India Monsoon: भारत में मौसम का अलग ही खेल चल रहा है. देश में साउथ वेस्ट मानसून की विदाई के साथ ही दक्षिण भारत में बारिश का एक नया दौर शुरू हो गया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 को दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरे देश से वापस लौट गया. इसी दिन साउथ इंडिया के कई हिस्सों में पूर्वोत्तर मानसून की बारिश भी शुरू हो गई. इस मौसमी बदलाव के साथ जून से सितंबर तक चलने वाले मुख्य मानसून सीजन का अंत हो गया है, लेकिन देश के दक्षिणी हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है.
पूर्वोत्तर मानसून क्या है?
पूर्वोत्तर मानसून भारत में बारिश का दूसरा महत्वपूर्ण मौसमी दौर है. यह आमतौर पर अक्टूबर से दिसंबर के बीच ऐक्टिव रहता है. दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश के बड़े हिस्से में बारिश होती है, जबकि पूर्वोत्तर मानसून का प्रभाव मुख्य तौर पर देश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में देखने को मिलता है. इस मानसून का नाम हवाओं की दिशा के आधार पर पड़ा है.
दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के बाद हवाओं का रुख बदलने लगता है और पूर्वोत्तर दिशा से आने वाली हवाएं प्रभावी हो जाती हैं. ये हवाएं बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर दक्षिण भारत के कई इलाकों में बारिश कराती हैं. इस मौसम में बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र, साइक्लोन सर्कुलेशन और चक्रवात भी बारिश को प्रभावित करते हैं. ऐसे मौसमी सिस्टम कई बार कम समय में तेज बारिश का कारण बन सकते हैं.
दक्षिण भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है पूर्वोत्तर मानसून?
पूर्वोत्तर मानसून तमिलनाडु, पुडुचेरी, तटीय आंध्र प्रदेश और कर्नाटक तथा केरल के कुछ हिस्सों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. खासकर तमिलनाडु की सालाना बारिश में इस मानसून का बड़ा योगदान होता है. इसलिए यह मौसम खेती, जलाशयों में पानी के स्टोरेज और पेयजल की सप्लाई के लिहाज से अहम माना जाता है.
IMD ने पुष्टि की कि 15 अक्टूबर को तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल तथा माहे में पूर्वोत्तर मानसून की बारिश शुरू हो गई. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 21 अक्टूबर तक दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है. इस दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की भी संभावना जताई गई है.
दक्षिण-पश्चिम और पूर्वोत्तर मानसून में क्या अंतर है?
दक्षिण-पश्चिम मानसून और पूर्वोत्तर मानसून दोनों भारत की मौसमी बारिश सिस्टम का हिस्सा हैं, लेकिन इनकी हवाओं की दिशा, सक्रिय रहने का समय और प्रभाव वाले क्षेत्र अलग-अलग हैं. दक्षिण-पश्चिम मानसून जून से सितंबर के बीच देश के बड़े हिस्से में बारिश लाता है. इसके विपरीत, पूर्वोत्तर मानसून मुख्य तौर पर अक्टूबर से दिसंबर के दौरान दक्षिण भारत के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी इलाकों को प्रभावित करता है.
दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का अर्थ है कि यह मौसमी सिस्टम देश से पीछे हट रही है. वहीं पूर्वोत्तर मानसून उस बदलाव के बाद बनने वाले हवाओं के पैटर्न और उससे जुड़ी बारिश को दर्शाता है. इसलिए मानसून की विदाई का मतलब यह नहीं है कि पूरे देश में बारिश बंद हो जाएगी. देश के कई हिस्सों में मौसम के ड्राई होने लगता है, जबकि साउथ भारत में बारिश का एक नया सीजन शुरू हो जाता है.