मां कात्यायनी का वाहन सिंह है. उनके एक हाथ में तलवार और दूसरे में कमल का फूल दिखाया जाता है, जबकि अन्य हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में होते हैं. उन्हें साहस, आत्मविश्वास और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की शक्ति से जोड़कर देखा जाता है. धार्मिक मान्यता में उनकी पूजा को जीवन की बाधाओं से लड़ने और मन में दृढ़ता बनाए रखने की प्रेरणा माना जाता है.
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नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी को शहद अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है. पूजा में शहद के अलावा फल, मिठाई और अन्य सात्विक पकवान भी चढ़ाए जा सकते हैं. भोग लगाते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें और अपने परिवार की पूजा परंपरा के अनुसार सामग्री चुनें. धार्मिक मान्यता में देवी को भोग अर्पित करना श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटा जा सकता है.
नवरात्रि के छठवें दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें. पूजा स्थल की सफाई करें और मां दुर्गा के सामने दीपक जलाएं. इसके बाद मां कात्यायनी का ध्यान करते हुए फूल, रोली, अक्षत, चंदन और भोग अर्पित करें.
1. सबसे पहले मां कात्यायनी का ध्यान करके पूजा शुरू करें.
2. मां को फूल, अक्षत और चंदन अर्पित करें.
3. शहद या अपनी परंपरा के अनुसार सात्विक भोग लगाएं.
4. मां कात्यायनी के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें.
5. अंत में मां दुर्गा की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें.
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अगर पूजा की कोई सामग्री उपलब्ध नहीं है, तो अपनी श्रद्धा और घर की परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं. पूजा के दौरान मन को शांत रखकर देवी का ध्यान करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है.
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
मां की स्तुति के लिए दुर्गा सप्तशती में वर्णित यह मंत्र भी पढ़ा जाता है.
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना.
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
इस मंत्र के माध्यम से भक्त मां कात्यायनी से शुभता, शक्ति और जीवन में आने वाली बाधाओं का सामना करने का आशीर्वाद मांगते हैं.
जय जय अम्बे जय कात्यायनी.
जय जगमाता जग की महारानी.
बैजनाथ स्थान तुम्हारा.
वहां वरदाती नाम पुकारा.
कई नाम हैं कई धाम हैं.
यह स्थान भी तो सुखधाम है.
हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी.
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी.
हर जगह उत्सव होते रहते.
हर मंदिर में भक्त हैं कहते.
कात्यायनी रक्षक काया की.
ग्रंथि काटे मोह माया की.
झूठे मोह से छुड़ाने वाली.
अपना नाम जपाने वाली.
बृहस्पतिवार को पूजा करियो.
ध्यान कात्यायनी का धरियो.
हर संकट को दूर करेगी.
भंडारे भरपूर करेगी.
जो भी मां को भक्त पुकारे.
कात्यायनी सब कष्ट निवारे.