Orange Farming: अब संतरे के लिए नागपुर जाने की जरूरत नहीं, पलामू में 10 एकड़ में हो रही है शानदार खेती

Orange Farming: अब संतरे के लिए नागपुर जाने की जरूरत नहीं, पलामू में 10 एकड़ में हो रही है शानदार खेती


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अब संतरे के लिए नागपुर जाने की जरूरत नहीं, पलामू में 10 एकड़ में हो रही खेती

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महाराष्ट्र के नागपुर की तरह अब पलामू में भी संतरे की खेती की जा रही है. क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी में 10 एकड़ भूमि पर संतरे और मौसमी की फसल उगाई जा रही है. यहां की मीठी मौसमी और स्थानीय संतरे लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं. इससे किसानों के लिए कमाई के नए रास्ते खुलेंगे.

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पलामूः नाशिक और नागपुर का नाम आते ही लोगों के जेहन में रसीले और स्वादिष्ट संतरे की तस्वीर उभरने लगती है. महाराष्ट्र के ये दोनों शहर संतरे और अन्य खट्टे-मीठे फलों की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं. लेकिन अब झारखंड के पलामू में भी संतरे की खेती की संभावनाएं बेहद अधिक है. पलामू की शुष्क जलवायु संतरे की खेती के अनुकूल मानी जा रही है. यही वजह है कि जिले में संतरे की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, चियांकी में बड़ी क्षेत्र में इसकी खेती हो रही है. यहां की खेती और फलों का स्वाद लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन रहा है.

चियांकी फार्म में 10 एकड़ में प्रयोग
मेदिनीनगर स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, चियांकी को स्थानीय लोग चियांकी फार्म के नाम से जानते हैं. यहां के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश शाह ने कहा कि यहां नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन के तहत करीब 10 एकड़ क्षेत्र में नींबू वर्गीय फलों की खेती की गई है. इस बागान में संतरे और नींबू की विभिन्न प्रजातियों को विकसित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य पलामू की जलवायु और मिट्टी के अनुकूल फलों की प्रजातियों की पहचान करना और उनकी खेती की संभावनाओं को बढ़ावा देना है. यहां किए जा रहे प्रयोग किसानों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकते हैं. यदि इन प्रजातियों की खेती से बेहतर उत्पादन मिलता है, तो आने वाले समय में जिले के किसान भी व्यावसायिक स्तर पर संतरे की खेती की ओर कदम बढ़ा सकते हैं.

कीनू से लेकर नागपुर संतरे तक की प्रजातियां
चियांकी फार्म में नींबू वर्गीय फलों की लगभग 10 प्रजातियां लगाई गई हैं. इनमें कीनू, नागपुर संतरा, मौसमी, फंट लेमन, लामी पत्ती और कुर्ग मैंडरिन जैसी प्रजातियां शामिल हैं. इसके अलावा कागजी नींबू भी यहां उगाया जा रहा है. इन अलग-अलग प्रजातियों के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि पलामू की जलवायु में कौन से फल बेहतर तरीके से विकसित हो सकते हैं. इससे स्थानीय स्तर पर फल उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों के लिए खेती के नए विकल्प तैयार करने की संभावनाएं बन सकती हैं.

चियांकी की मौसमी के स्वाद के दीवाने हैं लोग
चियांकी फार्म की मौसमी अपने स्वाद को लेकर लोगों के बीच खास पहचान बना रही है. आमतौर पर बाजार में मिलने वाली मौसमी के जूस में हल्का खट्टापन महसूस होता है, लेकिन यहां की मौसमी का स्वाद अपेक्षाकृत मीठा बताया जाता है. यही वजह है कि एक बार इसका स्वाद चखने वाले कई लोग दोबारा इसे खरीदने के लिए पहुंचते हैं. कुछ लोग तो एक बार में 20 से 30 किलोग्राम तक मौसमी खरीदकर ले जाते हैं. फल के स्वाद में अंतर के पीछे स्थानीय जलवायु, मिट्टी और दूसरी प्राकृतिक परिस्थितियों की भूमिका हो सकती है.

छठ के आसपास तैयार होने लगेंगे संतरे
फिलहाल चियांकी फार्म में मौसमी का सीजन चल रहा है. वहीं, संतरे भी छठ पर्व के आसपास निकलने शुरू हो जाएंगे. ऐसे में स्थानीय लोगों को अपने जिले में ही उगाए गए संतरे और अन्य नींबू वर्गीय फलों का स्वाद चखने का मौका मिलेगा. चियांकी फार्म में हो रही यह पहल पलामू में बागवानी की नई संभावनाओं को सामने लाती है. यदि यहां संतरे की खेती के अनुकूल परिणाम मिलते हैं, तो भविष्य में पलामू के किसानों के लिए यह आय का एक नया जरिया बन सकता है. महाराष्ट्र के नाशिक और नागपुर की तरह पलामू में भी संतरे की खेती को पहचान दिलाने की दिशा में यह प्रयास महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.



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