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वाराणसी के मदनपुरा स्थित पुराने दुर्गा बाड़ी मंदिर में मिट्टी और पुआल से बनी मां दुर्गा की प्रतिमा विराजमान है, जिसे स्थानीय परंपरा के अनुसार 1767 से पूजने की मान्यता है. कहा जाता है कि दशमी पर प्रतिमा नहीं उठने के बाद मुखर्जी परिवार के मुखिया को स्वप्न आया था. तभी से यहां सालभर पूजा और नवरात्रि में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं.
वाराणसी: देवी की महिमा अपरमपार हैं.. ये चमत्कार देखना है तो आपको वाराणसी आना होगा. इस प्राचीन शहर के मदनपुरा इलाके में पुराना दुर्गा बाड़ी स्थित है. इस स्थान पर देवी का चमत्कार ऐसा की हर कोई इसे देख हैरान हो जाता है. यहां मिट्टी और पुआल की साधारण सी दिखने वाली मां दुर्गा की प्रतिमा 10-20 नहीं बल्कि 259 साल पुरानी है. इसे देवी का चमत्कार ही कहिये कि मिट्टी से बनी प्रतिमा आज भी वैसी ही जैसी 259 साल पहले थी.
दरअसल, वाराणसी में दुर्गा पूजा उत्सव का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है. 1767 में मदनपुरा क्षेत्र में रहने वाले मुखर्जी परिवार ने भी पुरे धूमधाम से इस उत्सव की शुरुआत की थी. नवरात्रि में देवी यहां विराजमान हुईं और तीन दिनों तक यह उत्सव धूमधाम से मनाया गया. लेकिन जब परम्परा के अनुसार दशमी पर देवी की विदाई की बारी आई तो 5 फीट की इस छोटी सी प्रतिमा को सैकड़ों लोग मिलकर भी नहीं उठा सके. मुखर्जी परिवार के लोग पूरे दिन परेशान रहे.
स्वप्न में कहीं ये बात
उसी रात देवी नें परिवार के मुखिया को रात में स्वप्न दिया. स्वप्न में देवी ने कहा की वो उनके पूजा पाठ से प्रसन्न हैं और अब वो हमेशा यही विराजमान रहेंगी. देवी ने मुखर्जी परिवार के मुखिया को यह भी कहा की वो फ़िक्र न करें हर दिन उन्हें बस यदि गुड़ और चने का भोग लग जाए तो भी वें प्रसन्न रहकर यहां रहेंगी. बस तब से देवी की मिट्टी और पुआल से बनी प्रतिमा पुराना दुर्गा बाड़ी के इस मंदिर में विराजमान हैं.
बेहद चमत्कारिक है देवी
मुखर्जी परिवार से जुड़ी सुमिता चक्रवर्ती नें बताया कि काशी में विराजमान यह देवी बेहद चमत्कारिक हैं. जो भी भक्त सच्चे मन से यहां देवी से अपनी मुरादें रखता है देवी उसकी मनोकामना जरूर पूरी करती हैं. 259 साल पहले देवी ने स्वप्न में जो बात कही थी उसी के मुताबिक, आज भी पुरे 365 दिन उनकी पूजा आराधना की जाती है. नवरात्रि में यहां नौ दिनों तक विशेष पूजा अनुष्ठान और पाठ होता है.इस दौरान परिवार के सदस्य भी इक्क्ठा होते है. नौ दिनों के इस अनुष्ठान के दौरान संगीत और परम्परागत नृत्य भी किया जाता है.
विराजमान है भगवान विष्णु
काशी में विराजमान देवी के इस शक्तिपीठ पर भगवान विष्णु के काले पत्थर की प्रतिमा भी विराजमान है. दावा किया जाता है की भगवान विष्णु की यह प्रतिमा 1000 साल पुरानी है.पुराना दुर्गा बाड़ी की दीवारों पर लगे पोस्टर पर इसका जिक्र भी है.