Dharm Astha : डॉक्टरों ने खड़े कर दिए हाथ? नवमी पर गोंडा के इस मंदिर में करें हवन, भर जाएगी सूनी गोद

Dharm Astha : डॉक्टरों ने खड़े कर दिए हाथ? नवमी पर गोंडा के इस मंदिर में करें हवन, भर जाएगी सूनी गोद


होमताजा खबरधर्म

डॉक्टरों ने खड़े कर दिए हाथ? नवमी पर इस मंदिर में करें हवन, भर जाएगी सूनी गोद

Last Updated:

Durga Mandir Gonda : गोंडा के शक्ति नगर चौराहा का दुर्गा मंदिर अनूठा है. यहां नवरात्रि की नवमी को ऐसा हवन किया जाता है, जिससे नि:संतान दंपतियों की मुराद पूरी हो जाती है. इस मंदिर की स्थापना 1992 में हुई थी. लोकल 18 से मंदिर के महंत सच्चिदानंद पांडेय बताते हैं कि मान्यता के अनुसार, जो दंपति नवमी के दिन मंदिर में साथ बैठकर हवन करते हैं, उनकी सूनी गोद भर जाती है. मंदिर की स्थापना से यह परंपरा चली आ रही है. इसी विश्वास के साथ हर साल नवरात्रि में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. दंपति माता दुर्गा के दर्शन करते हैं और सुखी परिवार की प्रार्थना करते हैं.

गोंडा. हर मंदिर अपने आपमें खास है. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड इटियाथोक के शक्ति नगर चौराहा पर माता दुर्गा का एक ऐसा ही मंदिर है. यहां नवरात्रि की नवमी के दिन विशेष हवन किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन पति-पत्नी साथ बैठकर हवन कुंड में आहुति देते हैं, तो उन्हें संतान की प्राप्ति होती है. इसी मान्यता के चलते संतान की कामना करने वाले कई दंपति यहां पहुंचकर माता की पूजा-अर्चना करते हैं. यह मंदिर शक्ति नगर चौराहे पर है, जिसकी स्थापना वर्ष 1992 में हुई थी. लोकल 18 से मंदिर के महंत सच्चिदानंद पांडेय बताते हैं कि मंदिर की स्थापना के समय माता की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी. इसी दौरान अचानक बड़ी संख्या में मधुमक्खियां आ गईं और माता की प्रतिमा को ढक लिया. वहां मौजूद पंडित ने लोगों को भरोसा दिलाया कि मधुमक्खियां किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएंगी. कुछ समय बाद मधुमक्खियां नीचे गिर गईं. इसके बाद वहां एक काला कुत्ता भी आया, जो कुछ देर बाद गायब हो गया. इस घटना को श्रद्धालु आज भी माता की विशेष कृपा से जोड़कर देखते हैं.

जबड़े से किया साफ

श्रद्धालु रिया उपाध्याय बताती हैं कि उन्होंने अपने पूर्वजों से मंदिर की स्थापना के समय हुई इस घटना के बारे में सुना है. उनके अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा के दौरान मधुमक्खियों ने माता की प्रतिमा को ढक लिया था. इसके बाद मधुमक्खियां नीचे गिर गईं और वहां एक काला कुत्ता आया. बताया जाता है कि कुत्ते ने अपने जबड़े से मधुमक्खियों को साफ किया और फिर वह भी गायब हो गया. उस समय यह घटना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई थी.

महंत सच्चिदानंद पांडेय बताते हैं कि यहां नवरात्रि की नवमी के दिन हवन करने की विशेष मान्यता है. मान्यता के अनुसार, जो दंपति इस दिन मंदिर में आकर साथ बैठकर हवन करते हैं और हवन कुंड में आहुति देते हैं, उनकी संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है. महंत के अनुसार, मंदिर की स्थापना वर्ष 1992 में हुई थी और तभी से यह परंपरा चली आ रही है. इसी विश्वास के साथ हर साल नवरात्रि में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.

किसने किया संतान प्राप्ति का दावा

श्रद्धालु दिनेश वर्मा बताते हैं कि उन्होंने भी नवरात्रि की नवमी के दिन मंदिर में हवन किया था. उनका कहना है कि इसके बाद उन्हें संतान की प्राप्ति हुई. इसी तरह की मान्यताओं के कारण मंदिर में नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था देखने को मिलती है. संतान की कामना करने वाले दंपति माता दुर्गा के दर्शन करते हैं और सुखी परिवार की प्रार्थना करते हैं. संतान प्राप्ति से जुड़ी बातें मंदिर की धार्मिक मान्यताओं और श्रद्धालुओं के अनुभवों पर आधारित हैं.



Source link