Last Updated:
JIO IPO : जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ अगले हफ्ते बाजार में उतर जाएगा. इससे पहले ब्रेकरेज हाउस और एनालिस्ट ने इसे खरीदने की रेटिंग देना शुरू कर दिया है. एनालिस्ट का अनुमान है कि लिस्टिंग वाले दिन ही इन शेयरों पर 15 से 20 फीसदी का रिटर्न मिल सकता है. इस दौरान ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी भी 84 फीसदी पहुंच गया है.
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को शेयर बाजार में आएगा.
नई दिल्ली. जियो प्लेटफॉर्म्स का प्राइस बैंड सामने आने के बाद कई एनालिस्ट रिपोर्ट्स ने कंपनी के IPO को हरी झंडी दी है. मार्केट एक्सपर्ट्स को लिस्टिंग पर ही करीब 15 से 20% तक शुरुआती बढ़त की संभावना नजर आ रही है. हालांकि, वास्तविक लिस्टिंग बाजार की परिस्थितियों और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगी. इस बीच ग्रे मार्केट प्राइस यानी जीएमपी भी 84 फीसदी बढ़ चुका है. इसका मतलब है कि जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर आने वाले समय में 84 फीसदी का रिटर्न दे सकते हैं.
16 अक्टूबर को जारी अपनी IPO नोट में एमके रिसर्च ने जियो IPO को ‘सब्सक्राइब’ रेटिंग दी है. ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि कंपनी की मार्केट लीडरशिप, प्राइसिंग पावर, मजबूत एक्जीक्यूशन और आगे के ग्रोथ अवसरों को देखते हुए मौजूदा प्राइस बैंड वाजिब है. स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट ने भी जियो IPO को ‘सब्सक्राइब’ रेटिंग दी है. उसकी रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 की कमाई के आधार पर ऊपरी प्राइस बैंड पर जियो का P/E करीब 33.3 गुना है, जबकि भारती एयरटेल का 40.7 गुना. इसका मतलब है कि इस पैमाने पर स्वास्तिका जियो को एयरटेल के मुकाबले करीब 18% कम वैल्यूएशन पर देखता है.
वैल्यूएशन भी दिख रहा वाजिब
एक अलग वैल्यूएशन आधार पर कुछ मार्केट एक्सपर्ट्स ने जियो की कीमत उसकी कमाई का करीब 33.5 गुना और भारती एयरटेल को उसकी कमाई का करीब 38.9 गुना आंका है. इस हिसाब से जियो करीब 14% सस्ती दिखती है. हालांकि, एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनी की आगे की कुछ ग्रोथ का असर मौजूदा कीमत में पहले से शामिल है. जियो के लिए एक बड़ी राहत यह है कि 5G नेटवर्क पर भारी निवेश का दौर अब काफी हद तक पूरा हो चुका है. एमके रिसर्च का कहना है कि FY24 से FY26 के बीच कंपनी का पूंजीगत खर्च, रेवेन्यू के 48.8% से घटकर 23.3% रह गया. FY26 में कंपनी का फ्री कैश फ्लो करीब 32,500 करोड़ रुपये रहा. रिपोर्ट का मानना है कि आगे बड़े निवेश की जरूरत घटने से जियो के पास ज्यादा नकदी बच सकती है.
लॉन्ग टर्म में बेहतर रिटर्न
लंबी अवधि में मार्केट एक्सपर्ट्स की नजर सिर्फ मोबाइल कारोबार पर नहीं है. होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज, क्लाउड, AI और अपनी टेक्नोलॉजी को विदेशी बाजारों में ले जाना अगले ग्रोथ ड्राइवर माने जा रहे हैं. एमके ने भी होम ब्रॉडबैंड को अगला बड़ा ग्रोथ ड्राइवर और कंपनी की इन-हाउस टेक्नोलॉजी स्टैक को इंटरनेशनल अवसर बताया है. जियो की अलग लिस्टिंग का असर रिलायंस इंडस्ट्रीज पर भी दिखा है. 15 अक्टूबर को जियो का प्राइस बैंड सामने आने के बाद RIL का शेयर करीब 3.4% चढ़ा. बाजार की नजर इस बात पर भी है कि जियो की स्वतंत्र लिस्टिंग से RIL शेयरहोल्डर्स के लिए वैल्यू अनलॉकिंग की संभावना और मजबूत हो सकती है.
जीएमपी पहुंचा 84 फीसदी के पार
सिर्फ ब्रोकरेज हाउस और एनालिस्ट ही नहीं, ग्रे मार्केट में निवेशक भी जियो प्लेटफॉर्म्स के स्टॉक्स पर लट्टू हो रहे हैं. ग्रे मार्केट प्रीमियम पिछले दो सप्ताह में करीब 84 फीसदी उछला है. 16 अक्टूबर को जीएमपी बढ़कर 230 रुपये पहुंच गया है. 2 अक्टूबर को यह प्राइस 125 रुपये ही था. जियो प्लेटफॉर्म का वैल्यूएशन 10 लाख करोड़ से ज्यादा बताया गया है, जिसका मतलब है कि अब रिलायंस समूह का कुल वैल्यूएशन 28.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है. आरआईएल अब देश की सबसे ज्यादा वैल्यूएशन वाली कंपनी बन चुकी है.