देहरादून में ₹173 करोड़ से बनेगी देश की 5वीं साइंस सिटी, उत्तराखंड में खुलेगा ‘साइंस टूरिज्म’ और नए रोजगार का द्वार

देहरादून में ₹173 करोड़ से बनेगी देश की 5वीं साइंस सिटी, उत्तराखंड में खुलेगा ‘साइंस टूरिज्म’ और नए रोजगार का द्वार


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Dehradun Science City: देवभूमि उत्तराखंड अब अध्यात्म और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ विज्ञान और अत्याधुनिक नवाचार के क्षेत्र में भी देश का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है. देहरादून में ₹173 करोड़ की लागत से 26 एकड़ क्षेत्र में देश की पाँचवीं ‘साइंस सिटी’ आकार ले रही है, जो प्रदेश के युवाओं के सपनों को नई वैज्ञानिक उड़ान देगी. एआई, रोबोटिक्स, डिजिटल लाइब्रेरी और ‘लैब ऑन व्हील्स’ से सुसज्जित यह विशाल केंद्र छात्रों में नवाचार की अलख जगाने के साथ-साथ राज्य में ‘साइंस टूरिज्म’ और स्वरोजगार के नए द्वार खोलेगा.

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Dehradun Science City: देवभूमि उत्तराखंड अब सिर्फ धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन ही नहीं, बल्कि विज्ञान और नवाचार के एक बड़े केंद्र के रूप में उभरने जा रहा है. देहरादून में 173 करोड़ रुपये की लागत और 26 एकड़ के विशाल क्षेत्र में बन रही देश की 5वीं ‘साइंस सिटी’ (‘साइंस एंड इनोवेशन सेंटर’) प्रदेश के युवाओं और विद्यार्थियों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलेगी. यह अत्याधुनिक केंद्र न केवल स्कूली और कॉलेज विद्यार्थियों में प्रयोगात्मक रूप से सीखने की रुचि जगाएगा, बल्कि राज्य में ‘साइंस टूरिज्म’ को बढ़ावा देकर नए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा. ‘लैब ऑन व्हील्स’, एआई, रोबोटिक्स और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस यह महत्वाकांक्षी परियोजना उत्तराखंड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख रिसर्च और इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी.

वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आर्थिक विकास को गति
यहां लगने वाली इंटरैक्टिव प्रदर्शनियों और साइंस गैलरी से आम जनता में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होगा. आर्थिक रूप से यह केंद्र राज्य में ‘साइंस टूरिज्म’ को बढ़ावा देकर रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, जिससे देहरादून को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख इनोवेशन और रिसर्च हब के रूप में पहचान मिलेगी. विज्ञान को सिर्फ किताबों और प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर आम जीवन से जोड़ना समय की बड़ी मांग है.

मोबाइल ऐप और सीमांत क्षेत्रों के लिए पहल
इसी सोच के तहत साइंस सिटी की लैब्स की सुविधाओं को घर-घर पहुँचाने के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप बनाया जा रहा है, जिससे बच्चे ऑनलाइन प्रैक्टिकल कर सकेंगे. इसके साथ ही पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है. राज्य के हर विकासखंड में ‘लैब ऑन व्हील्स’ पहुंचने के साथ-साथ सभी जिलों में विज्ञान एवं नवाचार केंद्र स्थापित किए जाएंगे. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक करोड़ रुपये की घोषणा की थी जिससे सीमावर्ती जिलों के विज्ञान महोत्सव और संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे.

आधुनिक सुविधाओं से लैस देश का 5वां केंद्र
देहरादून में बन रही यह परियोजना भारत की 5वीं साइंस सिटी है, जिसका निर्माण कार्य बहुत तीव्र गति से चल रहा है. लगभग 26 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत 173 करोड़ रुपये है. इसके तहत देहरादून में लैब्स ऑन व्हील्स, जीआईएस-आधारित डैशबोर्ड, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट इंफॉर्मेशन सेंटर और स्टेम लैब्स जैसी आधुनिक सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है. यह केंद्र राज्य को विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा.

व्यावहारिक अनुसंधान और भविष्य की तैयारी
उत्तराखंड में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पर्यटन और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पहले से ही एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन और सेमीकंडक्टर के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकार का लक्ष्य है कि दूर-दराज और पर्वतीय क्षेत्रों के स्कूली बच्चों को नियमित रूप से साइंस सिटी का भ्रमण कराया जाए. इस तरह के व्यावहारिक एक्सपोज़र से बच्चों के भीतर अनुसंधान और नवाचार की भावना जागेगी, जो भविष्य के शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों की एक नई पीढ़ी तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगी.

रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान और साइबर सुरक्षा
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि हमारा विभाग बच्चों के लिए साइंस एंड टेक्नोलॉजी में उज्ज्वल भविष्य के लिए कई तरह के प्रयास कर रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग केवल डेटा इकट्ठा करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. इसका वास्तविक लाभ आम जनता की रोजमर्रा की समस्याओं को सुलझाने और विभिन्न क्षेत्रों के समग्र विकास में किया जा रहा है. इसके साथ ही आईटी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को उन्नत प्रशिक्षण देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि राज्य के साइबर सुरक्षा सिस्टम को पहले से अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाया जा सके.



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