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Mandsaur Ravan Puja: मध्यप्रदेश के मंदसौर में दशहरे पर एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है. यहां खानपुरा में 25 फीट ऊंची रावण की सिमेंट से बनी प्रतिमा है. दशहरे के यहां दिनभर पूजा होती है. मंदोदरी को समाज की बेटी मानने के कारण महिलाएं घूंघट करती हैं. वहीं, शाम को सीता हरण की वध करने की परंपरा है.
दशहरे पर मंदसौर में रावन की अनोखी पूजा.
Mandsaur News: दशहरे के अवसर पर जहां पूरे देश में रावण के पुतले का दहन किया जाता है, वहीं मध्यप्रदेश के मंदसौर में एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है. यहां दशहरे के दिन रावण की दिनभर विधि-विधान से पूजा की जाती है. नामदेव समाज मंदोदरी को अपनी बेटी मानता है, इसलिए रावण यहां के जमाई हैं.
खानपुरा में 25 फीट की प्रतिमा
मंदसौर शहर के खानपुरा क्षेत्र में सीमेंट से बनी रावण की 25 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित है. इस प्रतिमा को विशेष रूप से नामदेव समाज के लोग पूजते हैं. दशहरे के दिन सुबह से ही ढोल-धमाकों के साथ यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना शुरू हो जाता है. लोग बड़ी संख्या में रावण की विशेष पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. हर साल दशहरे से पहले इस प्रतिमा का रंग-रोगन कर कायाकल्प किया जाता है.
दामाद मानकर घूंघट करतीं महिलाएं
मंदसौर में रावण को केवल एक पौराणिक पात्र नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य माना जाता है. किंवदंती और मान्यता के अनुसार, रावण की पत्नी मंदोदरी नामदेव समाज की बेटी थीं. इसी नाते नामदेव समाज की महिलाएं रावण को अपना जमाई और आराध्य देव मानती हैं. यही वजह है कि जब भी समाज की महिलाएं रावण की इस प्रतिमा के सामने से गुजरती हैं, तो सम्मान स्वरूप घूंघट कर लेती हैं.
बाएं पैर में लच्छा बांधने से ठीक होता बुखार!
रावण की इस प्रतिमा से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. श्रद्धालु प्रतिमा के बाएं पैर में लच्छा (पवित्र धागा) बांधकर मन्नत मांगते हैं. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि रावण के पैर में लच्छा बांधने से बुखार में आराम मिलता है. जब श्रद्धालुओं की मन्नत पूरी हो जाती है, तो वे प्रतिमा पर नारियल और अगरबत्ती चढ़ाकर पूजा करते हैं.
प्रतिमा में 10वां सिर गधे के रूप में क्यों?
खानपुरा में बनी रावण की इस प्रतिमा की एक और खास बात ये कि इसमें दस के बजाय 9 ही सिर बनाए गए हैं. दसवां सिर मुख्य सिर के ऊपर गधे के रूप में दर्शाया गया है. नामदेव समाज के अध्यक्ष अशोक बघेरवाल के अनुसार, रावण एक अत्यंत विद्वान पंडित थे. इसी कारण दशहरे पर दिनभर उनका पूजन किया जाता है. हालांकि, उन्होंने सीता हरण करके बड़ी भूल की थी. सीता हरण करते समय उनकी बुद्धि गधे के समान हो गई थी. इसी बात को दर्शाने के लिए प्रतिमा पर गधे का सिर बनाया गया है. दिनभर पूजन के बाद शाम को सीता हरण की गलती के कारण उनका वध करने की यहां परंपरा है.