Delhi High Court gang rape ruling। Delhi High Court on woman gang rape accused। महिला पर भी चल सकता है 376D का केस, भले ही उसने संबंध ना बनाए हों: HC

Delhi High Court gang rape ruling। Delhi High Court on woman gang rape accused। महिला पर भी चल सकता है 376D का केस, भले ही उसने संबंध ना बनाए हों: HC


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महिला पर भी चल सकता है 376D का केस, भले ही उसने संबंध ना बनाए हों: हाईकोर्ट

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Delhi High Court Gang Rape Ruling: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी महिला पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376D और नए कानून भारतीय न्याय संहिता की धारा 70 के तहत आरोप तय किए जा सकते हैं, भले ही उसने खुद गैंग रेप में शारीरिक संबंध न बनाए हों. अदालत ने साझा मंशा और अपराध में कथित भूमिका को अहम माना. हालांकि, फैसला यह नहीं कहता कि महिला अकेले रेप कर सकती है या केवल मौजूदगी से दोष साबित हो जाता है.

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हाईकोर्ट ने कानूनी स्थिति स्‍पष्‍ट की.

दिल्ली हाईकोर्ट का एक ऐसा फैसला आया जिसने क्रिमिनल लॉ की दुनिया में हलचल मचा दी है. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर कोई महिला किसी गैंगरेप (Section 376D IPC) के अपराध में एक्टिव भूमिका निभाती है या आरोपियों की मदद करती है, तो उस पर भी गैंगरेप का ही केस चलेगा. अब तक महिला आरोपी अक्सर यह दलील देकर बच निकलती थीं कि बायोलॉजिकल वजहों से महिला पर रेप का डायरेक्ट चार्ज नहीं लग सकता. लेकिन कोर्ट ने इस कानूनी लूपहोल को पूरी तरह खत्म करते हुए कहा कि जुर्म में कॉमन इंटेंशन और एक्टिव रोल सबसे ज्यादा मायने रखता है, जेंडर नहीं. चाहे कोई लोकेशन की रखवाली करे या पीड़िता को जाल में फंसाए, साजिश में शामिल हर इंसान पर कानून का शिकंजा बराबर कसा जाएगा.

साझा मंशा और मदद की भूमिका अहम
मामला एक महिला आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा था. बचाव पक्ष का तर्क था कि रेप की कानूनी परिभाषा के तहत महिला खुद यह अपराध नहीं कर सकती. इसलिए उस पर गैंगरेप की धारा लगाना सही नहीं है. अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए धारा 376D में इस्तेमाल किए गए साझा मंशा के सिद्धांत पर जोर दिया. इस प्रावधान में एक या अधिक व्यक्तियों के साझा मंशा के तहत अपराध करने की बात शामिल है. ऐसे में जांच का अहम पहलू यह भी हो सकता है कि आरोपी ने अपराध को अंजाम देने में किस तरह की भूमिका निभाई. उदाहरण के लिए, किसी पीड़िता को फंसाने, उसे रोकने या अपराध के लिए जगह उपलब्ध कराने में कथित मदद की भूमिका की जांच की जा सकती है. लेकिन केवल वहां मौजूद होना या किसी आरोपी को जानना अपने आप में गैंगरेप का दोष साबित नहीं करता. आरोपों और उपलब्ध सबूतों की जांच जरूरी है.

धारा 376D और नए कानून में क्या है फर्क?
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि गैंगरेप के अपराध में शामिल लोगों के लिए कानून की भाषा को केवल पुरुषों तक सीमित नहीं किया जा सकता. अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376D के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 70 का भी जिक्र किया. दोनों प्रावधान गैंग रेप से जुड़े हैं.

साल 2013 के आपराधिक कानून संशोधन के बाद गैंगरेप को अलग अपराध के रूप में परिभाषित किया गया. अदालत के मुताबिक, इस प्रावधान की व्याख्या केवल बलात्कार की परिभाषा तक सीमित करके नहीं की जा सकती. इसमें साझा मंशा के तहत अपराध में शामिल व्यक्ति की भूमिका भी अहम है. हालांकि, अदालत ने यह फैसला नहीं दिया कि कोई महिला अकेले बलात्कार का अपराध कर सकती है या नहीं. उसने केवल यह स्पष्ट किया कि किसी महिला पर गैंगरेप का आरोप तय करने के लिए यह जरूरी नहीं कि उसने खुद शारीरिक रूप से बलात्कार किया हो.

क्या हर महिला आरोपी पर लगेगी गैंगरेप की धारा?
इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि किसी पुरुष आरोपी से परिचित होने या घटनास्थल पर मौजूद रहने भर से महिला पर गैंगरेप का आरोप साबित हो जाएगा. अभियोजन पक्ष को मामले के तथ्यों और सबूतों के आधार पर उसकी कथित भूमिका दिखानी होगी. अगर किसी महिला पर अपराध में सक्रिय मदद करने या साझा मंशा के तहत काम करने का आरोप है तो अदालत उस पर गैंगरेप की धारा के तहत आरोप तय करने पर विचार कर सकती है. इसके बाद मुकदमे में सबूतों के आधार पर दोष या निर्दोष होने का फैसला होगा.

इस फैसले से सामूहिक यौन अपराधों में जिम्मेदारी तय करने को लेकर कानूनी बहस को नई दिशा मिली है. अदालत ने साफ किया कि अपराध में कथित भागीदारी का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि आरोपी शारीरिक रूप से अपराध को अंजाम दे सकती थी या नहीं.



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