शत्रुओं पर चाहिए विजय, दशहरा को करें यह एक उपाय, कार्यों में भी मिलेगी सफलता!
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Dussehra 2026 Upay: दशहरा 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को है. दशहरा के दिन आप अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्ति और कठिन से कठिन कार्यों में सफलता प्राप्त करने के लिए उपाय कर सकते हैं. उस दिन का विजय मुहूर्त 46 मिनट का होगा. उसमें ही आपको तीनों लोकों पर विजय प्राप्त करने वाली देवी की पूजा करनी होगी.
दशहरा 2026: शत्रुओं पर विजय का उपाय. (Photo: AI)
Dussehra 2026 Upay: आप शत्रुओं से घिरे हुए हैं, वे आपके खिलाफ साजिशें करते रहते हैं, ताकि आपको हर कदम पर असफलता और संघर्ष का सामना करना पड़े. उनकी वजह से आपके बनते हुए काम बिगड़ जाते हैं या फिर उसमें विलंब हो जाता है. उनकी इन हरकतों से आपका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी खराब होता है. तनाव और चिंता बनी रहती है. ऐसी स्थिति में आप 20 अक्टूबर को दशहरा के दिन एक उपाय कर सकते हैं, जिससे आपको लाभ मिल सकता है. आपकों दुश्मनों पर विजय मिलेगी और आपकी सफलता के मार्ग भी खुलेंगे. आपकी कामयाबी में कोई बाधा नहीं होगा.
दशहरा 2026: शत्रुओं पर विजय का उपाय
शत्रुओं पर विजय और कार्यों में सफलता के लिए दशहरा के अवसर पर देवी अपराजिता की पूजा करनी चाहिए. देवी अपराजिता 10 दिशाओं की विजेता हैं, उनके समक्ष ऐसा कोई नहीं, जो अजेय हो. कठिन से कठिन कार्यों में सफलता के लिए देवी अपराजिता की पूजा करते हैं. उनके नाम से ही स्पष्ट है-वो देवी, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता है. ये तीनों लोकों को जीतने वाली देवी हैं.
कहा जाता है कि लंका विजय से पहले भगवान राम ने देवी अपराजिता की पूजा की थी. बंगाली रामायण और कुछ राम कथाओं में बताया जाता है कि भगवान राम ने रावण वध और लंका विजय के लिए शारदीय नवरात्रि में शक्ति का आह्वान किया. उसे अकाल बोधन के नाम से जानते हैं. इसमें ही दशहरा पर मां अपराजिता की पूजा विधि शामिल है.
धर्मसिंधु-निर्णयसिंधु जैसे ग्रंथों में बताया गया है कि विजयादशमी के अवसर पर राजा और योद्धा अपराजिता स्तोत्र पढ़ते थे. उनमें भी देवी अपराजिता की पूजा विधि बताई गई है.
आप भी अपने शत्रुओं पर विजय और सफलता के लिए दशहरा के दिन मां अपराजिता की पूजा करें. पूजा के समय आप ओम अपराजितायै नम: मंत्र का उच्चारण करें और अपराजिता स्तोत्र का पाठ करें.
अपराजिता पूजा मुहूर्त
दशहरा के अवसर पर देवी अपराजिता की पूजा का मुहूर्त दोपहर में 1 बजकर 59 मिनट से दोपहर 2 बजकर 45 मिनट तक है. इस दिन आपको पूजा के लिए 46 मिनट का शुभ मुहूर्त प्राप्त होगा.
रवि योग में होगी पूजा
दशहरा के दिन रवि योग बन रहा है, जो पूरे दिन रहेगा. इस योग में ही देवी अपराजिता की पूजा का मुहूर्त है. हालांकि उस दिन शूल योग और श्रवण नक्षत्र भी है. शाम 06:02 पी एम से धनिष्ठा नक्षत्र शुरू है, जो रात तक है.