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Bihar News: बिहार में टीचर और स्कूल कर्मचारियों के वेतन भुगतान में बड़ी गड़बड़ी सामने आई. पटना के एक स्कूल में तय 20 फीसदी की जगह 200 फीसदी और उससे ज्यादा HRA दिया गया. इससे 76.71 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ. मामले में शिक्षा विभाग ने दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया. जबकि दो लिपिकों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है.
सांकेतिक तस्वीर. (AI से बनाई गई.)
पटनाः बिहार में शिक्षकों के वेतन में गबन के मामले में बड़ा एक्शन लिया गया. सरकारी स्कूल के कर्मचारियों को तय दर से ज्यादा HRA (हाउस रेंट अलाउंस) दिया जा रहा था. पटना के एक स्कूल में 20 फीसदी की जगह 200 फीसदी HRA दिया जा रहा था. इस मामले में दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया. वहीं, दो क्लर्क के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई. मामला पटना के गुलजारबाग स्थित एफएनएस एकेडमी उच्च माध्यमिक विद्यालय का है.
76 लाख का गबन
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में सामने आया कि स्कूल के दो कर्मचारियों को तय दर से काफी ज्यादा आवास भत्ता दिया गया. इससे सरकारी खजाने पर 76 लाख 71 हजार 983 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा. बिहार की ऑडिट टीम ने 6 अगस्त को इस गड़बड़ी को पकड़ा था. जांच में पता चला कि नवंबर 2024 से अप्रैल 2025 और अक्टूबर 2025 के दौरान दो कर्मचारियों को तय 20 फीसदी की जगह 200 फीसदी और उससे ज्यादा दर से HRA दिया गया था.
ब्याज जमा नहीं करने पर हुई कार्रवाई
मामले की जानकारी मिलने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय ने दोनों कर्मचारियों को ज्यादा मिली राशि तीन दिन के अंदर सरकारी खजाने में जमा करने का निर्देश दिया. इसके बाद 14 अगस्त को दोनों ने नौ चेक के जरिए कुल 76,71,983 रुपये वापस किए. 20 अगस्त को यह रकम सरकारी खजाने में जमा करा दी गई. हालांकि, ज्यादा मिली राशि वापस करने के बाद भी मामला खत्म नहीं हुआ. विभाग ने दोनों कर्मचारियों से इस रकम पर ब्याज जमा करने और स्पष्टीकरण देने को कहा था. इसके लिए 10 सितंबर को नोटिस जारी किया गया. जवाब नहीं मिलने पर 3 अक्टूबर को दोबारा 24 घंटे के अंदर ब्याज की राशि जमा करने का निर्देश दिया गया. इसके बावजूद दोनों कर्मचारियों ने न तो ब्याज की रकम जमा की और न ही अपना जवाब दिया. इसके बाद विद्यालय के लिपिक विजय कृष्ण विद्यार्थी और परिचारी संजू कुमारी को सस्पेंड कर दिया गया.
दो लिपिकों के खिलाफ FIR
इस मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के लिपिक मनीष कुमार और तत्कालीन लिपिक अमित कुमार के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है. दोनों के खिलाफ 12 अक्टूबर को FIR दर्ज कराई गई. साथ ही, दोनों पर विभागीय कार्रवाई शुरू करने के लिए संबंधित अधिकारी को अनुरोध भेजा गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए DM के निर्देश पर आठ सदस्यों की एक जांच समिति बनाई गई है. समिति को HRMS सिस्टम लागू होने के समय से अब तक किए गए वेतन भुगतान की जांच करने को कहा गया है.