नल का पानी भी सेफ नहीं… नॉर्वे के बर्फ से घिरे कस्बे में ऐसा क्या हुआ? कभी था साफ हवा-पानी के लिए मशहूर

नल का पानी भी सेफ नहीं… नॉर्वे के बर्फ से घिरे कस्बे में ऐसा क्या हुआ? कभी था साफ हवा-पानी के लिए मशहूर


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नॉर्वे के स्वालबार्ड द्वीप के लोंगयेरब्येन कस्बे में अब नल का पानी पीने लायक नहीं रह गया. हैरानी की बात ये है कि इस कस्बे को कभी सबसे साफ हवा और साफ पानी वाला माना जाता था. वैज्ञानिकों के मुताबिक यहां दुनिया के तापमान में औसत बढ़ोतरी से पांच गुना ज्यादा तेज तापमान में बढ़ोतरी हो रही है.

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नॉर्वे के स्वालबार्ड द्वीप समूह का शहर लॉन्येरब्येन (फोटो-pexels)

नॉर्वे के एक कस्बे में लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है कि उन्हें नल का पानी नहीं पीना चाहिए. वैज्ञानिकों के मुताबिक यहां पर्माफ्रॉस्ट पिघलने की वजह से नलों का पानी गंदा हो रहा है जो गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. यहां नल से सप्लाई होने वाली पानी में मैंगनीज, सल्फेद और निकल जैसे तत्वों की मात्रा ज्यादा मिली है.

मामला है नॉवे के स्वालबार्ड के लोंगयेरब्येन का. यहां पानी की सप्लाई इस्दामेन झील से होती है. इस्दामेन का अर्थ बर्फ का तालाब होता है. ये आर्कटिक के बर्फीले संसार में बसे उन शहरों में शामिल हैं जहां के हवा-पानी को सबसे शुद्ध माना जाता था. अब ग्लोबल वार्मिंग की वजह से यह इलाका तेजी से गर्म हो रहा है. यहां रहने वाले लोगों को तब सावधान किया गया था जब हाल ही में नार्वेजियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ ने जांच में पानी को खराब माना था. लॉन्गयेरब्येन के मेयर टेर्जे औनेविक ने कहा था कि पीने के पानी की गुणवत्ता अच्छी नहीं है, इसीलिए नल के पानी का उपयोग नहीं करना है.

स्वालबार्ड आखिर कहां है?

नॉर्वे का स्वालबार्ड असल में उत्तरी अटलांटिक महासागर और आर्कटिक महासागर के बीच स्थित एक द्वीप समूह है. उत्तरी ध्रुव से इसकी दूरी तकरीबन 1 हजार किमी है. यह इलाका बड़े-बड़े ग्लेशियर से ढंका है. इसका सबसे बड़ा कस्बा लॉगइयरब्येन है. आबादी के लिहाज से यह बहुत छोटा इलाका है, जहां महज 2600 लोग रहते हैं. कम आबादी और इंडस्ट्रियल शहरों से दूरी की वजह से यहां के वातावरण को साफ सुथरा माना जाता है.

अचानक कैसे चर्चा में आया ये द्वीप समूह

द गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक लोंगयेरब्येन में हाल ही में एक एडवाइजरी जारी कर नल के पीने पानी को अशुद्ध बताया गया है. इसकी मुख्य वजह पानी में खनिजों और धातुओं की कमी को बताया गया है. प्रशासन की ओर से पीने के लिए फिलहाल साफ पानी ट्रीट करके उपलब्ध कराया जा रहा है. प्रशासन के मुताबिक यहां पानी में मैंगनीज, सल्फेट और निकल का स्तर सामान्य मात्रा से कहीं अधिक पाया गया है.

कैसे अशुद्ध हो रहा पानी

वैज्ञानिक इस बात को लेकर खुद हैरान हैं कि आखिर यहां पानी की अशुद्धता की वजह से क्या है? फिलहाल वैज्ञानिकों ने जो कारण बताया है वह पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना है. यह ऐसी जमीन होती है जो कम से कम दो वर्षों तक जमी रहती है. असल में इसे मिट्टी का गोंद कहते हैं. हालांकि इसके जमे होने के लिए तापमान कम होना जरूरी है. अगर तापमान सामान्य से ज्यादा होती है तो यह पिघ्ज्ञलने लगती है और जमीन के नीचे छिपे खनिजों का पानी और हवा से संपर्क बढ़ जाता है. चट्टानें पानी में गिरती हैं और इनसे निकलने वाले खनिज पानी में घुल जाते हैं. साइंस में इसे एसिड रॉक ड्रेनेज कहा जाता है.

तेजी से गर्म हो रहा लोंगयेरब्येन

वैज्ञानिकों के मुताबिक लोंगयेरब्येन तेजी से गर्म हो रहा है. विश्व की औसत दर के हिसाब से देखें तो इसके गर्म होने की गति पांच से सात गुना ज्यादा तेज है. स्वालबार्ड विश्वविद्यालय केंद्र में आर्कटिक भूविज्ञान की एसोसिएट प्रोफेसर और पर्माफ्रॉस्ट विशेषज्ञ मार्जोलेन वेरेट के हवाले से गार्जियन ने लिखा है कि पर्माफ्रॉस्ट में पाइराइट नामक एक खनिज होता है जिसे मूर्खों का सोना कहा जाता है. यह भी पानी को दूषित करने में मुख्य भूमिका निभा रहा है.

क्या है प्रदूषण बढ़ने की वजह

वैज्ञानिकों के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग की वजह से तापमान का बढ़ना इसका प्राथिमक कारण है. मगर सिर्फ यही वजह नहीं है. असल में यहां बढ़ रही मानवीय गतिवधियां भी इसकी वजह है. मार्च 2026 में नॉर्वेजियन पोलर इंस्टीट्यूट ने एडवेंचर्फियोर्ड में मानव गतिविधियों से पैदा हुए कणों के फैलाव पर एक रिसर्च हुई थी. इसमें बतायागया कि लॉगइयरब्येन का सीवेज पाइपलाइन के जरिए सीधे समुद्र में छोड़ा जा रहा है.



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