Rafale vs J-16 Fight : ‘धुरंधर’ राफेल के आगे ‘छछूंदर’ है ड्रैगन का J-16! आसमान में जलवा ऐसा देखा चीनी पायलटों ने भी झुका दिए सिर

Rafale vs J-16 Fight : ‘धुरंधर’ राफेल के आगे ‘छछूंदर’ है ड्रैगन का J-16! आसमान में जलवा ऐसा देखा चीनी पायलटों ने भी झुका दिए सिर


डिफेंस और एविएशन की दुनिया से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने चीन के होश उड़ा दिए हैं. आसमान की जंग में खुद को सबसे ताकतवर समझने वाले ड्रैगन का घमंड उस वक्त चकनाचूर हो गया जब उसके अपने ही पायलटों ने फ्रांसीसी फाइटर जेट राफेल की ताकत के आगे घुटने टेक दिए. मिस्र में हुए ‘ईगल्स ऑफ सिविलाइजेशन 2026’ युद्ध अभ्यास के दौरान जब चीन के शेनयांग जे-16 फाइटर जेट और मिस्र के राफेल की भिड़ंत हुई, तो क्लोज-रेंज कॉम्बैट यानी डॉगफाइट में राफेल की फुर्ती देख चीनी पायलट भी हैरान रह गए.

सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी पायलटों ने खुद ये माना है कि हवा में पैंतरेबाजी के मामले में राफेल का दूर-दूर तक कोई मुकाबला नहीं है. ये घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पाकिस्तान भारत के खिलाफ अपनी रणनीतिक चालें चल रहा है, लेकिन राफेल की इस धाक ने ये साबित कर दिया है कि आसमान का असली सिकंदर कौन है?

मिस्र के आसमान में पहली बार भिड़े राफेल और जे-16, ड्रैगन का घमंड हुआ चकनाचूर

अगस्त और सितंबर के महीनों में चीन और मिस्र की वायु सेनाओं ने मिलकर एक बड़ा सैन्य अभ्यास किया था. इतिहास में ये पहला मौका था जब चीन के भारी-भरकम जे-16 फाइटर जेट्स ने मिस्र के राफेल और मिग-29एम विमानों के खिलाफ सीधे युद्ध अभ्यास में हिस्सा लिया.

चीनी सैन्य मीडिया ने हवा से हवा में होने वाली लड़ाइयों और ट्रेनिंग के कई वीडियो तो जारी किए, लेकिन बीजिंग ने कभी आधिकारिक तौर पर ये नहीं बताया कि इस मुकाबले का स्कोरकार्ड क्या रहा. हालांकि, अंदरखाने से जो खबरें छनकर आईं, उन्होंने चीन की नींद उड़ा दी. आमने-सामने की टक्कर में राफेल ने जिस फुर्ती का प्रदर्शन किया, उससे चीनी क्रू भी गहरे प्रभाव में आ गया. चीनी पायलटों के मुंह से निकले तारीफ के शब्दों ने ये साबित कर दिया कि फ्रांस का ये फाइटर जेट डॉगफाइट के मामले में अपने प्रतिद्वंद्वियों पर भारी पड़ता है.

क्यों आसमान का ‘बाहुबली’ है राफेल? समझिए इसकी ताकत और तकनीकी फीचर्स

राफेल को दुनिया का सबसे खतरनाक और मल्टीरोल फाइटर जेट क्यों कहा जाता है, इसका जवाब इसके यूनीक डिजाइन और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी में छिपा है. आइए इसके उन खास फीचर्स को एक-एक करके समझते हैं जो इसे ड्रैगन के जे-16 से मीलों आगे खड़ा कर देते हैं.

