समंदर की अथाह गहराइयों में सदियों से छुपा एक ऐसा बेशकीमती खजाना बाहर आया है, जो इतिहास के पन्नों को पूरी तरह बदलकर रख देगा. पानी के नीचे 30 मीटर की गहराई में मिले एक बहुत पुराने मलबे से ऐसी अजीब और चिपचिपी चीज बरामद हुई है, जो 4700 साल बीतने के बाद भी वैसी की वैसी ही है. पुरातत्वविदों और वैज्ञानिकों के लिए ये किसी जादुई लॉटरी से कम नहीं है. इस खोज के बाद प्राचीन व्यापार, गुप्त तकनीकों और पुराने विज्ञान के कई बड़े राज बेपर्दा हो गए हैं. ये खोज आने वाली पीढ़ियों और आधुनिक रिसर्च के लिए अरबों डॉलर की कीमती संपत्ति साबित होने वाली है.
समंदर की तलहटी से निकले प्राचीन टाइम कैप्सूल का सच
- कहां मिला ये खजाना: एंटाल्या के पास केकोवा द्वीप के करीब उथले पानी में एक बहुत ही पुराने व्यापारिक जहाज का मलबा मिला है.
- किसने की ये खोज: मेडिटेरियन आर्कियोलॉजी एसोसिएशन और लोकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने सालों की मेहनत और खोज के बाद इसे ढूंढ निकाला है.
- कितना पुराना है ये जहाज: वैज्ञानिक जांच में पता चला है कि ये जहाज करीब 4400 से 4700 साल पुराना है, जो अर्ली ब्रॉन्ज एज का है.
- अब तक क्या-क्या सलामत बचा: इतने हजार सालों तक पानी में रहने की वजह से जहाज की लकड़ी तो पूरी तरह सड़कर खत्म हो चुकी है, लेकिन मिट्टी के बड़े-बड़े बर्तन और पत्थर के तीन भारी लंगर आज भी समंदर की चट्टानों में सुरक्षित बचे हुए हैं.
बर्तनों के अंदर देखा तो फटी रह गई आंखें
इस ऐतिहासिक खोज को अंजाम देने के लिए एक्सपर्ट गोताखोरों ने लगातार चार महीनों तक समंदर की गहराइयों में उतरकर जान जोखिम में डाली. पानी के भीतर चट्टानों से मजबूती से चिपके बार्नेकल यानी छोटे समुद्री जीवों की मोटी परतों के बीच से मिट्टी के इन दुर्लभ बर्तनों को एक-एक करके बाहर निकाला गया.
पुरातत्व की भाषा में इन खास बर्तनों को एम्फोरा कहा जाता है. इन बर्तनों की बनावट बेहद अनूठी है, जिनके दोनों तरफ पकड़ने के लिए मजबूत हैंडल बने हैं, इनका आधार नीचे से चपटा है और बीच का हिस्सा थोड़ा उभरा हुआ है.
जब दुनिया भर में अपनी बेहतरीन खोज के लिए मशहूर पुरातत्वविदों और प्रोफेसरों की टीम ने पहली बार इन बर्तनों के भीतर झांककर देखा, तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं. बर्तनों के अंदर एक बेहद चिपचिपा, गाढ़ा और चमकदार अवशेष जमा हुआ था, जो हजारों साल का लंबा समय बीत जाने के बाद भी सूखा नहीं था और अपनी मूल रंगत में मौजूद था.
उस रहस्यमयी चिपचिपी चीज में क्या छुपा है?
ये रहस्यमयी चिपचिपा पदार्थ आखिर क्या है और इसे इतने जतन से क्यों ले जाया जा रहा था? अब इसे लेकर दुनिया की सबसे आधुनिक लैब्स में वैज्ञानिक जांच बहुत तेजी से चल रही है. इतिहास के एक्सपर्ट्स और शोधकर्ताओं का मानना है कि ये कोई साधारण कचरा या जमा हुआ कीचड़ नहीं है, बल्कि ये प्राचीन काल की सबसे कीमती और दुर्लभ व्यापारिक वस्तुएं हो सकती हैं.
