महाराष्ट्र के मालेगांव में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर निकाले गए मार्च को लेकर सियासी टकराव बढ़ता दिख रहा है. खबर है कि इस विरोध मार्च के दौरान टीपू सुल्तान के समर्थन में नारे लगाए गए. ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगते-मांगते कुछ लोग कथित तौर पर ‘हमें आजादी चाहिए, टीपू वाली आजादी’ जैसे नारे लगाते सुने गए. इस मामले पर कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार के बयान ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है. उन्होंने टीपू सुल्तान के इतिहास को गलत तरीके से पेश किए जाने का दावा किया और सवाल उठाया कि किसी की तस्वीर लगाने या आंदोलन करने से कोई राष्ट्रद्रोही कैसे हो सकता है. दूसरी ओर, सत्ताधारी बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए टीपू सुल्तान को स्वतंत्रता सेनानी मानने पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं.
तस्वीर से शुरू हुआ विवाद, नारों ने बढ़ाई सियासी गर्मी
मालेगांव में टीपू सुल्तान को लेकर विवाद की शुरुआत डिप्टी मेयर शाने हिंद के कार्यालय में उनकी तस्वीर लगाए जाने के बाद हुई थी. इसी बीच, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर संविधान बचाओ समिति की ओर से विरोध मार्च निकाला गया. डिप्टी मेयर शाने हिंद और समाजवादी पार्टी के शहर अध्यक्ष और नगरसेवक मुस्तकीम डिग्निटी के नेतृत्व में निकाले गए इस मार्च के दौरान टीपू सुल्तान के समर्थन में नारे लगाए जाने का मामला सामने आया. कुछ लोगों ने इस दौरान कथित तौर पर ‘हमें आजादी चाहिए, टीपू जैसी आजादी’ और ‘टीपू वाली आजादी’ जैसे नारे लगाए गए.
इन नारों के बाद विवाद ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है. सपा के शहर अध्यक्ष मुस्तकीम डिग्निटी ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा, ‘जिन लोगों ने टीपू को पढ़ा नहीं है, वे नहीं जानते कि टीपू क्या है.’
‘टीपू सुल्तान क्या देशद्रोही था?’
मालेगांव में लगाए गए नारों पर महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार ने टीपू सुल्तान का बचाव करते हुए कहा कि उनके इतिहास को गलत तरीके से पेश किया गया है. नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने सवाल किया कि क्या टीपू सुल्तान देशद्रोही था?
वडेट्टीवार ने कहा, ‘टीपू सुल्तान क्या देशद्रोही था? उसका इतिहास गलत तरीके से पेश किया गया. आजादी-आजादी क्या होनी चाहिए? यह सबको अपने-अपने हिसाब से चाहिए, लेकिन इस समय देश में जिस तरह का माहौल है, उसे देखकर अगर आजादी की कोई मांग करता है तो सवाल यह आता है कि क्या आज हम लोग लोकतंत्र में हैं? क्या हम संविधान को मानते हैं?’
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि टीपू सुल्तान के बारे में प्रदर्शन के दौरान क्या कहा गया, लेकिन किसी आंदोलन में शामिल होने या किसी की तस्वीर लगाने के आधार पर किसी को राष्ट्रद्रोही या नक्सली करार नहीं दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘टीपू सुल्तान के बारे में क्या बोला गया है, वह मुझे पता नहीं, लेकिन अगर कोई आंदोलन करता है, कोई किसी का फोटो लगाता है तो राष्ट्रद्रोही नहीं होना चाहिए. कोई नक्सली नहीं होना चाहिए. अब इतिहास पढ़ेंगे तो सबको पता चल जाता है.’
‘टीपू सुल्तान स्वतंत्रता सेनानी नहीं, विलेन था’
विजय वडेट्टीवार के बयान पर बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने कड़ी आपत्ति जताई है. शिवसेना नेता शाइना एनसी ने टीपू सुल्तान को स्वतंत्रता सेनानी के रूप में प्रस्तुत किए जाने पर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘विलेन’ बताया. शाइना एनसी ने कहा, ‘टीपू सुल्तान कोई स्वतंत्रता सेनानी नहीं है. वह विलेन थे, जिन्होंने भारत को बर्बाद किया और महिलाओं का बलात्कार किया.’
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी टीपू सुल्तान को औपनिवेशिक शासन का विरोध करने वाले नेता और सक्षम प्रशासक के रूप में पेश कर रही है. शाइना एनसी ने धार्मिक उत्पीड़न का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस तरह की नीतियां लोगों के हित में नहीं, बल्कि स्वार्थ के लिए होती हैं.