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Bharatpur News: भरतपुर की ऐतिहासिक बगीचियां कभी पहलवानी, व्यायाम और सुबह की सैर का प्रमुख केंद्र हुआ करती थी. अखाड़ों में पहलवानों की हुंकार और लोगों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाले ये स्थान अब धीरे-धीरे अपनी पहचान खो रहे हैं. देखरेख की कमी और बदलती जीवनशैली के बीच इन ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षण की दरकार है.
भरतपुर. शहर की ऐतिहासिक पहचान यहां के किले महलों और धार्मिक स्थलों तक ही सीमित नहीं है. बल्कि यहां की पुरानी बगीचियां भी शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा रही हैं. एक समय था जब ये बगीचियां लोगों के घूमने-फिरने सुबह की सैर व्यायाम और पहलवानी का प्रमुख केंद्र हुआ करती थी, यहां सुबह होते ही लोगों की चहल-पहल शुरू हो जाती थी पहलवान अखाड़ों में पसीना बहाते थे.
तो वहीं शहर के लोग खुली हवा में व्यायाम कर अपनी सेहत का ध्यान रखते थे, लेकिन बदलते समय के साथ अब ये ऐतिहासिक बगीचियां धीरे-धीरे गुमनामी की ओर बढ़ रही हैं. भरतपुर शहर में एक समय कई प्रमुख बगीचियां हुआ करती थी जहां स्थानीय लोग नियमित रूप से घूमने व्यायाम करने और पहलवानी का अभ्यास करने के लिए पहुंचते थे. इन बगीचियों में केवल शारीरिक व्यायाम ही नहीं होता था बल्कि लोगों के बीच सामाजिक गतिविधियों का भी केंद्र रहती थी.
पहले ये स्थान शहर की खास पहचान हुआ करते थे
सुबह के समय यहां पहलवानों की कसरत अखाड़ों में अभ्यास और लोगों की चहल-पहल देखने को मिलती थी, बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक के लिए ये स्थान दिनचर्या का अहम हिस्सा हुआ करते थे. पहलवान चुन्नी कप्तान ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि इन बगीचियों में समय बिताने वाले पहलवानों और स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले ये स्थान शहर की खास पहचान हुआ करते थे यहां लोग नियमित रूप से पहलवानी और व्यायाम करने आते थे. बगीचियों में बने अखाड़े युवाओं को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ अनुशासन और मेहनत की सीख भी देते थे. इन स्थानों से शहर की पुरानी परंपराएं और जीवनशैली जुड़ी हुई थी, लेकिन अब पहले जैसी रौनक दिखाई नहीं देती समय के साथ लोगों की दिनचर्या बदली है.
इन स्थानों की देखरेख भी पहले जैसी नहीं रह गई है, शहर में तेजी से बढ़ती आबादी बदलती जीवनशैली और उचित रखरखाव की कमी के कारण इन बगीचियों का स्वरूप प्रभावित हो रहा है. कभी हरियाली और खुली जगह के लिए पहचाने जाने वाले ये स्थान अब धीरे-धीरे अपनी पुरानी पहचान खोते जा रहे हैं. यदि समय रहते इनकी देखभाल और संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाली पीढ़ियां शहर की इस ऐतिहासिक विरासत से परिचित होने का अवसर खो सकती हैं. भरतपुर की इन ऐतिहासिक बगीचियों को फिर से विकसित करने के लिए साफ-सफाई, हरियाली अखाड़ों के संरक्षण और नियमित रखरखाव की जरूरत है.