Agency:एजेंसियां
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भारत ने मालदीव सरकार के 30 अरब रुपये की करेंसी स्वैप सुविधा बढ़ाने के अनुरोध को मंजूरी दे दी है. यह फैसला भारत की पड़ोसी प्रथम नीति और मालदीव के साथ आर्थिक रिश्ते मजबूत करने की दिशा में अहम है. इस व्यवस्था के तहत मालदीव को वित्तीय जरूरतें पूरी करने के लिए भारतीय रुपये उपलब्ध कराए जा सकते हैं, जिन्हें समझौते की शर्तों के अनुसार लौटाना होता है. भारत पहले भी मालदीव को वित्तीय सहायता दे चुका है.
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू. (Reuters)
नई दिल्ली: भारत ने मालदीव सरकार के 30 अरब रुपए की करेंसी स्वैप सुविधा को आगे बढ़ाने के अनुरोध को मंजूरी दे दी है. यह फैसला भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और द्वीपीय देश के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता के तहत लिया गया है. यह जानकारी शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई. भारत की ओर से यह सुविधा सार्क देशों के लिए करेंसी स्वैप व्यवस्था के ढांचे के तहत दी जा रही है. इस व्यवस्था पर अक्टूबर 2024 में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण के बीच हस्ताक्षर किए गए थे.
करेंसी स्वैप क्या होती है?
मान लीजिए, मालदीव सरकार के पास रुपये या डॉलर की कमी हो गई है. उसे दूसरे देशों से सामान खरीदने, जरूरी भुगतान करने और अपनी अर्थव्यवस्था चलाने के लिए पैसों की जरूरत है. ऐसे में भारत उसे करेंसी स्वैप के तहत भारतीय रुपये उपलब्ध करा सकता है. इससे मालदीव को तुरंत पैसों की जरूरत पूरी करने में मदद मिलती है. समझौते की शर्तों के मुताबिक, मालदीव को बाद में यह रकम लौटानी होती है.
इस सुविधा के तहत 30 अरब रुपए की पहली राशि इस साल 23 अप्रैल को मालदीव सरकार को दी गई थी. भारत के लिए यह निरंतर वित्तीय सहायता हिंद महासागर के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पड़ोसी देश के साथ व्यापक संबंधों का भी हिस्सा है. साल 2024-27 के ढांचे के तहत द्विपक्षीय करेंसी स्वैप व्यवस्था में रियायती शर्तें शामिल हैं, जिनमें अनुकूल ब्याज दरें और अन्य सुविधाएं शामिल हैं. वर्ष 2012 में इस ढांचे की शुरुआत के बाद से RBI मालदीव को कुल 1.1 अरब डॉलर से अधिक की स्वैप सहायता उपलब्ध करा चुका है.
भारत कैसे कर रहा मदद?
भारत ने सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के माध्यम से भी मालदीव की मदद की है. भारत ने 250 मिलियन डॉलर और 100 मिलियन डॉलर के दो दीर्घकालिक ट्रेजरी बॉन्ड की खरीद की थी. इसके अलावा, भारत की ओर से खरीदे गए 150 मिलियन डॉलर मूल्य के तीन ट्रेजरी बिलों का भुगतान मालदीव ने कर दिया है. इन प्रतिभूतियों पर लगा 42.8 मिलियन डॉलर का ब्याज भारत सरकार ने चुकाया था. करेंसी स्वैप सुविधा और मालदीव के ट्रेजरी बॉन्ड एवं बिलों में भारत के निवेश ने देश की वित्तीय स्थिरता को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. यह ताजा फैसला मालदीव के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के भारत के व्यापक प्रयासों के बीच आया है.
पड़ोसी प्रथम नीति पर टिका भारत
बयान में कहा गया कि भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और उसके ‘महासागर’ विजन क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति में मालदीव का विशेष स्थान है. भारत मालदीव के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने के लिए भी प्रतिबद्ध है. इसमें अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपति मुइज्जू की भारत यात्रा के दौरान अपनाई गई ‘व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी के लिए संयुक्त दृष्टिकोण’ को लागू करना भी शामिल है.