केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के जेवरात विदेश में बेचने पर मिलने वाली शुल्क वापसी (ड्यूटी ड्रॉबैक) की दरें घटा दी हैं. यानी जब कारोबारी विदेश में बेचने के लिए जेवर बनाते हैं, तो कच्चा माल खरीदने पर चुकाए गए कुछ ड्यूटी सरकार नियमों के मुताबिक वापस करती है. इसी पैसे की वापसी को ड्यूटी ड्रॉबैक कहते हैं. वित्त मंत्रालय के नए आदेश के मुताबिक, सोने के जेवरात पर मिलने वाली रकम 3.1% और चांदी के जेवरात पर करीब 9% कम कर दी गई है. यानी अब जेवर विदेश में बेचने वाले कारोबारियों को सरकार से पहले के मुकाबले कम पैसा वापस मिलेगा.
सरकार ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी की कीमतों और आयात लागत में बदलाव हो रहा है. इससे पहले जुलाई में सरकार ने कुछ कैटेगरी के जेवर पर ड्यूटी ड्रॉबैक की दरें लगभग दोगुनी कर दी थीं. उस समय निर्यातकों को बढ़ती लागत से राहत देने और इंटरनेशनल मार्केट में कॉम्टिशन बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया था. अब कीमतों और वास्तविक आयात शुल्क (Import Duty) में बदलाव की वजह से दरों में दोबारा बदलाव किया गया है.
सोने-चांदी के जेवरात पर कितनी घटी दरें?
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, टैरिफ आइटम 711301 के तहत सोने के जेवर की ड्यूटी ड्रॉबैक दर 1,851.99 रुपये से घटाकर 1,794.11 रुपये प्रति ग्राम कर दी गई है. यानी अब निर्यातकों को हर ग्राम पर 57.88 रुपये कम वापस मिलेंगे. वहीं, टैरिफ आइटम 711302 और 711401 के तहत चांदी के जेवरात और कुछ अन्य चांदी के सामान की दर 29,501.09 रुपये से घटाकर 26,859.02 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी गई है. इस तरह प्रति किलोग्राम मिलने वाली वापसी राशि में 2,642.07 रुपये की कमी आई है.
क्या होता है ड्यूटी ड्रॉबैक?
अगर कोई कंपनी विदेश में बेचने के लिए सोने के जेवर बनाती है और इसके लिए आयातित सोने पर ड्यूटी चुकाती है, तो तय नियमों और दरों के अनुसार उसे कुछ रकम वापस मिल सकती है. दर घटने का मतलब है कि अब संबंधित निर्यात पर मिलने वाला रिफंड पहले से कम होगा.
जुलाई में लगभग दोगुनी की गई थीं दरें
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने जुलाई 2026 में सोने और चांदी के जेवरात की कुछ कैटेगरी के लिए ड्यूटी ड्रॉबैक दरों में बड़ी बढ़ोतरी की थी. उस समय सोने के जेवरात की दर 773.17 रुपये प्रति ग्राम से बढ़ाकर 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम कर दी गई थी. इसी तरह, चांदी के जेवरात और चांदी से बनी कुछ सामानों की दर 14,990.66 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम की गई थी. उस समय बढ़ती इनपुट लागत और ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच निर्यातकों को राहत देना सरकार का उद्देश्य था. नई कटौती के बाद इन दरों में फिर बदलाव हुआ है.
सोने-चांदी के जेवर पर ड्यूटी ड्रॉबैक दरें कम होने से आपके जेब पर कितना असर?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के सचिव सुरेंद्र मेहता के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतें घटने से इन धातुओं पर लगने वाला वास्तविक आयात शुल्क भी कम हुआ है. उन्होंने बताया कि ड्यूटी ड्रॉबैक की दरें प्रतिशत के बजाय तय रकम के आधार पर निर्धारित थीं. इसलिए कीमतों और वास्तविक शुल्क में बदलाव के बाद दरों में सुधार करना जरूरी हो गया था.
इस कटौती का सीधा असर सोने-चांदी के जेवरात के निर्यातकों को मिलने वाले रिफंड पर पड़ेगा. उन्हें अब पहले की तुलना में कम रकम वापस मिलेगी. हालांकि, आम लोगों के लिए इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कारोबारी इस अतिरिक्त लागत का बोझ कैसे संभालते हैं. असल में, घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतें इंटरनेशनल गोल्ड-सिल्वर का रेट, रुपये की कीमत, आयात शुल्क और स्थानीय मांग जैसे कई फैक्टर्स से तय होती हैं.