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Bhagalpur Unique Durga Puja: भागलपुर के महाशय ड्योढ़ी में 9 या 10 दिन नहीं, बल्कि 18 दिनों तक दुर्गा पूजा होती है. अकबर के शासनकाल से चली आ रही इस अनोखी परंपरा में कौड़ी लुटाने की भी खास प्रथा है. कहते हैं जिसे यह कौड़ी मिलती है उसके घर सुख-समृद्धि आती है.
भागलपुर. सनातन धर्म में दुर्गा पूजा का विशेष महत्व है. लोग इस पूजा को पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ करते हैं. नवरात्र में मां दुर्गा के भक्त 9 दिनों तक और विजयादशमी तक पूजा करने वाले 10 दिनों तक उपवास रखते हैं. भक्त अलग-अलग तरीकों से उपवास कर मां की पूजा-अर्चना करते हैं. कोई निराहार रहता है, तो कोई जल ग्रहण कर पूजा करता है. आपने 10 दिनों तक होने वाली दुर्गा पूजा के बारे में सुना होगा, लेकिन भागलपुर में एक ऐसा मंदिर है, जहां 10 नहीं, बल्कि 18 दिनों तक दुर्गा पूजा होती है. यह जानकर आपको हैरानी हो सकती है, लेकिन यहां जितिया के उपवास के दिन से ही दुर्गा पूजा की शुरुआत हो जाती है.
स्थानीय लोगों का मत
जब इस बारे में स्थानीय लोगों से बात की गई, तो उन्होंने लोकल 18 को बताया कि भागलपुर के महाशय ड्योढ़ी में मां दुर्गा की पूजा की अनोखी परंपरा है. यहां 9 या 10 दिन नहीं, बल्कि 18 दिनों तक दुर्गा पूजा होती है. बोधन घट के दिन ही कलश भरा जाता है और उसी दिन से पूजा शुरू हो जाती है. हेमंत कुमार के अनुसार, बोधन घट के दिन अन्य जगहों पर भी कलश भरा जाता है, लेकिन वहां पूजा बाद में शुरू होती है, जबकि महाशय ड्योढ़ी में उसी दिन से पूजा शुरू हो जाती है. यहां कौड़ियां लुटाने की खास परंपरा है और उनकी विशेष आराधना की जाती है.
महाशय परिवार और पौराणिक परंपरा
यह परंपरा महाशय परिवार के वंशज निभाते आ रहे हैं. इसके जानकार हेमंत कुमार ने लोकल 18 को बताया कि महाशय की दुर्गा की मान्यता बहुत प्रचलित है. कोलकाता की काली और महाशय ड्योढ़ी की दुर्गा की काफी प्रतिष्ठा है. बनर्जी ने कहा कि महाशय ड्योढ़ी के पूर्व राज परिवार के श्री राम घोष ने अकबर के शासनकाल में यहां देवी की पूजा शुरू की थी. अब उनकी 22वीं पीढ़ी इस पूजा को कर रही है.
कौड़ी लुटाने की विशेष परंपरा
यहां कौड़ी लुटाने की परंपरा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. बोधन घट के दिन से कौड़ियां लुटाई जाती हैं और पूजा के दौरान भी यह परंपरा जारी रहती है. हजारों की संख्या में लोग इसमें भाग लेने आते हैं. कहा जाता है कि जिन भक्तों को ये कौड़ियां मिलती हैं, वे धन-समृद्धि प्राप्त करते हैं और रोगों से मुक्त रहते हैं. माता का विसर्जन विजयादशमी के दिन होता है.