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Pakistan-Iran Border Seal: पाकिस्तान की एंट्री जब ईरान-अमेरिका युद्ध में मध्यस्थ के तौर पर हुई थी, तो वो बात कर रहा था ईरान के हितों की. हालांकि अब पाकिस्तान के शब्द और उसकी हरकतें मेल नहीं खा रहे हैं. उसने ईरान के साथ अपनी व्यापारिक सीमा बंद कर रखी है और उसकी जलसीमा के आसपास अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर मंडरा रहे हैं. आखिर होने क्या वाला है.
पाकिस्तान ने फिर दिखाया रंग, ईरान को दिया धोखा.
Pakistan-Iran Border Seal: ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध में दलाली कर रहा पाकिस्तान अब क्या खेल खेल रहा है, ये समझना थोड़ा पेंचीदा हो गया है. दरअसल मध्यस्थ बना पाकिस्तान अब उसी देश की सीमा पर पहरा बिठा दिया है, जिसके हित में बात करने की कसमें खा रहा था. पाकिस्तान और ईरान के बीच सीमा पर आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां अस्थायी रूप से रोक दी गई हैं और ये सभी का ध्यान खींच रही हैं. इतना ही नहीं इसके साथ ही अरब सागर में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी भी शक पैदा कर रही है कि आखिर यहां चल क्या रहा है?
जब ईरान और अमेरिका युद्ध में हैं और पश्चिम एशिया में हूतियों और सऊदी अरब के बीच भी संघर्ष चल रहा है तो भला अरब सागर में अमेरिकी डिस्ट्रॉयर पाकिस्तानी जलसीमा के पास क्या कर रहा है? नौसेना की मौजूदगी और ईरान के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने क्षेत्रीय हालात को और संवेदनशील बना दिया है. सवाल ये उठता है कि पाकिस्तान-ईरान सीमा पर क्या हो रहा है, अमेरिका की रणनीति क्या है और इन घटनाओं से आगे किस तरह की परिस्थितियां बन सकती हैं.
पाकिस्तान-ईरान सीमा क्यों की बंद?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने बताया कि तकनीकी समस्याओं और एहतियाती कदमों के कारण पाकिस्तान के साथ सीमा पार आवाजाही और लेनदेन को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक दोनों देशों के अधिकारी इस समस्या को सुलझाने के लिए लगातार संपर्क में हैं. पाकिस्तान की ओर से भी सीमा पर व्यापारिक गतिविधियां रोकने की जानकारी सामने आई है. 16 अक्टूबर को एक आधिकारिक आदेश जारी कर गब्द-रिमदान और तफ्तान सीमा चौकियों के रास्ते व्यापार रोक दिया. कहा तो जा रहा है कि सीमा को सुरक्षा चिंताओं, तस्करी और आतंकवाद विरोधी प्रयासों के चलते बंद किया गया है लेकिन ताजा गतिविधियां कुछ और ही कहानी कह रही हैं.
अरब सागर में क्या कर रहे अमेरिका का डिस्ट्रॉयर?
- इसी बीच अरब सागर में अमेरिकी नौसेना की गतिविधियां भी संदिग्ध परिस्थितियां पैदा कर रही हैं. उपलब्ध खबरों और ओपन-सोर्स ट्रैकिंग से जुड़े दावों की मानें तो अमेरिकी डिस्ट्रॉयर युद्धपोत पाकिस्तान के तट से लगभग 400 किलोमीटर दूर एक्टिव हो रहे हैं.
- अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की मौजूदगी को ईरान के साथ बढ़े तनाव के संदर्भ में न चाहते हुए भी देखा जा रहा है. अमेरिका की रणनीति में ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखना, समुद्री गतिविधियों पर निगरानी रखना और जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्प तैयार रखना शामिल हो सकता है.
- अमेरिकी युद्धपोतों का ईरानी तट से दूर रहना इस आशंका से भी जुड़ा बताया जा रहा है कि ईरान जवाबी कार्रवाई में एंटी-शिप मिसाइलों का इस्तेमाल कर सकता है. हालांकि इनकी संख्या को लेकर कोई सही आंकड़ा सामने नहीं आया है. सिर्फ सैन्य तैनाती अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि हमला होने वाला है, लेकिन अमेरिका के रिकॉर्ड को देखते हुए इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता है.
क्यों मची हुई है हलचल?
पाकिस्तान-ईरान सीमा बंद होने और अरब सागर में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के बीच क्षेत्रीय हालात पर दबाव बढ़ सकता है. अगर सीमा जल्द खुल जाती है, तो व्यापार और आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद है लेकिन यदि सुरक्षा संबंधी विवाद लंबा चलता है, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था और दोनों देशों के संबंध प्रभावित हो सकते हैं. वहीं अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने पर समुद्री सुरक्षा, तेल की आपूर्ति और पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता पर असर पड़ सकता है. हालांकि पाकिस्तान-ईरान सीमा बंद होने और अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के बीच सीधे संबंध का फिलहाल स्पष्ट प्रमाण नहीं है.