Russia Ukraine War Starlink: रूस से जंग लड़ रहे यूक्रेन की पीठ में किसने घोंपा छुरा? बीच रास्ते में स्टारलिंक बंद, ट्रंप-मस्क पर शक की सुई

Russia Ukraine War Starlink: रूस से जंग लड़ रहे यूक्रेन की पीठ में किसने घोंपा छुरा? बीच रास्ते में स्टारलिंक बंद, ट्रंप-मस्क पर शक की सुई


Starlink In Russia Ukraine War: भारत में स्टारलिंक को लाइसेंस देने पर बहस चल रही है. स्टारलिंक एक विदेशी कंपनी होने के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बना है. अब रूस-यूक्रेन युद्ध में यह देखने को मिला है कि अमेरिका जब नाराज होगा, तब वह इसे बंद कर सकता है. रूस के खिलाफ लड़ रहे यूक्रेन को मंगलवार रात सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक से जुड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा. यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, 160 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा रफ्तार से उड़ने वाले ड्रोन का कनेक्शन टूटने लगा. इससे यूक्रेन के मिलिट्री ऑपरेशन प्रभावित हुए. स्टारलिंक एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सर्विस है. यूक्रेन की सेना इसका इस्तेमाल ड्रोन चलाने और सैनिकों के बीच संपर्क बनाए रखने के लिए करती है.

बुधवार को सेवा कुछ हद तक ठीक हुई, लेकिन यूक्रेन के मुताबिक, रफ्तार पर लिमिट बनी थी. यूक्रेन को शक है कि यह पाबंदी जानबूझकर लगाई गई. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि पाबंदी किसने लगाई और इसकी वजह क्या थी. यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच रूस के तेल ठिकानों पर हमले न करने को लेकर तनाव बढ़ रहा है.

क्या हुआ स्टारलिंक के साथ?

यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार रात स्पेसएक्स ने मिलिट्री मिशन में इस्तेमाल हो रहे सैटेलाइट कनेक्शन पर अचानक पाबंदियां लगा दीं. इसके बाद तेज रफ्तार से उड़ने वाले ड्रोन की कनेक्टिविटी टूटने लगी. यूक्रेन के राष्ट्रपति के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्नोव ने कहा कि यूक्रेन की सेना को स्पीड लिमिट के बारे में पहले कोई वार्निंग नहीं दी गई थी. उनके मुताबिक, इस वजह से कई मिलिट्री ऑपरेशन प्रभावित हुए.

कुछ मिलिट्री यूनिट्स ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में 80 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा रफ्तार पर ही कनेक्शन टूट रहा था. यूक्रेन के अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती तौर पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की सीमा लागू हुई. यानी जैसे ही ड्रोन 160 किमी प्रति घंटी की स्पीड से ज्यादा रफ्तार पकड़ेगा वैसे ही कनेक्शन टूटने लगेगा. बुधवार को सेवा में कुछ सुधार हुआ, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई. यूक्रेन के पूर्व रक्षा मंत्री मायखाइलो फेडोरोव ने कहा कि स्टारशील्ड पर लगी स्पीड लिमिट को पूरी तरह हटाना यूक्रेन की रक्षा के लिए जरूरी है.

स्टारलिंक यूक्रेन के लिए क्यों जरूरी है?

स्टारलिंक सिर्फ इंटरनेट उपलब्ध कराने वाला सैटेलाइट नेटवर्क नहीं है. यूक्रेन की सेना इसका इस्तेमाल ड्रोन चलाने, सैनिकों के बीच संपर्क बनाए रखने और अलग-अलग कमांड पोस्ट को जोड़ने के लिए करती है. आम रेडियो नेटवर्क की तुलना में स्टारलिंक के जरिए ड्रोन ऑपरेटर लंबी दूरी तक संपर्क बनाए रख सकते हैं. यह टेक्नोलॉजी रूस की ओर से कम्युनिकेशन में में रुकावट डालने यानी जैमिंग से लड़ने में भी मददगार साबित होती है. युद्ध के मैदान में ड्रोन को दूर बैठे ऑपरेटर से वीडियो, आवाज और दूसरी जरूरी जानकारी मिलती रहती है. इससे सैन्य कमांडर दुश्मन की गतिविधियों को समझ सकते हैं और तेजी से फैसला ले सकते हैं.

BBC की रिपोर्ट के मुताबित इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) के विशेषज्ञ जॉर्ज बैरोस के मुताबिक, स्टारलिंक यूक्रेन के सैन्य संचार की रीढ़ बन चुका है. इसकी मदद से ड्रोन, आर्टिलरी और कमांड पोस्ट एक ही नेटवर्क की तरह काम कर सकते हैं. इससे दुश्मन का पता चलने और उस पर कार्रवाई करने के बीच लगने वाला समय कम होता है. ऐसे में अचानक कनेक्शन सीमित होने का असर सिर्फ इंटरनेट इस्तेमाल पर नहीं, बल्कि यूक्रेन की युद्ध लड़ने की क्षमता पर भी पड़ सकता है.

160 किलोमीटर प्रति घंटे की सीमा से क्या बदलेगा?

यूक्रेन के लिए सबसे बड़ी परेशानी रूस के तेज रफ्तार ड्रोन को रोकने में आ सकती है. यूक्रेन रूसी ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने के लिए इंटरसेप्टर ड्रोन का इस्तेमाल करता है. ये ऐसे ड्रोन होते हैं जिन्हें दुश्मन के ड्रोन का पीछा करके उसे रोकने के लिए तैयार किया जाता है. BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के जेट से चलने वाले शाहेद ड्रोन करीब 319 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकते हैं. यह रफ्तार स्टारलिंक पर लगाई गई 160 किलोमीटर प्रति घंटे की सीमा से काफी अधिक है.

