Singrauli Earthquake: मध्य प्रदेश में भूकंप से कांपी धरती, अचानक थरथराए लोग; सिंगरौली में लगे झटके


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Singrauli Earthquake: मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में दोपहर भूकंप के झटके महसूस किए गए. इसकी तीव्रता ज्यादा नहीं थी. इसी वजह से किसी को भी नुकसान नहीं हुआ. शुरुआती तौर भूकंप का केंद्र जमीन में 10 किलोमीटर नीचे बताया गया है. अभी एजेंसिया आंकड़ों की जांच कर रही हैं. बताया जा रहा है कि शाम तक इससे घबराते रहे कि कहीं दोबारा भूकंप ना आ जाए.

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मध्य प्रदेश में भूकंप से कांपी धरती, अचानक थरथराए लोग; सिंगरौली में लगे झटकेZoom

सिंगरौली में भूकंप के झटके

मध्य प्रदेश में दिन में तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए. मध्य प्रदेश में इसका मुख्य केंद्र सिंगरौली रहा. सिंगरौली जिले में शनिवार दोपहर 2:12 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए. शुरुआती आंकड़ों के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.5 मापी गई. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अधिकारियों ने बताया कि भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर नीचे मौजूद था. जैसे ही भूकंप के झटके महसूस किए गए, तो लोग अपने घरों से बाहर निकल आए. इसके बाद शाम तक लोग भूकंप के झटकों से परेशान रहे कि कहीं दोबारा से भूकंप ना आ जाए.

जमीन से 10 किलोमीटर नीचे मौजूद था केंद्र
भले ही सिंगरौली में भूकंप की तीव्रता काफी कम थी, लेकिन अचानक आए इस झटके से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों में चिंता जरूर फैल गई. अभी तक इमारतों को नुकसान या किसी के घायल होने की कोई तत्काल सूचना नहीं मिली है. एजेंसिया यह शुरुआती आंकड़ों की जांच कर रही हैं. 3.5 तीव्रता के भूकंप को आमतौर पर हल्का भूकंप माना जाता है, जिसे आसपास के लोग महसूस कर लेते हैं, लेकिन इससे इमारतों को गंभीर नुकसान कम ही होता है, खासकर जब इसका केंद्र लगभग 10 किलोमीटर की मध्यम गहराई पर हो.

कम तीव्रता के भूकंप नहीं पैदा करते ज्यादा खतरा
सिंगरौली के अधिकारियों ने जनता को शांत रहने कही है. इसके अलावा आगे किसी भी भूकंपीय घटना की आशंका में सुरक्षा के आदेशों की पालन की बात कही है. प्रशासन अभी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है. यह पहली बार नहीं है, जब मध्य प्रदेश में भूकंप की गतिविधि देखी गई हो. कम तीव्रता के भूकंप ज्यादा खतरा नहीं पैदा करते हैं.

क्या होता है रिक्टर स्केल?
रिक्टर स्केल (Richter Scale) भूकंप की तीव्रता (Magnitude) को मापने का एक पैमाना है. आज के समय में मोमेंट मैग्नीट्यूड स्केल और दूसरे आधुनिक तरीकों का भी इस्तेमाल हो जाता है. इससे जल्दी पता चल जाता है कि भूकंप की तीव्रता कितनी थी.

(IANS इनपुट के साथ)



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