Kuhoo Garg IPS SVPNPA Sword of Honor: DGP की बैडमिंटन स्टार बेटी, बेड रेस्ट में क्रैक किया UPSC, कुहू गर्ग को अब मिला ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’


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Kuhoo Garg IPS SVPNPA Sword of Honor: घुटने की गंभीर चोट के बाद बैडमिंटन छोड़ यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा क्रैक करने वाली गुजरात कैडर की आईपीएस कुहू गर्ग चर्चा में हैं. इन्हें हैदराबाद में स्थित आईपीएस ट्रेनिंग सेंटर एसवीपीएनपीए में ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया गया है.

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DGP पिता की IPS बेटी, बेड रेस्ट में क्रैक किया UPSC, ट्रेनिंग में सम्मानितZoom

Kuhoo Garg IPS SVPNPA: आईपीएस कुहू गर्ग बैडमिंटन खिलाड़ी रह चुकी हैं

नई दिल्ली (Kuhoo Garg IPS SVPNPA). जिंदगी कब कौन सा मोड़ ले ले, कोई नहीं जानता. कई बार लोग जिस रास्ते पर अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं, अचानक वही बंद हो जाता है. लेकिन फिर उससे भी बड़ी मंजिल का दरवाजा खुल जाता है. कुछ ऐसी ही कहानी है देश की होनहार बेटी और गुजरात कैडर की आईपीएस कुहू गर्ग की. उन्होंने बैडमिंटन कोर्ट पर चमकने का सपना देखा था. लेकिन घुटने की गंभीर चोट ने उनके खेल करियर पर फुलस्टॉप लगा दिया. हालांकि, कुहू ने इस मुश्किल वक्त को अपनी ताकत बनाया और यूपीएससी की कठिन परीक्षा में पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली.

हाल ही में हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) में आयोजित 78वीं रेगुलर भर्ती की पासिंग आउट परेड में आईपीएस कुहू गर्ग ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है. उन्हें आईपीएस ट्रेनिंग के प्रतिष्ठित ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ (Sword of Honor) और बेस्ट आउटडोर प्रोबेशनर के सम्मान से नवाजा गया है. बैडमिंटन रैकेट छोड़कर खाकी वर्दी पहनने वाली आईपीएस कुहू गर्ग की सफलता इस बात की मिसाल है कि इरादे पक्के हों तो हर मुसीबत को सीढ़ी बनाकर बुलंदी को छुआ जा सकता है. जानिए आईपीएस कुहू गर्ग की सक्सेस स्टोरी.

बैडमिंटन के कोर्ट से आईपीएस की वर्दी तक: कुहू गर्ग की सक्सेस स्टोरी

उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) अशोक कुमार की बेटी कुहू गर्ग के लिए यह मुकाम हासिल करना आसान नहीं था. लेकिन उनकी अपनी मेहनत ने इसे मुमकिन कर दिया. 22 सितंबर 1998 को जन्मी कुहू गर्ग ने महज 9 साल की उम्र से बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था. मेहनत के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर 56 और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 19 पदक अपने नाम किए. साल 2018 में वह विश्व चैंपियनशिप के क्वॉर्टर फाइनल तक भी पहुंची थीं. इससे देश को उनसे खेलों में बड़े गोल्ड मेडल की उम्मीद थी.

जब एसीएल इंजरी ने बदली जिंदगी की दिशा

खेल के दौरान कुहू गर्ग के घुटने में गंभीर ACL Injury हो गई. डॉक्टरों ने उन्हें लंबे समय तक आराम करने और कोर्ट से दूर रहने की सलाह दी. किसी भी प्रोफेशनल एथलीट के लिए यह सबसे डरावना दौर होता है, जहां उसका करियर खतरे में पड़ जाता है. लेकिन कुहू गर्ग ने इस सदमे को अपनी हार नहीं बनने दिया. बेड रेस्ट के दौरान उन्होंने अपनी एनर्जी को सही दिशा में मोड़ा और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी चुपचाप शुरू कर दी.

पहले ही प्रयास में यूपीएससी क्रैक और अब SVPNPA में सम्मान

बिना किसी कोचिंग के लंबे समय तक रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करते हुए कुहू गर्ग ने साल 2023 की यूपीएससी परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में 178वीं रैंक हासिल की. इसके बाद उन्हें गुजरात कैडर आवंटित किया गया. हैदराबाद में स्थित आईपीएस ट्रेनिंग सेंटर SVPNPA में ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने अपने शानदार अनुशासन और लीडरशिप स्किल्स का परिचय दिया. 12 अक्टूबर 2026 को पासिंग आउट परेड में उन्हें ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ और बेस्ट ड्रिल प्रोबेशनर का खिताब मिला.

परिवार के साथ से रचा जीवन का नया फलसफा

आईपीएस कुहू गर्ग अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां, परिजनों, डॉक्टरों और गाइड्स को देती हैं. कुहू गर्ग का मानना है कि जिंदगी आपको हमेशा वहीं ले जाती है, जहां आपके लिए कुछ बेहतर लिखा होता है. बैडमिंटन खिलाड़ी से देश की तेज-तर्रार आईपीएस अफसर बनने तक का कुहू गर्ग का सफर साबित करता है कि खेल का मैदान हो या खाकी वर्दी का कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और जिजीविषा ही सफलता की असल कुंजी है.



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