उस दौर में मिस्र के शक्तिशाली फराओ और अमीर राजा-महाराजा जिन बेशकीमती चीजों का सबसे ज्यादा आयात करते थे, उनमें शुद्ध जैतून का तेल, सबसे पुरानी अंगूरी शराब, या फिर दुर्लभ देवदार के पेड़ों से निकलने वाला विशेष रेजिन यानी गोंद शामिल था. ये रेजिन उस जमाने में राजाओं के महलों को चमकाने, जहाजों को वॉटरप्रूफ बनाने और सबसे महत्वपूर्ण यानी मृतकों के शवों को ‘ममी’ के रूप में हजारों सालों तक सुरक्षित रखने के लिए सोने के भाव पर बिका करता था.
प्राचीन काल का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक नेटवर्क
शोधकर्ताओं के अनुसार, ये खोज इंसानी सभ्यता के सबसे शुरुआती और सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार नेटवर्क का एक जीवित साक्ष्य बनकर उभरी है. जिस दौर में मिस्र में गीजा के महान पिरामिडों का ढांचा खड़ा किया जा रहा था, ठीक उसी समय पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र के सीरिया, लेबनान, फलस्तीन और इजराइल जैसे समृद्ध इलाकों से होकर विशाल व्यापारिक जहाज गुजरा करते थे.
ये छोटा व्यापारिक जहाज भी शायद अपनी यात्रा के दौरान किसी भयंकर समुद्री तूफान की चपेट में आ गया होगा और द्वीपों की आड़ में जान बचाने की कोशिश करते वक्त ऊंची चट्टानों से टकराकर समंदर में समा गया होगा. इसमें मिले बर्तनों की बनावट, उनकी नक्काशी और मिट्टी की बनावट का गहन विश्लेषण करने पर संकेत मिलते हैं कि इनका सीधा संबंध मध्य जॉर्डन घाटी और ऐतिहासिक लेवंत क्षेत्र की प्राचीन सभ्यताओं से रहा होगा.
मॉडर्न साइंस और टेक्नोलॉजी के लिए क्यों है ये लॉटरी?
- वैज्ञानिकों के लिए बड़ी लॉटरी: वैज्ञानिकों का मानना है कि बर्तनों से मिला ये चिपचिपा अवशेष आज की आधुनिक साइंस के लिए किसी जादुई लॉटरी से कम नहीं है.
- पैकेजिंग के पुराने तरीकों का खुलासा: इसकी केमिकल और बायोलॉजिकल जांच से ये पता चलेगा कि प्राचीन काल में लोग चीजों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए किन प्राकृतिक तरीकों और तकनीकों का इस्तेमाल करते थे.
- प्लास्टिक कचरे से मुक्ति का नया रास्ता: आज जब पूरी दुनिया प्लास्टिक के कचरे से परेशान है, तब हजारों साल पुराना ये ऑर्गेनिक फॉर्मूला हमें इको-फ्रेंडली और सुरक्षित पैकेजिंग मटेरियल बनाने का नया जरिया दे सकता है.
- दवाइयों और पर्यावरण सुरक्षा में मददगार: इस अवशेष के जरिए प्राचीन दवाओं, पर्यावरण सुरक्षा और प्राकृतिक फॉर्मूलों से जुड़े कई बड़े राज खुल सकते हैं.
- दुनिया का सबसे पुराना डूबा हुआ जहाज: यूनान के डोकोस तट पर मिले 4200 साल पुराने जहाज का रिकॉर्ड तोड़ते हुए ये अब तक की दुनिया की सबसे पुरानी खोज बन चुकी है.
समंदर की गहराइयों से निकला ये अनोखा टाइम कैप्सूल आने वाले कई दशकों तक मानव इतिहास के कई अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठाता रहेगा.