पाकिस्तान के सामने सर्दियों की शुरुआत से पहले ऊर्जा संकट गहराने का खतरा पैदा हो गया है. मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच जारी संघर्ष के साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गैस की सप्लाई प्रभावित होने की वजह से पाकिस्तान को लिक्विफाइड नेचुरल गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है. हालात ऐसे हैं कि देश को सर्दियों में गैस की जरूरत पूरी करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगी कीमतों पर LNG खरीदनी पड़ सकती है. पाकिस्तान एलएनजी लिमिटेड के प्रमुख मसूद नबी ने चेतावनी दी है कि अगर सप्लाई में बाधाएं बनी रहीं, तो आने वाले सर्दियों के महीने देश के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होंगे.
इस संकट का असर सिर्फ पाकिस्तान की बिजली व्यवस्था और घरेलू गैस सप्लाई तक ही सीमित नहीं रह सकता. LNG गैस की कमी की वजह से बिजली प्रोडक्शन के लिए कोयले और तेल जैसे दूसरे ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है. इससे पहले से प्रदूषण की मार झेल रहे लाहौर और पंजाब के दूसरे शहरों में जहरीले स्मॉग का संकट भी गंभीर हो सकता है. यानी पाकिस्तान को एक साथ एनर्जी संकट, बढ़ती लागत और खराब हवा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट से क्यों बढ़ी पाकिस्तान की परेशानी?
पाकिस्तान की LNG आपूर्ति का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. खास तौर पर कतर से होने वाली गैस की सप्लाई देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम रही है. लेकिन मिडिल ईस्ट में संघर्ष की वजह से इस क्षेत्र से LNG की ढुलाई प्रभावित हुई है. होर्मुज स्ट्रेट इसमें खास भूमिका निभा रहा है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले ऊर्जा संसाधनों की अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच के लिए यह मेन समुद्री मार्ग है.
पाकिस्तान LNG लिमिटेड के सीईओ मसूद नबी ने 15 अक्टूबर को रियाद में आयोजित 25वीं वर्ल्ड पेट्रोलियम कांग्रेस के दौरान कहा कि पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी समस्या गैस की उपलब्धता नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षित ढुलाई और आपूर्ति का बाधित होना है. उनके मुताबिक अगर होर्मुज के रास्ते LNG की आवाजाही सामान्य नहीं होती है तो फिर सर्दियों में देश के लिए गैस की मांग पूरी करना मुश्किल हो सकता है.
इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस मौजूद होने के बावजूद पाकिस्तान तक उसकी सप्लाई सुनिश्चित करना आसान नहीं है. समुद्री मार्ग में रुकावट, माल ढुलाई की अनिश्चितता और बढ़ती कीमतें मिलकर पाकिस्तान की ऊर्जा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा रही हैं.
10 LNG कार्गो खरीदने पर खर्च होंगे 1 अरब डॉलर से ज्यादा
पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि उसे सर्दियों में गैस की जरूरत पूरी करने के लिए महंगे ऑप्शन पर निर्भर होना पड़ सकता है. OilPrice की रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्पॉट मार्केट से LNG के 10 अतिरिक्त कार्गो खरीदने पड़ सकते हैं. इनकी कीमत 1 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है.
स्पॉट मार्केट का मतलब ऐसे बाजार से है, जहां गैस की खरीद मौजूदा बाजार कीमत पर की जाती है. यह कीमत लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट के मुकाबले काफी अधिक हो सकती है, खासकर तब जब सर्दियों में यूरोप और एशिया के कई देश एक साथ गैस खरीदने की कोशिश करते हैं.
पाकिस्तान पहले कतर से लंबे समय के समझौतों के तहत LNG खरीदता रहा है. ऐसी आपूर्ति की कीमत आम तौर पर तत्काल बाजार से खरीदी जाने वाली गैस की तुलना में कम होती है. लेकिन कतर की आपूर्ति प्रभावित होने के बाद पाकिस्तान को महंगे कार्गो खरीदने की जरूरत पड़ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक स्पॉट मार्केट से खरीदी जाने वाली गैस की कीमत कतर से मिलने वाली LNG की तुलना में लगभग दोगुनी हो सकती है.
यह खर्च पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती है. देश को गैस की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए विदेशी मुद्रा खर्च करनी होगी, जबकि महंगी LNG से बिजली उत्पादन की लागत भी बढ़ सकती है.
गैस की कमी से बिजली और उद्योगों पर क्या असर पड़ेगा?
पाकिस्तान की बिजली व्यवस्था में LNG की अहम भूमिका है. जब आयातित गैस की आपूर्ति घटती है, तो बिजली उत्पादन के लिए दूसरे ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ाना पड़ सकता है. इससे बिजली बनाने की लागत बढ़ने के साथ बिजली सप्लाई पर भी दबाव पड़ सकता है.
पाकिस्तान के सामने एक और समस्या घरेलू गैस उत्पादन की है. देश के पुराने गैस क्षेत्रों से प्रोडक्शन लंबे समय से दबाव में है. ऐसे में आयातित LNG की कमी को घरेलू उत्पादन बढ़ाकर पूरी तरह दूर करना आसान नहीं होगा. हालांकि पाकिस्तान के अधिकारी घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं.
गैस की कमी का असर इंडस्ट्री तक भी पहुंच सकता है. अगर सरकार के पास पर्याप्त गैस नहीं होती, तो उसे घरेलू कन्ज्यूमर, बिजली संयंत्रों और उद्योगों के बीच सप्लाई का संतुलन बनाना पड़ेगा. ऐसी स्थिति में कुछ उद्योगों को गैस की आपूर्ति सीमित की जा सकती है. इसका असर उत्पादन, कारोबार और रोजगार पर भी पड़ सकता है. खासकर उन क्षेत्रों में जहां गैस का इस्तेमाल सीधे प्रोडक्शन या बिजली बनाने के लिए होता है.
