भारत की सबसे बड़ी कडियम नर्सरी, जहाँ मिलते हैं 10 रुपए से लाखों तक के पौधे
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Kadiyam Nursery: आंध्र प्रदेश के कडियम को भारत की प्लांट कैपिटल कहा जाता है, करीब 10 हजार एकड़ में फैली सैकड़ों नर्सरियों में हजारों किस्म के पौधे तैयार होते हैं. यहां 10-20 रुपये के छोटे पौधों से लेकर लाखों रुपये के दुर्लभ बोनसाई तक मिलते हैं. देश-विदेश में मशहूर कडियम का नर्सरी कारोबार 50 हजार से अधिक लोगों की आजीविका का सहारा बना हुआ है.
हैदराबाद. अगर आपको पेड़-पौधों और हरियाली से प्यार है तो आंध्र प्रदेश का एक छोटा सा इलाका आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं है. पूर्वी गोदावरी जिले में राजमहेंद्रवरम के पास स्थित कडियम को भारत का सबसे बड़ा नर्सरी हब माना जाता है. इसे देश की प्लांट कैपिटल भी कहते हैं, यहां की हरियाली और फूलों की खुशबू दूर-दूर तक फैली हुई है. कडियम कोई एक साधारण दुकान या छोटी नर्सरी नहीं है बल्कि यह कई गांवों में फैला एक विशाल क्लस्टर है. कडियापुलंका, बुर्रिलंका और वीरवरम जैसे दर्जनों गांवों के किसान और कारोबारी इस काम से जुड़े हैं. करीब 10,000 एकड़ के बड़े इलाके में सैकड़ों नर्सरियां फैली हुई हैं, यहां कदम रखते ही चारों तरफ सिर्फ और सिर्फ रंग-बिरंगे फूल, सजावटी पौधे और विशाल पेड़ ही दिखाई देते हैं.
इस इलाके की सबसे बड़ी ताकत गोदावरी नदी की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और भरपूर पानी है, यहां करीब 100 साल पहले किसानों ने पारंपरिक खेती के साथ-साथ पौधों की कलम और सजावटी पौधे उगाने का काम शुरू किया था. समय के साथ यह शौक एक विशाल कारोबार में बदल गया. आज यहां फलदार पेड़ों से लेकर विदेशी इनडोर प्लांट्स, बोनसाई, कैक्टस, ऑर्किड और सड़कों के किनारे लगने वाले बड़े छायादार पेड़ों की हजारों किस्में तैयार होती हैं. नर्सरी की कर्मचारी रंगा गुलकांती अनुसार कडियम नर्सरी की खासियत यह है कि यहां 10-20 रुपये के छोटे पौधे से लेकर लाखों रुपये की कीमत वाले दुर्लभ बोनसाई और पुराने सजावटी पेड़ भी आसानी से मिल जाते हैं.
देश के बड़े शहरों में बनने वाले नए एयरपोर्ट, मेट्रो स्टेशन, हाईवे, कॉर्पोरेट पार्क और बड़े होटलों की हरियाली के लिए पौधे कडियम से ही मंगाए जाते हैं. इतना ही नहीं, भारत के तमाम राज्यों के अलावा खाड़ी देशों तक में यहां के पौधों की भारी मांग रहती है. यह नर्सरी हब केवल हरियाली ही नहीं फैला रहा, बल्कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का जरिया भी बना हुआ है. स्थानीय स्तर पर 50 हजार से अधिक लोग कलम बांधने, सिंचाई, देखभाल और ट्रांसपोर्टेशन के काम में लगे हैं. साथ ही गमले, खाद और पैकेजिंग का भी बड़ा बाजार यहां खड़ा हो चुका है. कुल मिलाकर कडियम किसानों की मेहनत और प्रकृति के तालमेल की एक शानदार मिसाल बन चुका है.