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पश्चिम चंपारण के किसानों ने गन्ने की CO-118 किस्म से बंपर पैदावार हासिल की है. STP तकनीक का इस्तेमाल करके प्रति एकड़ 740 क्विंटल तक उपज मिल रही है. इस विधि में लागत घटती है और मुनाफा तीन गुना तक बढ़ जाता है. सही किस्म के चुनाव से किसान डेढ़ से दो लाख रुपये तक शुद्ध लाभ कमा रहे हैं.
पश्चिम चंपारणः शहरदकालीन गन्ने की बुवाई का समय आ चुका है.ज्यादातर किसान अपनी साल भर की जमा पूंजी को इकट्ठा कर गन्ने की खेती में लग गए हैं.ज़िले में पांच बड़ी चीनी मिलें होने की वजह से किसानों को फसल की अच्छी कीमत मिल जाती है, जिससे उनका गुजारा अच्छी तरह से हो पाता है.हालांकि कुछ किसान ऐसे भी हैं, जिन्होंने गन्ने की खेती में कुछ ऐसा कर दिखाया है, जिसे अबतक असम्भव माना जाता था.
तीन गुना तक अधिक मुनाफा
आमतौर पर एक गन्ना किसान 10 महीने की इंतजार के बाद एकड़ में 50 से 70 हज़ार रुपए का मुनाफा अर्जित करता है, जो नुकसान की प्रबल संभावना से घिरा होता है.लेकिन कुछ किसानों ने इसका ऐसा तोड़ निकाला है, जिससे नुकसान की संभावना घटकर लगभग शून्य हो जाती है और मुनाफे का दायरा बढ़कर तीन गुना तक अधिक हो जाता है.
CO–118 किस्म का चुनाव
इन्हीं किसानों में से एक हैं रामनगर के सचिन सिंह.सचिन पिछले एक दशक से गन्ने की खेती करते हैं.इस दौरान उन्होंने इस क्षेत्र में कुछ ऐसे परीक्षण किए हैं, जिससे उनकी कमाई का दायरा एक आम गन्ना किसान की तुलना में तीन गुना तक बढ़ चुका है.दरअसल, सचिन ने गन्ने की राज्य स्तरीय प्रभेद को छोड़कर करनाला की एक किस्म को अपनी खेतों में जगह दी है, जिसे CO–118 के नाम से जाना जाता है.
एकड़ में 700 क्विंटल से अधिक की पैदावार
जहां गन्ने की एक आम किस्म एकड़ में 200 से 250 क्विंटल तक पैदावार देती है, वहीं CO–118 एकड़ में औसतन 740 क्विंटल तक पैदावार देती है.मजे की बात यह है कि इसमें लागत का आंकड़ा भी घट जाता है, क्योंकि इस किस्म के गन्ने की ज्यादातर खेती STP तकनीक से की जाती है.इस तकनीक के तहत एकड़ में सिर्फ 7 क्विंटल बीज की खपत होती है, जिससे 740 क्विंटल से भी अधिक पैदावार होती है.
तीन गुना बढ़ जाता है मुनाफे का दायरा
बात पौधों की करें तो एकड़ में सिर्फ 8300 पौधे (बीज) की बुवाई की जाती है, जिससे 50,000 पौधे (गन्ने) निकलते हैं.हर गन्ने का वजन औसतन दो से ढाई किलो तक होता है, जिससे एकड़ की पैदावार 740 क्विंटल से भी अधिक चली जाती है.इन सब में लागत का आंकड़ा लगभग एक लाख रुपए प्रति एकड़ तक आता है, जिससे सेम समय में ढाई से तीन लाख रुपए तक की आमदनी होती है.यानि, यदि लागत के एक लाख रुपए छांट लिए जाएं, तो डेढ़ से दो लाख का मुनाफा तय हो जाता है.