युद्ध पर पुतिन की गुगली, पहले टैरिफ से बचाया, अब ‘दोस्तों’ से कराएंगे पंचायत
Last Updated:
Russia-Ukraine War: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन युद्ध को लेकर अलग ही प्लान बना रहे हैं. वो सिर्फ जमीन पर नहीं बल्कि कूटनीतिक लिहाज से भी इसमें आगे निकलने की कोशिश में हैं. यही वजह है कि उन्होंने अब धीरे-धीरे युद्ध की पंचायत में अपने दोस्तों को शामिल कराना शामिल कर दिया है.
पुतिन ने फेंकी ऐसी गुगली, जेलेंस्की कनफ्यूज.
Russia-Ukraine War: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को लेकर अपनी एक और गुगली फेंकी है, जो अगर सही पड़ी तो इस युद्ध में यूक्रेन के लिए कुछ खास नहीं बचेगा. दरअसल पुतिन ने ट्रंप और शी जिनपिंग के साथ बैठक की पेशकश की है और दिलचस्प ये है कि जेलेंस्की का नाम तक नहीं लिया. भारत पहले ही मध्यस्थता में शामिल होने के लिए हामी भर चुका है.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन युद्ध को केवल सैन्य ताकत के दम पर नहीं, बल्कि कूटनीतिक चालों के जरिए भी अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित त्रिपक्षीय बैठक इसी रणनीति का संकेत है. खास बात यह है कि इस संभावित बातचीत में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को शामिल करने का प्रस्ताव नहीं है. जिस देश की जमीन पर युद्ध लड़ा जा रहा है, उसके भविष्य पर फैसला करने वाली मेज से उसी को दूर रखने की कोशिश हो सकती है.
ट्रंप से नजदीकी, रूस को राहत
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक पुतिन ने 9 अक्टूबर को ट्रंप से फोन पर बातचीत के दौरान अगले महीने बैठक का सुझाव दिया. क्रेमलिन ने संभावित मुलाकात पर चर्चा की पुष्टि की है, लेकिन एजेंडे पर अंतिम सहमति नहीं बनी है. ट्रंप ने भी अभी औपचारिक मंजूरी नहीं दी है. प्रस्तावित बैठक 18-19 नवंबर को चीन के शेनझेन में होने वाले एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है. इसी बातचीत के दौरान रूसी डीजल की अमेरिकी खरीद और उसकी बिक्री को सरल बनाने से जुड़े समझौते की खबर भी सामने आई.
युद्ध के मैदान से बातचीत की मेज तक
पुतिन की रणनीति का बड़ा हिस्सा यह है कि युद्ध समाप्त करने की शर्तें तय करने में रूस को निर्णायक भूमिका मिले. ट्रंप के युद्ध जल्द खत्म करने के आग्रह और चीन के साथ रूस के मजबूत रिश्तों का लाभ उठाकर मॉस्को अपने लिए अनुकूल समझौते की जमीन तलाश सकता है. इसमें कब्जे वाले क्षेत्रों का भविष्य, यूक्रेन की सुरक्षा व्यवस्था और पश्चिमी सैन्य गठबंधनों से उसका संबंध जैसे मुद्दे अहम हो सकते हैं. हालांकि जेलेंस्की को बाहर रखकर किया गया कोई समझौता यूक्रेन की सहमति और संप्रभुता पर गंभीर सवाल खड़े करेगा. इससे यूरोपीय देशों की भूमिका भी कमजोर पड़ सकती है, जबकि वे यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक सहायता देते रहे हैं.
भारत का प्रस्ताव, शांति की दूसरी राह
इसी बीच भारत की कूटनीतिक पहल महत्वपूर्ण हो गई है. यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने हाल में भारत के प्रस्ताव को व्यापक बताया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर के मुताबिक भारत रूस और यूक्रेन, दोनों के संपर्क में है. उसकी कोशिश काला सागर में जहाजों की सुरक्षा, अनाज और ऊर्जा आपूर्ति जारी रखने और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने जैसी व्यावहारिक व्यवस्थाओं पर आगे बढ़ने की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी कह चुके हैं कि युद्ध का समाधान संवाद और कूटनीति से ही निकल सकता है. भारत की पहल तत्काल व्यापक शांति समझौते के बजाय भरोसा बहाल करने और सीमित युद्धविराम की दिशा में रास्ता खोल सकती है.
रूस की जीत या शांति का अवसर?
पुतिन के सामने चुनौती यह है कि वे युद्ध को अपने अनुकूल समाप्त करना चाहते हैं लेकिन स्थायी शांति के लिए यूक्रेन की सहमति जरूरी होगी. ट्रंप और शी के साथ संभावित बैठक रूस को बड़ा कूटनीतिक मंच दे सकती है मगर इससे शांति अपने आप सुनिश्चित नहीं होगी. भारत के लिए अवसर यह है कि वह किसी एक शक्ति के पक्ष में खड़े होने के बजाय सभी पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने में मदद करे. अंत में युद्ध में रूस की कूटनीतिक बढ़त तभी टिकाऊ होगी, जब समझौता केवल महाशक्तियों की सहमति नहीं बल्कि यूक्रेन की सुरक्षा और संप्रभुता को भी स्वीकार करे.