मोकामा-मुंगेर हाईवे पर जमीन अधिग्रहण, मुआवजा मिल रहा फिर भी किसानों को क्यों जाना पड़ा DM के पास?

मोकामा-मुंगेर हाईवे पर जमीन अधिग्रहण, मुआवजा मिल रहा फिर भी किसानों को क्यों जाना पड़ा DM के पास?


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Mokama-Munger Greenfield Expressway: बिहार में लगातार हाईवे और एक्सप्रेस-वे का निर्माण तेजी से किया जा रहा है. सरकार किसानों की जमीन अधिग्रहण कर मुआवजा दे रही है, लेकिन मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड हाईवे पर पेंच फंस गया. किसानों को मुआवजा मिल रहा है. बावजूद इसके वह नाखुश हैं. ऐसे में तकरीबन 160 किसान अपनी समस्या लेकर डीएम ऑफिस जा पहुंचे.

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मुंगेर डीएम से मिले किसान. (सांकेतिक तस्वीर AI से बनाई गई.)

मुंगेरः मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड हाईवे के लिए जमीन लेने की प्रक्रिया के बीच किसानों ने मुआवजे को लेकर अपनी मांग तेज कर दी. किसानों का कहना है कि जमीन की कीमत तय करते समय उसकी मौजूदा स्थिति और आसपास हुए विकास को भी ध्यान में रखा जाए. इसी मांग को लेकर नौ मौजों के करीब 160 किसानों ने शुक्रवार 16 अक्टूबर को जिलाधिकारी (DM) को आवेदन सौंपा. किसानों ने जमीन का दोबारा सर्वे कराने और आवासीय जमीन की दर से मुआवजा तय करने की मांग की है. इसके साथ ही उन्होंने खेतों तक पहुंचने के रास्ते को लेकर भी चिंता जाहिर की.

जमीन की कीमत को लेकर क्या है किसानों की मांग?
दैनिक जागरण कि रिपोर्ट के मुताबिक, किसानों का कहना है कि उनकी जमीन की कीमत तय करते समय सिर्फ पुराने सरकारी रेट को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए. जमीन कहां है, उसके आसपास कितनी आबादी है, सड़क से उसकी दूरी कितनी है और इलाके में कितना विकास हुआ है, इन बातों को भी देखा जाना चाहिए. किसानों ने मांग की है कि जमीन की मौजूदा स्थिति के हिसाब से दोबारा सर्वे किया जाए. इसके बाद सही जानकारी और जमीन की कीमत से जुड़े सबूतों के आधार पर मुआवजा तय किया जाए.

सिर्फ मुआवजा नहीं, खेतों तक रास्ते की भी चिंता
किसानों ने साफ कहा कि वे हाईवे बनाने के खिलाफ नहीं हैं. वे चाहते हैं कि सड़क भी बने और उनकी जमीन का सही मुआवजा भी मिले. किसानों के प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक, DM ने आवेदन लेने के बाद इस मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से बात करने का भरोसा दिया है. किसानों की परेशानी केवल जमीन की कीमत तक सीमित नहीं है. उन्हें चिंता है कि हाईवे बनने के बाद उनके खेतों तक पहुंचने का रास्ता कहीं बंद न हो जाए. उन्होंने सर्विस रोड और अंडरपास बनाने की मांग भी उठाई है, ताकि खेतों तक आने-जाने में परेशानी न हो.

नौ मौजों के किसान हुए एकजुट
किसानों का कहना है कि हाईवे के लिए जमीन लेने के बाद जो जमीन बच जाएगी, उसका इस्तेमाल खेती के लिए हो सके, इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए. अगर सड़क बनने से खेतों तक पहुंचना मुश्किल होता है या बची हुई जमीन पर खेती करना परेशानी भरा हो जाता है, तो इसका हल पहले से निकाला जाना चाहिए. इस मांग को लेकर नौ मौजों के किसानों ने मिलकर DM को आवेदन दिया है. आवेदन पर करीब 160 किसानों के हस्ताक्षर हैं. इसके साथ प्रगतिशील किसान मोर्चा की ओर से पहले दिया गया आवेदन भी जोड़ा गया है, जिस पर 102 किसानों के हस्ताक्षर थे.



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