जमशेदपुर: कहते हैं कि इंसान की असली दौलत उसके बैंक बैलेंस में नहीं, बल्कि उसकी सेहत, हौसले और मेहनत करने की क्षमता में होती है. इस बात की मिसाल हैं जमशेदपुर के 80 वर्षीय चंचल कुमार मुखर्जी. उम्र के इस पड़ाव पर जहां अधिकतर लोग आराम करना पसंद करते हैं, वहीं चंचल आज भी उसी जोश, उमंग और उत्साह के साथ अपने काम पर निकलते हैं. शहर में उन्हें ‘यंग ओल्ड मैन’ के नाम से जाना जाता है. उनकी जिंदगी की कहानी बताती है कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो उम्र कभी रास्ते की रुकावट नहीं बनती.
34 साल से साइकिल पर कर रहे कोरियर की डिलीवरी
लोकल 18 के साथ खास बातचीत में चंचल कुमार मुखर्जी ने बताया कि वह पिछले 34 वर्षों से जमशेदपुर की गलियों, चौक-चौराहों और अलग-अलग इलाकों में कोरियर की डिलीवरी कर रहे हैं. आज भी वह अपनी साइकिल से रोजाना करीब 15 से 20 किलोमीटर का सफर तय करते हैं. इस दौरान वह लोगों तक जरूरी दस्तावेज और पार्सल पहुंचाते हैं. उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी मेहनत और सक्रियता देखकर लोग हैरान रह जाते हैं.
कंपनी में ठेकेदारी से शुरू हुआ सफर
चंचल कुमार मुखर्जी की जिंदगी हमेशा से ऐसी नहीं थी. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कंपनी में ठेकेदारी का काम करके की थी. कंपनी बंद होने के बाद उन्होंने मुंशी के तौर पर भी काम किया. कुछ समय तक उन्होंने हलवाई का काम भी किया. जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने कभी मेहनत करने से पीछे कदम नहीं खींचे.
एक मुलाकात ने बदल दी जिंदगी
चंचल बताते हैं कि एक दिन उनकी मुलाकात एक कोरियर बॉय से हुई, जो हाथ में चार से पांच पार्सल लेकर काफी परेशान था. यह देखकर चंचल ने उसकी मदद करने का फैसला किया. उन्होंने महज एक घंटे में सभी कोरियर की डिलीवरी कर दी. उनकी तेजी और काम करने के तरीके से प्रभावित होकर उस व्यक्ति ने उन्हें कोरियर कंपनी में काम दिलाने में मदद की. इसके बाद शुरू हुआ उनका सफर आज तक जारी है. पिछले 34 वर्षों से वह लगातार इस काम में जुटे हुए हैं.
सादा खानपान और अनुशासित जिंदगी है फिटनेस का राज
80 वर्ष की उम्र में भी सक्रिय रहने के पीछे चंचल अपनी सादी जीवनशैली को अहम मानते हैं. वह सुबह घर से निकलने से पहले दो रोटी खाते हैं. दोपहर में सादा खाना खाते हैं और रात करीब आठ बजे एक गिलास लाल चाय पीकर सो जाते हैं. उनका खानपान बेहद साधारण है, लेकिन काम के प्रति उनका उत्साह असाधारण है. हर सुबह वह नई उमंग और ऊर्जा के साथ घर से निकलते हैं.
परिवार की खुशी और शहर के लोगों का प्यार
चंचल कुमार मुखर्जी बताते हैं कि उनकी एक बेटी की शादी अच्छे परिवार में हुई है, जिससे वह काफी खुश हैं. उनके परिवार में पत्नी और एक बेटा भी है. शहर में लंबे समय से काम करने के कारण उन्होंने लोगों के बीच एक खास पहचान बनाई है. आसपास के लोग जब भी उनसे मिलते हैं, तो रुककर बातचीत जरूर करते हैं. उनके पास जमशेदपुर के पुराने दिनों और बदलते शहर से जुड़ी कई यादें हैं.
प्रेरणा हैं चंचल कुमार
चंचल कुमार मुखर्जी की कहानी सिर्फ एक कोरियर कर्मचारी की कहानी नहीं है, बल्कि यह मेहनत, आत्मनिर्भरता और सकारात्मक सोच की मिसाल है. वह अपने जीवन से यही संदेश देते हैं कि धनवान होने का मतलब सिर्फ पैसे वाला होना नहीं है. असली दौलत वह शरीर है, जो आपका साथ दे, और वह हौसला है, जो आपको हर सुबह उठकर अपने काम पर जाने की प्रेरणा दे. 80 साल की उम्र में भी साइकिल पर निकलने वाले चंचल आज जमशेदपुर के लिए सचमुच एक प्रेरणा हैं.