LNG संकट के बीच पाकिस्तान में जहरीले स्मॉग का खतरा क्यों?
पाकिस्तान की परेशानी का दूसरा पहलू एयर पॉलूशन है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक LNG की कमी के कारण बिजली बनाने के लिए कोयले और तेल जैसे दूसरे ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ने की आशंका है. इससे लाहौर, रावलपिंडी, इस्लामाबाद और मुरी जैसे शहरों में प्रदूषण की स्थिति और बिगड़ सकती है.
दरअसल LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस को बिजली उत्पादन में इस्तेमाल किया जाता है. इसकी आपूर्ति घटने पर बिजली संयंत्रों को वैकल्पिक ईंधनों का सहारा लेना पड़ सकता है. कोयला और तेल जलाने से हवा में सूक्ष्म कण और अन्य प्रदूषक निकलते हैं, जो एयर क्वालिटी को खराब कर सकते हैं.
पाकिस्तान में यह समस्या पहले से मौजूद है. पंजाब के कई शहरों में वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक प्रदूषण, ईंट भट्टों का धुआं, सड़कों की धूल और पराली जलाना भी स्मॉग के प्रमुख कारण हैं. सर्दियों में मौसम की कुछ परिस्थितियां प्रदूषकों को जमीन के करीब रोक सकती हैं, जिससे धुंध और जहरीले कण लंबे समय तक हवा में बने रहते हैं. ऐसे में ऊर्जा संकट प्रदूषण की मौजूदा समस्या को और गंभीर बना सकता है.
हालांकि, यह जरूरी नहीं कि LNG की कमी होते ही हर शहर में प्रदूषण एक समान बढ़ जाए. इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि बिजली उत्पादन के लिए किन ईंधनों का इस्तेमाल कितना बढ़ता है और मौसम की परिस्थितियां कैसी रहती हैं.
पाकिस्तान के सामने अब क्या ऑप्शन हैं?
पाकिस्तान के सामने फिलहाल कई चुनौतियां हैं. उसे सर्दियों में गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करनी है, बिजली उत्पादन की लागत को नियंत्रित रखना है और विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव से भी बचना है.
- महंगी LNG खरीदना: अंतरराष्ट्रीय स्पॉट मार्केट से अतिरिक्त कार्गो खरीदने पर गैस की उपलब्धता बढ़ सकती है, लेकिन आयात बिल भी बढ़ेगा.
- कतर से आपूर्ति बहाल कराने की कोशिश: लंबे समय के समझौतों के तहत गैस मिलने पर महंगे स्पॉट कार्गो पर निर्भरता कम हो सकती है. हालांकि, आपूर्ति बहाल होना क्षेत्रीय सुरक्षा और ढुलाई की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.
- घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाना: पाकिस्तान अपने गैस क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार कर सकता है, लेकिन इससे तत्काल पूरी कमी दूर होना निश्चित नहीं है.
- गैस की आपूर्ति का प्रबंधन: कमी की स्थिति में सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए इंडस्ट्री और अन्य क्षेत्रों को मिलने वाली गैस सीमित कर सकती है.
- स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना: सौर ऊर्जा, बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय लंबे समय में ऊर्जा सुरक्षा और एयर क्वालिटी को सुधारने में मदद कर सकते हैं.
डॉन और पाकिस्तान के दूसरे मीडिया संस्थानों की रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार सर्दियों के लिए गैस आपूर्ति प्रबंधन की योजना बनाने में जुटी है. प्रस्तावित व्यवस्था में घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने और जरूरत पड़ने पर कुछ इंडस्ट्रियल सेक्टर की आपूर्ति सीमित करने जैसे उपाय शामिल हैं.
पाकिस्तान के लिए यह संकट इतना बड़ा क्यों है?
पाकिस्तान का मौजूदा संकट बताता है कि ऊर्जा के आयात पर अत्यधिक निर्भरता किसी देश को अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के प्रति कितना संवेदनशील बना सकती है. अगर प्रमुख सप्लायर देशों से गैस की आपूर्ति बाधित हो जाए या समुद्री मार्गों से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो, तो उसका असर बिजली, उद्योग, घरेलू जरूरतों और सरकारी वित्त पर एक साथ पड़ सकता है.
यहां सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ गैस खरीदने की नहीं, बल्कि उसे समय पर और अफॉर्डेबल कीमत पर देश तक पहुंचाने की है. पाकिस्तान को सर्दियों की मांग पूरी करने के लिए महंगे कार्गो खरीदने और विदेशी मुद्रा बचाने के बीच संतुलन बनाना होगा. वहीं, अगर गैस की कमी के कारण कोयले और तेल का इस्तेमाल बढ़ता है, तो ऊर्जा संकट का पर्यावरणीय असर भी सामने आ सकता है.
पाकिस्तान के सामने आने वाली सर्दियां डबल चुनौती लेकर आ सकती हैं. एक तरफ गैस और बिजली की उपलब्धता बनाए रखने का दबाव होगा, दूसरी तरफ महंगे ईंधन और बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटना होगा. होर्मुज जलडमरूमध्य से LNG की आपूर्ति कितनी जल्दी सामान्य होती है, इस पर काफी हद तक निर्भर करेगा कि पाकिस्तान इस संकट से कितनी आसानी से निकल पाता है.