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Business Idea: बहराइच के रमाशंकर और उनकी पत्नी चांदनी ने बाढ़ और आर्थिक तंगी से हार मानने के बजाय शहर में फास्ट फूड स्टॉल शुरू किया. पहले गांव में रहकर खेती-बाड़ी करते थे. लेकिन हर साल आने वाली बाढ़ उनकी मेहनत और फसलों को पानी में बहा ले जाती थी. शादी के बाद जब परिवार बढ़ा और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी आई, तो आर्थिक तंगी ने चिंताएं बढ़ा दीं. ऐसे में उनकी पत्नी चांदनी ने हिम्मत दिखाई और अपने पति को शहर जाकर खुद का व्यवसाय शुरू करने का सुझाव दिया. चांदनी का मानना था कि गांव में बैठकर परिस्थितियों को कोसने से बेहतर है कि शहर चलकर मेहनत की जाए ताकि बच्चों को अच्छा भविष्य मिल सके.
बहराइच: आपदाओं और कठिन परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने के बजाय यदि सही सोच और हिम्मत के साथ कदम बढ़ाए जाएं, तो इंसान अपनी तकदीर खुद लिख सकता है. इसकी जीती-जागती मिसाल पेश की है बहराइच के रहने वाले रमाशंकर और उनकी पत्नी चांदनी ने. कभी गांव में बाढ़ और आर्थिक तंगी से जूझने वाला यह जोड़ा आज शहर में एक सफल फास्ट फूड स्टॉल चलाकर न सिर्फ आत्मनिर्भर बना है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गया है.
खेती में बाढ़ का कहर, पढ़ाई की चिंता ने दिखाया नया रास्ता
रमाशंकर बताते हैं कि वे पहले गांव में रहकर खेती-बाड़ी करते थे. लेकिन हर साल आने वाली बाढ़ उनकी मेहनत और फसलों को पानी में बहा ले जाती थी. शादी के बाद जब परिवार बढ़ा और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी आई, तो आर्थिक तंगी ने चिंताएं बढ़ा दीं. ऐसे में उनकी पत्नी चांदनी ने हिम्मत दिखाई और अपने पति को शहर जाकर खुद का व्यवसाय शुरू करने का सुझाव दिया. चांदनी का मानना था कि गांव में बैठकर परिस्थितियों को कोसने से बेहतर है कि शहर चलकर मेहनत की जाए ताकि बच्चों को अच्छा भविष्य मिल सके.
मिलकर की शुरुआत, आज स्वाद के दीवाने हैं लोग
पत्नी के सुझाव पर अमल करते हुए यह दंपत्ति बहराइच शहर आया और शर्मा होटल के सामने, मेडिकल कॉलेज के बगल में अपना एक छोटा सा फास्ट फूड स्टॉल शुरू किया. रमाशंकर और चांदनी मिलकर इस स्टॉल को संभालते हैं.वे तंदूरी चाय, वड़ा पाव, स्वादिष्ट मैगी, मोमोज, फरा और बन-मक्खन जैसी चीजें तैयार करते हैं. गुणवत्ता और बेमिसाल स्वाद की बदौलत आज उनके स्टॉल पर लोगों की अच्छी-खासी भीड़ उमड़ती है. घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर पति के कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाली चांदनी अन्य महिलाओं के लिए भी एक मिसाल हैं. वे कहती हैं, जो महिलाएं परेशानियों से जूझ रही हैं, उन्हें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए. आगे आकर मेहनत करनी चाहिए, राह अपने आप निकल आती है.
सुधर रहे हालात, बच्चों के एडमिशन की तैयारी
इस स्टॉल से होने वाली आय से न सिर्फ घर का दैनिक खर्च आसानी से निकल रहा है, बल्कि दंपत्ति अपने बच्चों के अच्छे स्कूल में एडमिशन कराने की तैयारी भी कर रहे हैं. जिस तंगी ने कभी इनका रास्ता रोका था, आज वही मेहनत और इच्छाशक्ति के बल पर पीछे छूट चुकी है.