अगर तेज रफ्तार पर उड़ते समय ड्रोन का सैटेलाइट कनेक्शन टूट जाता है, तो ऑपरेटर के लिए उसे कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है. इससे रूसी ड्रोन को रोकने के लिए यूक्रेन की ओर से किए जाने वाले कुछ अभियान प्रभावित हो सकते हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि इस पाबंदी से रूसी ठिकानों पर हमले करने और रूस के ड्रोन से अपने शहरों की रक्षा करने की क्षमता पर असर पड़ रहा है.

स्टारलिंक और स्टारशील्ड में क्या अंतर है?

स्टारलिंक और स्टारशील्ड, दोनों स्पेसएक्स से जुड़ी सेवाएं हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल अलग है.

  • स्टारलिंक: यह सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है. इसका इस्तेमाल आम लोग और कई संस्थाएं करती हैं. यूक्रेन की सेना भी इसका इस्तेमाल करती है.
  • स्टारशील्ड: यह अमेरिकी सरकार और सेना की जरूरतों के लिए बनाई गई विशेष सेवा है. यूक्रेन भी इसका इस्तेमाल अपने ड्रोन में करता है.

एलन मस्क और अमेरिकी सरकार ने क्या कहा?

मस्क ने स्टारलिंक और स्टारशील्ड को लेकर सफाई दी. उन्होंने कहा कि स्टारलिंक स्पेसएक्स की व्यावसायिक सेवा है, जबकि स्टारशील्ड अमेरिकी सरकार के नियंत्रण में है. इसकी गति या इस्तेमाल पर कोई भी सीमा अमेरिकी सेना और अमेरिकी राष्ट्रपति तय करते हैं.

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का स्टारलिंक से जुड़ी पाबंदियों से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने इस मामले को तकनीकी खराबी से जुड़ा बताया.

यूक्रेन के अधिकारियों ने व्हाइट हाउस, सीआईए और पेंटागन से भी संपर्क किया. वे जानना चाहते थे कि सेवा में परेशानी क्यों आई और इसे कैसे दूर किया जा सकता है.

ट्रंप और जेलेंस्की के बीच क्यों बढ़ा तनाव?

स्टारलिंक की समस्या ऐसे समय सामने आई, जब रूस से डीजल खरीदने के अमेरिकी फैसले को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद चल रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने रूसी डीजल की बिक्री पर लगी कुछ पाबंदियों में ढील दी. जेलेंस्की ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इससे रूस को आर्थिक फायदा होगा, जबकि वह यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है. इसके बाद ट्रंप ने यूक्रेन से रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने को कहा. उन्होंने यूक्रेन में नया राष्ट्रपति चुने जाने की बात भी कही, जिससे विवाद और बढ़ गया. ऐसा में इस बात की आशंका जताई जा रही है कि स्टारलिंक की स्पीड को कम करके उस पर रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने का दबाव बनाया गया.

यूक्रेन और स्टारलिंक विवाद से जुड़े सवाल

स्टारलिंक पर पाबंदी लगी तो क्या हुआ?

यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, तेज रफ्तार से उड़ने वाले ड्रोन का कनेक्शन प्रभावित हुआ. 160 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा रफ्तार पर कनेक्शन टूटने की शिकायत सामने आई. कुछ इकाइयों ने इससे कम रफ्तार पर भी समस्या बताई.

यह यूक्रेन के लिए इतना बड़ा मुद्दा क्यों है?

यूक्रेन स्टारलिंक का इस्तेमाल ड्रोन चलाने, सैन्य इकाइयों को जोड़ने और रूसी ड्रोन को रोकने के लिए करता है. कनेक्शन टूटने पर तेज रफ्तार वाले दुश्मन ड्रोन का पीछा करना और सैन्य अभियान चलाना मुश्किल हो सकता है.

स्टारलिंक और स्टारशील्ड में क्या अंतर है?

स्टारलिंक स्पेसएक्स की व्यावसायिक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है. स्टारशील्ड अमेरिकी सरकार और सेना की जरूरतों के लिए बनाई गई विशेष सेवा है. मस्क के मुताबिक, स्टारशील्ड पर लगी सीमाएं अमेरिकी सेना और राष्ट्रपति तय करते हैं.

स्टारलिंक के स्पीड पर पाबंदी किसने लगाई?

अब तक यह साफ नहीं है. यूक्रेन ने स्पेसएक्स की ओर से पाबंदी लगाए जाने की बात कही है. मस्क ने स्टारशील्ड के नियंत्रण को अमेरिकी सरकार से जोड़ा, जबकि अमेरिकी अधिकारियों ने ट्रंप प्रशासन की भूमिका से इनकार किया है.

क्या स्टारलिंक की सेवा बहाल हो गई है?

बुधवार को सेवा आंशिक रूप से बहाल हुई थी. लेकिन यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 160 किलोमीटर प्रति घंटे की सीमा बनी हुई थी. इसलिए समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी.

इसका ट्रंप और जेलेंस्की के विवाद से क्या संबंध है?

रूसी डीजल से जुड़े अमेरिकी फैसले, रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों और यूक्रेन में नया राष्ट्रपति चुने जाने की ट्रंप की मांग के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा. आशंका जताई जा रही है कि स्टारलिंक की पाबंदी इसी तनाव से जुड़ी हो सकती है.

पोलैंड इस मामले में क्यों नाराज है?

पोलैंड यूक्रेन के स्टारलिंक सब्सक्रिप्शन का भुगतान करता है. सेवा पर पाबंदी की खबर के बाद पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने मस्क पर तंज कसा और कहा कि यूरोपीय ग्राहक इस मामले पर नजर रख रहे हैं.



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