  1. डेल्टा-कैनार्ड डिजाइन: राफेल का ये खास विंग डिजाइन इसे हवा में बिजली की तरह मुड़ने की ताकत देता है. जब विमान बेहद कम दूरी के हवाई संघर्ष यानी डॉगफाइट में होता है, तो इसका ये डिजाइन पायलट को पलक झपकते ही अपनी दिशा बदलने और दुश्मन के विमान के ठीक पीछे जाने की अद्भुत क्षमता प्रदान करता है.
  2. डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम: इसका एडवांस्ड कंप्यूटर सिस्टम पायलट के हर आदेश को तुरंत जमीन पर उतारता है, जिससे विमान किसी भी एंगल पर बिना अनियंत्रित हुए आसानी से कलाबाजी खा सकता है और खतरनाक से खतरनाक गोते लगा सकता है.
  3. मेटेओर मिसाइल की घातक मारक क्षमता: राफेल दुनिया की सबसे खतरनाक हवा से हवा में मार करने वाली ‘मेटेओर’ मिसाइल से लैस है, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के विमान को हवा में ही नेस्तनाबूद कर सकती है. दुश्मन को संभलने का मौका तक नहीं मिलता.
  4. स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट: राफेल का ये इन-बिल्ट डिफेंस सिस्टम दुश्मन के रडार को पूरी तरह चकमा देने और जैम करने में माहिर है. दुश्मन की कोई भी मिसाइल राफेल तक पहुंचने से पहले ही अपने रास्ते से भटक जाती है.
दुनिया मानती है राफेल का लोहा

चीन का जे-16: आकार में बड़ा, लेकिन फुर्ती के मामले में काफी पीछे

दूसरी तरफ, चीन का जे-16 एक भारी-भरकम ट्विन-इंजन यानी दो इंजन वाला मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो रूसी फ्लैंकर डिजाइन पर आधारित है.

  • लंबी दूरी और भारी पेलोड क्षमता: जे-16 की खूबी ये है कि ये अपने साथ बहुत सारे हथियार यानी भारी पेलोड लेकर लंबी दूरी तय कर सकता है. इसमें एडवांस्ड एविओनिक्स और बड़े रडार लगे हैं, जो इसे दूर से ही टारगेट तलाशने में मदद करते हैं.
  • कमी कहां रह गई: आकार में बड़ा होने और दो भारी इंजनों के कारण जे-16 को करीबी मुकाबले यानी डॉगफाइट में उतनी फुर्ती नहीं मिलती जितनी राफेल के पास है. हालांकि जे-16 अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों और भारी हथियारों के लिए जाना जाता है, लेकिन जब बात आमने-सामने की क्लोज कॉम्बैट की आई, तो राफेल की फुर्ती और चुस्ती के आगे वो पूरी तरह पिछड़ गया.

भारत के लिए क्या हैं चीन की हार के मायने?

ये पूरा घटनाक्रम भारत के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. भारत के पास पहले से ही अत्याधुनिक राफेल विमानों का एक मजबूत बेड़ा मौजूद है, जिनका इस्तेमाल भारतीय वायु सेना अपनी ताकत बढ़ाने और किसी भी नापाक हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए कर रही है.

डिफेंस एक्सपर्ट ये भी मानते हैं कि मिस्र का राफेल और भारत के राफेल में थोड़ा अंतर है. भारत ने अपने राफेल में देश की जरूरतों के हिसाब से ‘इंडिया स्पेसिफिक एन्हांसमेंट्स’ करवा रखे हैं, जो इसे दुनिया का सबसे खतरनाक राफेल बनाते हैं. इसके अलावा, पाकिस्तान लगातार भारतीय वायु सेना की लंबी दूरी की मिसाइल रणनीति का तोड़ खोजने में लगा है, लेकिन राफेल की ये सफलता साबित करती है कि भारतीय बेड़े की मारक क्षमता के आगे दुश्मन के किसी भी पैंतरे की दाल नहीं गलने वाली.

आसमान का असली सुल्तान कौन?

आसमान की इस जंग ने ये साफ कर दिया है कि सिर्फ कागजी ताकत या बड़े आकार से युद्ध नहीं जीते जाते. असली जीत विमान की टेक्नोलॉजी, उसकी फुर्ती और पायलट के बेहतरीन कौशल पर निर्भर करती है, और इन सभी पैमानों पर राफेल ने ड्रैगन के जे-16 को धूल चटाकर ये दिखा दिया है कि आसमान का असली सुल्तान कौन है. चीन के पायलटों का राफेल के सामने झुकना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि फ्रांसीसी इंजीनियरिंग का ये नायाब हीरा आज भी दुनिया के तमाम फाइटर जेट्स पर भारी पड़ रहा है.



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