में लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है. अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं. इसी कारण ईरानी हमलों की चपेट में आकर कई भारतीय नाविकों की भी मौत हुई है. रूबियो ने कहा, ‘यह हमारे लिए बेहद चिंताजनक विषय है और ईरान को तत्काल ऐसे हमले रोकने चाहिए.’
ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना अमेरिका के लिए क्यों जरूरी है?
मार्को रूबियो ने यह भी साफ कर दिया कि अमेरिका ईरान पर असाधारण आर्थिक दबाव बनाना जारी रखेगा. उन्होंने इसके पीछे की ठोस वजह भी विस्तार से बताई. रूबियो ने कहा कि ईरान को मिलने वाला हर एक डॉलर आतंकवाद को बढ़ावा देने में खर्च होता है. वहां की सरकार अपने संसाधनों का इस्तेमाल अपने नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए नहीं करती है.
देश के विकास के बजाय इन पैसों से नई मिसाइलें और घातक ड्रोन तैयार किए जाते हैं. फिर इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल समंदर में व्यापारिक जहाजों को डुबोने के लिए किया जाता है. इसलिए आर्थिक पाबंदियों के जरिए ईरान के वित्तीय स्रोतों पर चोट करना अमेरिका की प्राथमिकता है.