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Success Story: बुरहानपुर के मोहन चौधरी ने इंजीनियर की नौकरी छोड़कर केला चिप्स बनाने की फैक्ट्री शुरू की है. उनकी फैक्ट्री में प्रतिदिन ढाई क्विंटल चिप्स का उत्पादन होता है और 15 लोगों को रोजगार मिल रहा है.
Success Story: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में केले की खेती बड़े पैमाने पर होती है. यहां के किसान केले का उत्पादन कर अपनी आजीविका चलाते हैं. वहीं कुछ लोग केले से विभिन्न उत्पाद तैयार कर व्यवसाय के नए अवसर भी तलाश रहे हैं. ऐसी ही कहानी जिले के इच्छापुर गांव के रहने वाले मोहन चौधरी की है जिन्होंने इंजीनियर की नौकरी छोड़कर खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया. उन्होंने केला चिप्स बनाने की फैक्ट्री शुरू की और धीरे-धीरे अपने कारोबार को आगे बढ़ाया. आज उनकी फैक्ट्री में प्रतिदिन करीब दो से ढाई क्विंटल केला चिप्स का उत्पादन हो रहा है. उनके इस व्यवसाय से 15 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है.
नौकरी छोड़कर चुनी उद्यमिता की राह
लोकल 18 की टीम को मोहन चौधरी ने बताया कि इंजीनियर की नौकरी करने के बाद खुद का व्यवसाय शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया. केले की उपलब्धता को देखते हुए इससे चिप्स बनाने का काम शुरू किया. शुरुआत में उत्पादन सीमित था और बाजार में अपने उत्पाद की पहचान बनाना एक चुनौती थी. हालांकि, उन्होंने गुणवत्ता पर ध्यान देते हुए कारोबार को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रखा. 16 सालों से फैक्ट्री का संचालन कर रहा हु.
स्वाद और गुणवत्ता से बढ़ी मांग
शुरुआती दौर में कम उत्पादन से शुरू हुआ यह कारोबार धीरे-धीरे गति पकड़ने लगा ग्राहकों को केला चिप्स का स्वाद और गुणवत्ता पसंद आने लगी. जिससे मांग में बढ़ोतरी हुई. इसके बाद उत्पादन बढ़ता गया और फैक्ट्री में प्रतिदिन दो से ढाई क्विंटल चिप्स तैयार किए जाने लगे. स्थानीय स्तर पर केले से खाद्य उत्पाद तैयार करने की यह पहल कृषि आधारित उद्योग की संभावनाओं को भी सामने लाती है.
15 लोगों को मिल रहा रोजगार
मोहन चौधरी की केला चिप्स फैक्ट्री अब केवल उनके व्यवसाय तक सीमित नहीं है. बल्कि इससे 15 लोगों को रोजगार का अवसर भी मिल रहा है. उनकी यह पहल बताती है कि पारंपरिक नौकरी के अलावा स्थानीय संसाधनों के आधार पर भी स्वरोजगार की राह बनाई जा सकती है. बुरहानपुर जैसे केला उत्पादक जिले में केले से चिप्स जैसे उत्पाद तैयार करना स्थानीय उपज का मूल्य बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. मोहन चौधरी की यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है जो नौकरी के साथ-साथ अपना उद्यम शुरू करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं.