देशभर में घूम कर सीखे खेती के तौर तरीके, अब जर्मनी-कनाडा के लोग आ सीखने, आधुनिक तकनीक से शानदार उत्पादन

देशभर में घूम कर सीखे खेती के तौर तरीके, अब जर्मनी-कनाडा के लोग आ सीखने, आधुनिक तकनीक से शानदार उत्पादन


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देशभर में घूम कर सीखे खेती के तौर तरीके, अब जर्मनी-कनाडा के लोग आ सीखने

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Modern Organic Farming: सागर के उमेश पटेल बीना रिफाइनरी में टेक्नीशियन के रूप में काम करते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी पैतृक जमीन पर आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती को मुनाफे का जरिया बना दिया. करीब 8 साल पहले शुरू हुई उनकी खेती अब लाखों रुपये का मुनाफा दे रही है. उमेश ने नेट हाउस, पॉलीहाउस, ड्रिप और मल्चिंग जैसी तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाया और लागत घटाई.

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सागर. कहते हैं जहां चाह वहां राह, और कभी-कभी यह राह है जीवन को ऐसी दशा में ले जाती है जो न सिर्फ खुद के लिए बल्कि दूसरों के लिए भी मिसाल बन जाती है. ऐसा ही कुछ सागर के उमेश पटेल के साथ भी हुआ जो बीना रिफाइनरी में टेक्नीशियन के रूप में काम करते हैं लेकिन उन्होंने अपनी पैतृक जमीन में कुछ इनोवेशन कर पार्ट टाइम के रूप में उसको शुरू किया और उनके प्रयास की वजह से जिस जमीन में कभी खाने के लाले होते थे अब वहीं खेत लाखों का मुनाफा दिला रही है. इतना ही नहीं किसान के द्वारा अपनी खेती में खेती में अपनाई गई आधुनिक तकनीक और उनसे आए परिवर्तन को देखने के लिए दूर-दूर से किसान पहुंचते हैं वहीं उनके काम का अंदाजा आप ऐसे भी लगा सकते हैं कि यहां पर कनाडा, जर्मनी, ऑस्ट्रिया जैसे देशों के विजिटर भी पहुंचकर उनकी फार्मिंग को देख चुके हैं.

उमेश पटेल बताते हैं कि उन्होंने 8 साल पहले खेती करना शुरू किया था. खेती शुरू करने से पहले उन्होंने कृषि विभाग की ओर से किसान मित्रों के लिए आयोजित विजिट और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. इन कार्यक्रमों के दौरान उन्हें बताया गया कि खेती की लागत कैसे कम की जा सकती है और कम खर्च में बेहतर उत्पादन कैसे प्राप्त किया जा सकता है.

कैसे बढ़ा उत्पादन और मुनाफा
इसके लिए भोपाल, इंदौर, खंडवा, खरगोन जैसी शहरों के अलावा राज्य के बाहर तमिलनाडु जैसे क्षेत्रों में भी गया. वहां से लौटने के बाद जो प्रयोग हम अपने खेत पर कर सकते थे वह प्रयोग किए जैसे की नेट हाउस, पाली हाउस, पानी बचाने के लिए ड्रिप मल्चिंग सिस्टम का उपयोग किया. डेयरी खोली तो दूध भी बेचता और पशुओं से जो गोबर होता था तो इसके लिए बायोगैस प्लांट लगाया. जिससे वर्मी कंपोस्ट भी बनाते और खाद की आपूर्ति स्वयं होने लगे. जैविक खेती को अपनाया तो उसमें जो टॉनिक कीटनाशक है वह भी खुद ही तैयार करने लगे. इस तरह से इंटीग्रेटेड फार्मिंग को अपनाने से खेती की लागत घटती गई मुनाफा बढ़ता गया.

किसान बने सके समृद्धशाली
जब दूसरे किसानों को इन तकनीक के बारे में पता चला तो धीरे-धीरे किसान भाई आने लगे. हम भी उनको सलाह देते हैं ताकि किसान समृद्धशाली बन सके. हमारे यहां अब तक कई किसान आ चुके हैं और इसी क्रम में पिछले दिनों कनाडा जर्मनी के लोग भी आए थे जो तीन दिन तक फार्म हाउस पर रुके और उन्होंने बेहद ही बारीकी से एक-एक चीज को सिखा और समझा.

उमेश पटेल बताते हैं कि वह दिन भर अपनी ड्यूटी करते हैं और जब भी सुबह-शाम समय मिलता है तो उसमें खेती करते हैं. जो हमसे हो पता है वह कर देते हैं. इसके अलावा परिवार के जो लोग हैं या कुछ मजदूर लगाए हुए हैं उनको दिशा निर्देश दिए जाते हैं. वह उस आधार पर काम करते रहते हैं. अब हम 7 एकड़ से लगभग 12 लाख तक की कमाई खर्च काट के साल भर में कर लेते हैं.



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