खबर देखकर आया मुर्गी पालन का आइडिया, ₹2 हजार से शुरू किया कारोबार, अब एक स्लॉट में ₹40000 की बिक्री करते हैं प्रमोद

खबर देखकर आया मुर्गी पालन का आइडिया, ₹2 हजार से शुरू किया कारोबार, अब एक स्लॉट में ₹40000 की बिक्री करते हैं प्रमोद


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खबर देखकर आया आइडिया, ₹2 हजार से शुरू किया कारोबार, अब एक बार ₹40000 की बिक्री

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Rohtas Farmer Making Big Profits From Chicken Farming: रोहतास के बिक्रमगंज निवासी प्रमोद पटेल ने मात्र दो हजार रुपये से मुर्गी पालन की शुरुआत की. वे कड़कनाथ और सोनाली नस्ल की मुर्गियां पालकर अच्छी कमाई कर रहे हैं. शुरुआत में उनके पास केवल तीन मुर्गियां और 1 मुर्गा था पर धीरे-धीरे उन्होंने अपना काम काफी बढ़ा लिया है.

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रोहतास. खेती-किसानी के साथ अगर कोई छोटा व्यवसाय जुड़ जाए तो आमदनी बढ़ाने का एक और रास्ता खुल जाता है. इसके लिए हमेशा बड़ी पूंजी की जरूरत भी नहीं होती. सही जानकारी, मेहनत और बाजार की मांग को समझकर कम पैसों से भी शुरुआत की जा सकती है. रोहतास जिले के बिक्रमगंज निवासी प्रमोद पटेल इसकी मिसाल हैं, जिन्होंने महज 2 हजार रुपये से मुर्गी पालन शुरू किया और अब करीब 40 मुर्गे-मुर्गियों का पालन कर रहे हैं और अच्छी कमाई भी.

प्रमोद पटेल बताते हैं कि उन्हें मुर्गी पालन का आइडिया समाचार देखते समय आया था. इसके बाद उन्होंने तीन मुर्गियों और एक मुर्गे के साथ इस काम की शुरुआत की. धीरे-धीरे उनका अनुभव बढ़ा और आज उनके पास 20 कड़कनाथ तथा बाकी 20 में सोनाली समेत अन्य नस्लों के मुर्गे-मुर्गियां हैं.

एक स्लॉट में करीब 40 हजार रुपये की बिक्री
प्रमोद के मुताबिक, कड़कनाथ मुर्गे का औसत वजन करीब 1.2 किलो होता है और इसकी बिक्री लगभग 1,000 रुपये प्रति किलो के भाव से होती है. इस हिसाब से 20 कड़कनाथ मुर्गों की बिक्री से करीब 24 हजार रुपये मिलते हैं. वहीं, सोनाली समेत अन्य नस्लों के 20 मुर्गों का औसत वजन करीब 1.5 किलो और बिक्री भाव 500 रुपये प्रति किलो है. इनकी बिक्री से लगभग 15 हजार रुपये मिलते हैं. इस तरह एक स्लॉट में 40 मुर्गे बेचने पर करीब 40 हजार रुपये की रकम मिलती है.

अंडे और मुर्गे, कमाई के दो रास्ते
प्रमोद बताते हैं कि वे मुर्गों की बिक्री के साथ अंडे भी बेचते हैं. इससे उन्हें कमाई के दो रास्ते मिलते हैं. अंडों की बिक्री से आमदनी होती रहती है, जबकि मुर्गे तैयार होने पर उनकी बिक्री से एकमुश्त रकम मिलती है. कड़कनाथ और सोनाली जैसी अलग-अलग नस्लों को पालने से उन्हें बाजार की मांग के अनुसार बिक्री करने का विकल्प भी मिलता है.

खेती के साथ संभालते हैं मुर्गी पालन
प्रमोद पटेल खेती-किसानी भी करते हैं. खेती के काम से समय निकालकर वे मुर्गियों की देखभाल करते हैं. उनका कहना है कि मुर्गी पालन में समय पर दाना-पानी देना, साफ-सफाई रखना और बीमारी से बचाव करना बेहद जरूरी है. अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए तो मुर्गियों को स्वस्थ रखने और कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है.

शुरुआत करने वालों को क्या सलाह देते हैं प्रमोद?
प्रमोद के मुताबिक, मुर्गी पालन शुरू करने से पहले बाजार में अलग-अलग नस्लों की मांग और उनके बिक्री भाव की जानकारी लेनी चाहिए. शुरुआत में कम संख्या में मुर्गियों को पालकर अनुभव हासिल करना बेहतर रहता है. साथ ही साफ और हवादार जगह, संतुलित आहार, स्वच्छ पानी तथा समय पर टीकाकरण का ध्यान रखना चाहिए. खर्च और बिक्री का हिसाब रखने से कारोबार की स्थिति समझने में भी मदद मिलती है.



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