Kolkata Stampede Reason | PHOTOS | डेढ़ घंटे की कतार, संकरा रास्ता और अंधेरा… बारिश आते ही कोलकाता का चोरबागान पंडाल कैसे बन गया मौत का फंदा?

Kolkata Stampede Reason | PHOTOS | डेढ़ घंटे की कतार, संकरा रास्ता और अंधेरा… बारिश आते ही कोलकाता का चोरबागान पंडाल कैसे बन गया मौत का फंदा?


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1.5 घंटे की कतार, संकरा रास्ता, अंधेरा… कोलकाता पूजा पंडाल में कैसे मची भगदड़?

Agency:एजेंसियां

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कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में 17 श्रद्धालुओं की मौत भारी अव्यवस्था से हुई. लोग डेढ़ घंटे से संकरी गलियों में कतार में खड़े थे. तेज बारिश शुरू होते ही अंदर घुसने की होड़ मच गई. वहां न लाइट थी और न ही एंट्री-एग्जिट के रास्ते चौड़े थे. इसी बीच पंडाल का एक हिस्सा गिर गया और लोग बच्चों के ऊपर जा गिरे. उस वक्त मौके पर पुलिस या वालंटियर तक मौजूद नहीं थे. पढ़ें इनसाइड स्टोरी. (All Photos : PTI)

उत्तरी कोलकाता के शारदा पार्क (चोरबागान) सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में हादसे के पीछे आयोजकों की बदइंतजामी और संकरे रास्तों का बड़ा रोल सामने आया है. शनिवार शाम करीब 7:40 बजे गिरीश पार्क थाना क्षेत्र में बने इस पंडाल में 17 श्रद्धालुओं की जान चली गई. लगभग 35 लोग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं. प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से साफ हुआ है कि बारिश शुरू होने से पहले ही हालात बेहद खराब हो चुके थे. लोग लगभग डेढ़ घंटे से लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे. जैसे ही मूसलाधार बारिश शुरू हुई, संकरे गेट और बिना रोशनी वाले रास्तों पर भगदड़ मच गई. इसके बाद एक-एक करके लोग गिरते चले गए और चीख-पुकार मच गई.

चोरबागान की 91वीं दुर्गा पूजा देखने के लिए शनिवार की शाम हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे. वीकेंड होने की वजह से मुक्ता राम बाबू स्ट्रीट की संकरी गलियों में भारी भीड़ जमा थी. श्रद्धालु लगभग डेढ़ घंटे से लाइन में खड़े होकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे. तभी शाम पौने आठ बजे के करीब अचानक तेज बारिश शुरू हो गई.

कतार में खड़े लोगों के पास छाते कम थे और हर कोई सिर छिपाने के लिए पंडाल के अंदर भागने लगा. बाहर मौजूद भीड़ का पूरा दबाव अचानक निकास द्वार और प्रवेश द्वार पर आ गया. इससे कतार टूट गई और हर कोई आगे निकलने की आपाधापी में लग गया.

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हादसे में घायल हुई बेटी और पोती के साथ मौजूद एक स्थानीय प्रत्यक्षदर्शी ने आपबीती बताई. उन्होंने बताया कि पंडाल का प्रवेश द्वार और निकास द्वार दोनों ही जरूरत से ज्यादा संकरे थे. हजारों लोगों की भीड़ के हिसाब से वहां कोई चौड़ा रास्ता नहीं छोड़ा गया था. इसके अलावा सबसे बड़ी लापरवाही यह थी कि उस पूरे इलाके में पर्याप्त रोशनी ही नहीं थी.

बारिश के बीच अचानक अंधेरा होने से लोग आगे का रास्ता नहीं देख पाए. संकरी जगह में लोग एक-दूसरे को धक्का देने लगे और जो लोग आगे थे उनका संतुलन बिगड़ गया. अंधेरे के कारण जमीन पर गिरे लोग उठ ही नहीं पाए और पीछे से आ रही भीड़ उन्हें कुचलती हुई आगे बढ़ गई.

भीड़ का दबाव इतना ज्यादा बढ़ गया था कि पंडाल का एक हिस्सा अचानक भरभरा कर गिर गया. पंडाल का ढांचा गिरते ही वहां मौजूद लोगों में भयानक दहशत फैल गई. लोगों को लगा कि पूरा पंडाल गिरने वाला है और इसके बाद अफरातफरी कई गुना बढ़ गई.

प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि वह खुद भी जमीन पर गिर पड़े थे. जब वे किसी तरह खड़े हुए तो उन्होंने देखा कि छोटे बच्चों और बच्चियों के ऊपर कई लोग एक साथ गिरे पड़े थे. बच्चे भीड़ के नीचे पूरी तरह दब चुके थे और सांस लेने के लिए तड़प रहे थे. अत्यधिक भीड़ के दबाव में कई महिलाएं और बुजुर्ग मौके पर ही बेहोश हो गए.

इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन और पूजा समिति की सबसे बड़ी नाकामी सुरक्षा की कमी रही. चश्मदीदों के मुताबिक जब यह भयानक मंजर चल रहा था, तब वहां न तो कोई पुलिसकर्मी दिखा और न ही कोई वालंटियर मदद के लिए मौजूद था.

चारों तरफ सिर्फ चीखने-चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं और लोग खुद ही अपनों को बचाने में लगे थे. एंबुलेंस का इंतजार किए बिना स्थानीय लोगों ने बेहोश और घायल श्रद्धालुओं को तुरंत अपनी मोटरसाइकिलों पर बैठाया. बाइक पर लादकर ही घायलों को नजदीकी अस्पतालों तक पहुंचाया गया. अगर समय रहते गेट चौड़े किए जाते और रोशनी का इंतजाम होता, तो यह भयानक हादसा टाला जा सकता था.

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