जमीन खरीदने जा रहे हैं? तो सिर्फ रजिस्ट्री कराना ही काफी नहीं, लेने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, वरना हो सकती है ठगी

जमीन खरीदने जा रहे हैं? तो सिर्फ रजिस्ट्री कराना ही काफी नहीं, लेने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, वरना हो सकती है ठगी


Land Buying Tips: जमीन खरीदना हर किसी के लिए बड़ा फैसला होता है. ऐसे में सिर्फ रजिस्ट्री करा लेना ही काफी नहीं है. जमीन खरीदने से पहले यह जानना भी जरूरी है कि उसे बेचने वाला व्यक्ति उसका मालिक कैसे बना और जमीन उसके नाम कैसे आई. इसके अलावा जमीन खरीदने के बाद खारिज-दाखिल कराना भी जरूरी है. ऐसा न करने पर जमीन से जुड़े दस्तावेजों में पुराने मालिक का नाम बना रह सकता है और धोखाधड़ी का खतरा भी रहता है.

जमीन खरीदने से पहले उसके पुराने रिकॉर्ड की जांच करना भी जरूरी है. इसके लिए कम से कम 10 साल का मुआयना जरूर कराएं. वहीं, जमीन से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड की जांच के लिए लेखपाल से रिपोर्ट भी ली जा सकती है. रवि सोनी ने जमीन खरीदने से पहले जरूरी बातों की जानकारी दी है.

जमीन खरीदने के बाद खारिज-दाखिल कराना जरूरी

रवि सोनी ने बताया कि जब कोई व्यक्ति क्रय-विक्रय के माध्यम से जमीन खरीदता है, तो उसे सबसे पहले यह देखना चाहिए कि जमीन बेचने वाला व्यक्ति उसका मालिक किस आधार पर बना है. उसे जमीन विरासत में मिली है या उसने बैनामे के जरिए खरीदी है, इसकी जानकारी लेना जरूरी है. जमीन खरीदने के बाद तत्काल खारिज-दाखिल कराना चाहिए, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. अगर खरीदार समय पर खारिज-दाखिल नहीं कराता है, तो इस बीच विक्रेता उसी जमीन को किसी दूसरे व्यक्ति को भी बेच सकता है.

खारिज-दाखिल नहीं होने पर हो सकती है ठगी

रवि सोनी ने बताया कि खारिज-दाखिल नहीं होने पर जमीन का नामांतरण नहीं हो पाता है और दस्तावेजों में पुराने मालिक का नाम ही दर्ज रहता है. ऐसे में समय पर खारिज-दाखिल नहीं कराने के कारण लोगों के साथ ठगी होने की आशंका बनी रहती है. उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा नियम बनाना चाहिए कि रजिस्ट्री कार्यालय या रजिस्ट्रार के माध्यम से बैनामा होते ही खतौनी में बेची गई जमीन का रकबा घटा दिया जाए. अगर खतौनी से उतना रकबा घटा दिया जाएगा, तो उसी जमीन को दोबारा बेच पाना संभव नहीं होगा.

जमीन खरीदने से पहले 30 साल का रिकॉर्ड देखें

रवि सोनी ने बताया कि जमीन खरीदने से पहले उसके कम से कम 30 साल के रिकॉर्ड का मुआयना कराना चाहिए. हालांकि, हर जमीन का 30 साल पुराना रिकॉर्ड मिलना आसान नहीं होता है. कुछ जमीनों के रिकॉर्ड ही इतने पुराने मिल पाते हैं. ऐसे में अगर 30 साल का मुआयना नहीं हो पा रहा है, तो कम से कम 10 साल का रिकॉर्ड जरूर देखना चाहिए. इससे पता चल सकता है कि पहले जमीन किसके नाम थी और उसे किस तरह खरीदा गया था. साथ ही यह भी जानकारी मिल सकती है कि जमीन पहले किसी को विरासत में मिली थी या नहीं. हालांकि, विरासत वाली जमीन का पुराना रिकॉर्ड कई बार आसानी से नहीं मिल पाता है.

पूर्वजों की जमीन का पुराना रिकॉर्ड मिलना मुश्किल

रवि सोनी ने बताया कि विरासत वाली जमीन के मामले में जब पुराने रिकॉर्ड की जांच की जाती है, तो पता चलता है कि जमीन पूर्वजों ने खरीदी थी. उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्रों के नाम नामांतरण करके जमीन दर्ज कर दी जाती है. ऐसी जमीन का मुआयना नगरपालिका या तहसील से विरासत के आधार पर कराया जा सकता है. हालांकि, कई बार 30 साल पुराना रिकॉर्ड नहीं मिल पाता है, क्योंकि पुराने दस्तावेजों को सही तरीके से सुरक्षित नहीं रखा गया है.

जमीन खरीदने से पहले लेखपाल से लें रिपोर्ट

रवि सोनी ने बताया कि जमीन खरीदने से पहले संबंधित लेखपाल से रिपोर्ट प्राप्त की जा सकती है. इस रिपोर्ट के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि जिस जमीन को खरीदा जा रहा है, उसका आराजी नंबर और चौहद्दी सही है या नहीं. उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़े ज्यादातर मामले राजस्व विभाग और तहसील स्तर पर सामने आते हैं. अगर लेखपाल और कानूनगो सही तरीके से जांच करके रिपोर्ट दें, तो जमीन से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों को रोका जा सकता है. इससे किसी व्यक्ति के लिए गलत जानकारी देकर जमीन बेचना भी मुश्किल हो जाएगा.



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