खेती में अगर कुछ नया करने का जुनून हो, तो सोशल मीडिया भी किसानों के लिए सीखने का अच्छा जरिया बन सकता है. खंडवा के किसान राजू लेवा इसकी मिसाल हैं. पहले वे सोयाबीन, प्याज, मक्का और दूसरी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे, लेकिन लागत बढ़ने और फसलों का सही दाम नहीं मिलने के कारण उन्होंने खेती में कुछ नया करने की सोची। इसी दौरान सोशल मीडिया पर उन्हें विदेशी फूलों और बेर की खेती के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल सहित दूसरे राज्यों में जाकर इन फसलों की खेती देखी, जानकारी जुटाई और अपने खेत में प्रयोग शुरू कर दिया. आज वे विदेशी गुलाब और बेर की खेती से रोजाना आमदनी हासिल कर रहे हैं.
सोशल मीडिया पर देखा वीडियो, फिर दूसरे राज्यों में जाकर समझी खेती
LOCAL18 से बातचीत में किसान राजू लेवा बताते हैं कि वे शुरुआत से ही पारंपरिक खेती करते आ रहे थे. इसमें लागत लगाने के बाद भी कई बार उपज का उचित दाम नहीं मिल पाता था। ऐसे में उन्होंने सोचा कि क्यों न ऐसी फसल लगाई जाए, जिससे नियमित आमदनी हो सके। एक दिन सोशल मीडिया पर खेती से कमाई के नए तरीके खोजते समय उन्हें विदेशी गुलाब और बेर की खेती के बारे में पता चला. इसके बाद उन्होंने केवल वीडियो देखकर खेती शुरू नहीं की, बल्कि पश्चिम बंगाल सहित दूसरे राज्यों में जाकर वहां के खेतों और पौधों को देखा. जानकारी जुटाने के बाद अलग-अलग जगहों से पौधे मंगवाए और अपने खेत में थोड़ी-थोड़ी जगह पर इनकी खेती शुरू कर दी.
शुरुआत में छह महीने किया इंतजार, अब रोज मिल रही आमदनी
राजू लेवा बताते हैं कि शुरुआत में पौधों को तैयार होने में समय लगा। करीब छह महीने तक उन्होंने पौधों की देखभाल की, जिसके बाद फूल आने लगे। बेर के पौधों में भी बढ़त के साथ फल मिलने शुरू हुए. अब उनके खेत में विदेशी गुलाब के फूल और बेर की तुड़ाई होती है। किसान के मुताबिक, इन दोनों फसलों से उन्हें नियमित आमदनी मिल रही है। उनका कहना है कि पारंपरिक फसलों में किसान को कटाई और बिक्री के समय बड़ी रकम मिलने का इंतजार करना पड़ता है, जबकि इन फसलों में तैयार फूल और फल बाजार में बेचने से अलग-अलग समय पर पैसा मिल सकता है.
फूलों से रोज 1500 से 2000 रुपये की कमाई का दावा
किसान राजू लेवा के मुताबिक, वे विदेशी फूलों की बिक्री से रोजाना करीब 1500 से 2000 रुपये तक की आमदनी कर रहे हैं। बेर से भी उन्हें रोज करीब 3 से 4 हजार रुपये मिलने की बात वे बताते हैं. राजू का कहना है कि इस साल फूलों की खेती से अब तक करीब 2 लाख रुपये की आमदनी हो चुकी है. उनके खेत में विदेशी बेर की दो किस्में भी हैं. हालांकि, खेती से होने वाली वास्तविक कमाई मौसम, उत्पादन, बाजार भाव और लागत पर निर्भर करती है. इसलिए दूसरे किसानों को इस तरह की खेती शुरू करने से पहले अपने क्षेत्र की जलवायु, बाजार और पौधों की जरूरतों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए.
सरे किसान भी देखने पहुंच रहे खेत
राजू लेवा बताते हैं कि विदेशी फूलों और बेर की खेती को देखने के लिए आसपास के किसान भी उनके खेत पर आते हैं। वे उन्हें बताते हैं कि सोशल मीडिया से जानकारी मिलने के बाद उन्होंने दूसरे राज्यों में जाकर खेती का तरीका समझा और फिर अपने खेत में प्रयोग किया. उनके मुताबिक, किसान अगर पारंपरिक फसलों के साथ कुछ नई फसलों को भी सीमित क्षेत्र में लगाकर अनुभव हासिल करें, तो उन्हें आमदनी के नए रास्ते तलाशने में मदद मिल सकती है. हालांकि, किसी भी नई फसल को बड़े स्तर पर लगाने से पहले पौधों की उपलब्धता, देखभाल, बिक्री के बाजार और संभावित लागत का हिसाब लगाना जरूरी है.
नई सोच से खेती में बनाया अलग रास्ता
खंडवा के राजू लेवा की कहानी बताती है कि किसान खेती में नए प्रयोग करने के लिए सोशल मीडिया से जानकारी ले सकते हैं, लेकिन सही जानकारी जुटाना और जमीन पर उसे समझकर अपनाना भी उतना ही जरूरी है। राजू ने विदेशी गुलाब और बेर की खेती शुरू करने से पहले दूसरे राज्यों में जाकर जानकारी ली और फिर अपने खेत में पौधे लगाए। अब वे इन फसलों से आमदनी हासिल कर रहे हैं। उनकी यह पहल उन किसानों के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो पारंपरिक खेती के साथ कुछ नया करने की योजना बना रहे हैं.