नैनीताल में ट्रैफिक प्लान बना मुसीबत? 30-40% पर सिमटा वीकेंड, कारोबारी बोले- अब बस दशहरे से उम्मीदें

नैनीताल में ट्रैफिक प्लान बना मुसीबत? 30-40% पर सिमटा वीकेंड, कारोबारी बोले- अब बस दशहरे से उम्मीदें


नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल में नवरात्र और लंबे वीकेंड के दौरान पर्यटकों की अच्छी आमद की उम्मीद लगाए पर्यटन कारोबारियों को इस बार निराशा हाथ लगी है. शहर का सुहावना मौसम और त्योहारों की रौनक भी पर्यटकों को बड़ी संख्या में आकर्षित नहीं कर सकी. कारोबारियों के मुताबिक, ट्रैफिक प्लान, रूट डायवर्जन और जाम की आशंका के चलते पर्यटक नैनीताल आने से कतरा रहे हैं. इसका असर पर्यटन कारोबार पर साफ दिखाई दे रहा है. हालात ऐसे हैं कि वीकेंड पर पर्यटन कारोबार सामान्य के मुकाबले महज 30 से 40 प्रतिशत तक सिमट गया है. अब कारोबारियों को दशहरे के दौरान पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है.

कारोबारियों का कहना है कि नैनीताल और कैंची धाम के लिए एक साथ यातायात व्यवस्था लागू करने से पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है. उनका तर्क है कि कैंची धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए, जबकि नैनीताल आने वाले पर्यटकों के लिए शहर की पार्किंग और यातायात की वास्तविक स्थिति के आधार पर योजना बनाई जानी चाहिए.

ट्रैफिक प्लान के डर से टाल रहे यात्रा

नैनीताल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट के मुताबिक, लंबे वीकेंड के चलते पर्यटन कारोबारियों को बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन अनुमान के विपरीत पर्यटकों की आमद काफी कम रही. उन्होंने बताया कि फिलहाल नैनीताल में अपेक्षित संख्या के मुकाबले करीब 30 से 40 प्रतिशत पर्यटक ही पहुंचे हैं, जिससे होटल कारोबार समेत पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसाय प्रभावित हुए हैं. दिग्विजय सिंह बिष्ट ने कहा कि पहले दिल्ली-एनसीआर में चल रहे आंदोलनों के कारण पर्यटन पर असर पड़ा और अब ट्रैफिक प्लान को लेकर बनी स्थिति कारोबारियों की चिंता बढ़ा रही है. उनके मुताबिक, पुलिस की ओर से नैनीताल और कैंची धाम को जोड़कर यातायात व्यवस्था लागू करने तथा पर्यटकों को शटल के माध्यम से भेजने की बात कही जाती है.

इससे पर्यटकों के मन में यह आशंका पैदा होती है कि नैनीताल पहुंचने के लिए भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि नैनीताल में जब पर्यटकों की संख्या अधिक होती है, तब यातायात नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था लागू करना समझ में आता है. लेकिन पर्यटकों की कम आमद के बीच अंतिम समय में ट्रैफिक प्लान में बदलाव होने से लोगों को असमंजस का सामना करना पड़ता है. इससे कई पर्यटक अपनी यात्रा टालने या दूसरे पर्यटन स्थलों का रुख करने का फैसला कर सकते हैं.

कैंची धाम के लिए अलग ट्रैफिक प्लान की मांग

होटल एसोसिएशन अध्यक्ष का कहना है कि नैनीताल और कैंची धाम की परिस्थितियां अलग-अलग हैं, इसलिए दोनों के लिए अलग यातायात योजना तैयार की जानी चाहिए. कैंची धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए शटल सेवा और यातायात नियंत्रण की व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन नैनीताल आने वाले पर्यटकों के लिए शहर की पार्किंग की उपलब्धता और मौजूदा भीड़ का आकलन करना जरूरी है. उनका कहना है कि यदि बिना परिस्थितियों का आकलन किए एक जैसी व्यवस्था लागू की जाती है, तो इसका नुकसान पर्यटन कारोबार को उठाना पड़ता है. होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी, नाव चालक और अन्य छोटे व्यवसाय पर्यटकों की आमद पर निर्भर हैं. ऐसे में पर्यटकों की संख्या में गिरावट का असर सीधे उनकी आय पर पड़ता है. पर्यटन से जुड़े कारोबारियों ने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि यातायात व्यवस्था को लेकर पर्यटकों को स्पष्ट जानकारी दी जाए. साथ ही, जरूरत के अनुसार ट्रैफिक प्लान में बदलाव किया जाए, ताकि पर्यटकों को आखिरी समय में परेशानी का सामना न करना पड़े.

सुहावने मौसम के बावजूद कम पहुंचे पर्यटक

नैनीताल में इन दिनों मौसम पर्यटकों के अनुकूल बना हुआ है. ऐसे में स्थानीय कारोबारियों को उम्मीद थी कि छुट्टियों के दौरान शहर में अच्छी चहल-पहल देखने को मिलेगी. हालांकि, पर्यटकों की कम आमद ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. स्थानीय नाव चालक वीरेंद्र पवार ने बताया कि नैनीताल का मौसम इन दिनों काफी अच्छा है और उन्हें उम्मीद थी कि वीकेंड पर बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचेंगे. लेकिन उनके मुताबिक, इस दौरान करीब पांच से छह हजार पर्यटकों के ही नैनीताल पहुंचने का अनुमान है, जो अपेक्षाकृत कम है. उन्होंने कहा कि हल्द्वानी से नैनीताल पहुंचने के दौरान रूट डायवर्जन और ट्रैफिक प्लान के कारण पर्यटकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जाम में फंसने और शहर तक पहुंचने में अधिक समय लगने की आशंका के चलते कई पर्यटक नैनीताल आने से पहले ही अपनी यात्रा को लेकर असमंजस में पड़ जाते हैं. नवरात्र और लंबे वीकेंड के दौरान अपेक्षित पर्यटक नहीं पहुंचने से पर्यटन कारोबारियों को आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है. अब उनकी निगाहें दशहरे की छुट्टियों पर टिकी हैं, कारोबारियों को उम्मीद है कि दशहरे के मौके पर पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है.



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