होर्मुज के गेट पर ट्रंप की सेना मुंह ताकती रही, ईरान के जहाज भारत तक पहुंचे, किस देश ने खरीदा तेल-LPG?

होर्मुज के गेट पर ट्रंप की सेना मुंह ताकती रही, ईरान के जहाज भारत तक पहुंचे, किस देश ने खरीदा तेल-LPG?


Iran Oil Ship: अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार को रोकने के लिए समुद्र में नाकेबंदी की. युद्धपोत और एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए और जहाजों की आवाजाही पर कड़ी नजर रखी. दावा था कि ईरान का तेल बाहर जाने से रोक दिया जाएगा. लेकिन अब शिपिंग इंटेलिजेंस और समुद्री सुरक्षा से जुड़े लोगों के हवाले से सामने आई जानकारी बताती है कि इस सख्ती के बीच भी ईरान कुछ लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) और जेट फ्यूल विदेश भेजने में कामयाब रहा. सवाल है कि अमेरिकी नाकेबंदी के बीच ईरान ने यह रास्ता कैसे निकाला.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने जुलाई के मध्य से ओमान की खाड़ी के रास्ते गैस की कई खेपें बाहर भेजीं. वहीं, ईरान का जेट फ्यूल ले जाने वाला एक टैंकर सितंबर में म्यांमार पहुंचा. यानी ईरान से चला जहाज बंगाल की खाड़ी में पहुंचा. वहीं कुछ जहाजों के चीन तक पहुंचने का शक है. ये ऐसे संकेत हैं, जो बताते हैं कि अमेरिका की इतनी सख्त नाकेबंदी के बावजूद ईरान के कुछ पेट्रोलियम उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रहे हैं. हालांकि, यह युद्ध से पहले किए जा रहे निर्यात का बहुत छोटा हिस्सा है.

ईरान ने कैसे निकाला रास्ता?

रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान हाल के हफ्तों में अपने तेल उत्पादों की खेप छिपाकर भेज रहा है. इसके लिए वह ओमान के तट के पास दूसरे खाड़ी देशों के जहाजों के बीच तेल की अदला-बदली की बढ़ती गतिविधियों का फायदा उठा रहा है. शिप-टू-शिप ट्रांसफर का मतलब है समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल या गैस जैसी सामग्री ट्रांसफर करना. इससे माल आगे किसी दूसरे जहाज के जरिए भेजा जा सकता है. हालांकि, इस तरीके का इस्तेमाल अपने आप में यह साबित नहीं करता कि हर खेप ने अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा दिया.

अमेरिका से जुड़े ईरान के टैंकरों पर नजर रखने वाले संगठन यूनाइटेड अगेंस्ट न्यूक्लियर ईरान (UANI) के विश्लेषण के मुताबिक, जुलाई के मध्य से कम से कम आठ गैस टैंकर ईरानी LPG लेकर ओमान की खाड़ी से रवाना हुए. इन खेपों की कुल मात्रा करीब 41 लाख बैरल बताई गई है. वहीं, समुद्री खुफिया समूह SynMax की सैटेलाइट तस्वीरों और विश्लेषण के मुताबिक, ईरानी जेट फ्यूल ले जाने वाला एक अन्य टैंकर सितंबर में म्यांमार पहुंचा.

अमेरिकी प्रतिबंधों में फंसे थे कई जहाज

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी LPG ले जाने वाले आठ टैंकरों में से छह और जेट फ्यूल ले जाने वाला टैंकर अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में थे. इन पर ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों को ले जाने के कारण प्रतिबंध लगाए गए थे. UANI की वरिष्ठ रिसर्च एनालिस्ट जेमिमा शेली के मुताबिक, कुछ ईरानी LPG टैंकरों ने ओमान के शिनास और सोहार तटीय इलाकों के पास माल ट्रांसफर किया. कुछ दूसरे टैंकर ओमान की खाड़ी में इंतजार करते रहे और बाद में अमेरिकी नाकेबंदी वाले क्षेत्र से आगे बढ़े.

शेली ने यह भी कहा कि इन खेपों को ईरान की ओर से निर्यात का कोई बड़ा नया तरीका मानने के बजाय मौके का फायदा उठाने की कोशिश के तौर पर देखना चाहिए. उनके मुताबिक, ज्यादातर खेपें मलेशिया के ईस्टर्न आउटर पोर्ट लिमिट्स तक गईं, जहां से आगे चीन पहुंचने की आशंका है. ईरान सरकार ने इस मामले पर रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया. म्यांमार की सैन्य समर्थित सरकार ने भी ईरानी जेट फ्यूल मिलने के सवाल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

अमेरिका का क्या है दावा?

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अपनी समुद्री नाकेबंदी को ‘आयरनक्लैड’ यानी बेहद मजबूत बताया है. अमेरिका ने 13 अप्रैल को ईरान से जुड़े तेल निर्यात पर नाकेबंदी लगाई थी. जून में ईरान के साथ एक शुरुआती समझ बनी, जिसके बाद इसे हटा लिया गया. लेकिन समझौता टूटने के बाद 14 जुलाई को इसे दोबारा लागू कर दिया गया. अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने रॉयटर्स से कहा कि किसी जहाज का नाकेबंदी वाले इलाके से गुजर जाना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसने नाकेबंदी को चकमा दिया. हर जहाज की अलग-अलग जांच की जाती है और उसके दस्तावेजों की समीक्षा भी होती है. अधिकारी के मुताबिक, कुछ जहाजों को मानवीय कारणों से आगे बढ़ने की अनुमति भी दी जा सकती है.



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