कंगला पाकिस्तान बनेगा मालदीव का खेवनहार? ‘मिलिट्री ग्रांट’ का वादा, पर देने को कबाड़ तक नहीं


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Pakistan Military Grant for Maldives: पाकिस्तान ने इस वक्त मालदीव के साथ रक्षा समझौते का मन बना लिया है लेकिन सवाल ये उठता है कि पाकिस्तान क्या अपना वादा पूरा कर पाएगा? जिस पाकिस्तान पर खुद सिर्फ 4 CN-235 ट्रांसपोर्ट विमान देने की चर्चा, लेकिन पाकिस्तान के पास सिर्फ 4 विमान होने का दावा.

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कंगला पाक बनेगा मालदीव का खेवनहार? मिलिट्री ग्रांट का वादा, देने को कबाड़ नहींZoom

पाकिस्तान से मदद लेगा मलेशिया, पर पाक देगा क्या?

Pakistan Military Grant for Maldives: हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए पाकिस्तान अब मालदीव के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. दावा है कि पाकिस्तान, मालदीव को विमान देने और वहां एयरफोर्स खड़ी करने में मदद करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है. इस प्रस्ताव को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान के पास खुद इतने विमान और संसाधन हैं कि वह मालदीव को यह मदद दे सके?

अब तक मिले दस्तावेजों के मुताबिक 22 अक्टूबर, 2025 को मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने पाकिस्तान के तत्कालीन चीफ ऑफ ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी से मुलाकात के दौरान कुछ पुराने विमान देने, तकनीकी और आर्थिक मदद उपलब्ध कराने और एयरफोर्स के लिए जरूरी ढांचा तैयार करने का अनुरोध किया था. दिसंबर, 2025 में मालदीव के उपराष्ट्रपति और रक्षा मंत्री ने भी इस मांग को दोहराया. इसके बाद 9 फरवरी, 2026 को पाकिस्तान में मौजूद मालदीव के राजनयिक मिशन ने एयरफोर्स बनाने से जुड़ा प्रस्ताव पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय और दूसरी संबंधित एजेंसियों को भेजा.

मालदीव ने पाकिस्तान से क्या-क्या मांगा?

  • प्रस्ताव के तहत कम से कम एक CN-235 ट्रांसपोर्ट विमान देने पर विचार किए जाने की बात कही गई है. इसके अलावा, पाकिस्तान मालदीव को सैन्य प्रशिक्षण, एयरफोर्स के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा और संगठन तैयार करने में मदद दे सकता है.
  • नौसेना को मजबूत करने के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, साइबर और सैटेलाइट कम्युनिकेशन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की भी चर्चा है.
  • मालदीव के लिए विमान खरीदने या हासिल करने का मकसद समुद्री निगरानी, सर्च एंड रेस्क्यू, मेडिकल इवैक्यूएशन और दूर-दराज के द्वीपों के बीच आवाजाही को मजबूत करना हो सकता है. हालांकि सिर्फ विमान मिलना काफी नहीं होगा.
  • विमानों को उड़ाने के लिए प्रशिक्षित पायलट, तकनीकी कर्मचारी, एयरबेस, रखरखाव और लगातार आर्थिक मदद भी चाहिए. अगर इन सुविधाओं की गारंटी नहीं मिली, तो विमान मिलने के बावजूद उनका इस्तेमाल मुश्किल हो सकता है.

भारत को छोड़कर पाकिस्तान की ओर झुकती नीति

इस पूरे घटनाक्रम को पाकिस्तान और मालदीव के बीच बढ़ते रणनीतिक संपर्क के तौर पर भी देखा जा रहा है. 2018 से 2023 के दौरान मालदीव में इब्राहिम मोहम्मद सोलिह की सरकार के समय भारत के साथ रिश्तों को प्राथमिकता मिली थी, लेकिन राष्ट्रपति मुइज्जू के कार्यकाल में पाकिस्तान के साथ रक्षा और कूटनीतिक संपर्क बढ़े हैं. 2024 में दोनों देशों के बीच रक्षा वार्ता फिर शुरू हुई. 2025 में पाकिस्तानी नौसेना के जहाज सात साल के अंतराल के बाद मालदीव पहुंचे. दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के दौरे भी बढ़े हैं. अब अक्टूबर 2026 में राष्ट्रपति मुइज्जू के पाकिस्तान दौरे के दौरान इस प्रस्ताव पर समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई गई है. हालांकि ये साफ नहीं है कि विमान देने का अंतिम फैसला हो चुका है या समझौते पर हस्ताक्षर होना तय हैं.

कंगाल पाकिस्तान की नजर हिंद महासागर पर

हालांकि इस प्रस्ताव के सामने पाकिस्तान की अपनी सैन्य जरूरतों का सवाल खड़ा होता है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान एयरफोर्स के पास सिर्फ 4 CN-235 विमान हैं और उसके पास देने के लिए पुराने विमानों का पर्याप्त भंडार नहीं है. ये विमान इंडोनेशिया से खरीदे गए थे और इनका डिजाइन इंडोनेशिया और स्पेन से जुड़ा है. ऐसे में विमान देने के बाद उनके स्पेयर पार्ट्स, मरम्मत और लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए जरूरी सहायता कौन देगा, यह भी बड़ा सवाल है. पाकिस्तान के लिए यह पहल हिंद महासागर में अपना प्रभाव बढ़ाने का मौका हो सकती है, जबकि मालदीव के लिए यह अपनी सैन्य क्षमताएं विकसित करने का एक विकल्प है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि पाकिस्तान केवल प्रस्ताव पेश करता है या विमान, प्रशिक्षण और रखरखाव समेत लंबे समय तक चलने वाला सहायता पैकेज भी दे पाता है.



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